रांची, राज्य ब्यूरो। पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि झारखंड में विश्व की अर्थव्यवस्था संभालने की ताकत है। वे यहां आयोजित ग्लोबल स्किल समिट-2019 को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय मंत्री ने कृषि, उद्योग, पर्यटन, सर्विस सेक्टर सहित अन्य क्षेत्रों में राज्य में किए जा रहे कार्यो का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड में देश की अर्थनीति को गति देने की क्षमता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि दुनिया तेजी से परिवर्तित हो रही है और इस परिवर्तन में भारत भी पीछे नहीं रहेगा। इनमें पूर्वी भारत सबसे आगे रहेगा। केंद्रीय मंत्री ने झारखंड के युवाओं को मेहनती बताते हुए कहा कि यदि यहां के लोग बड़े शहरों में नहीं पहुंचेंगे तो उनके कल-कारखाने नहीं चलेंगे। इस मौके पर उन्होंने अपने दुबई दौरे का जिक्र किया। कहा, कुछ दिन पूर्व हम वहां गए थे। वहां 2020 तक 50 हजार ड्राइवरों की आवश्यकता है। झारखंड से वहां दस हजार युवाओं को प्रशिक्षित कर पहुंचाया जा सकता है।

सिर्फ यूएई ही नहीं, जापान, यूरोप अमेरिका सभी जगह प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है। झारखंड जैसे राज्य इस जरूरत को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने वियतनाम से झारखंड की तुलना की और उसके पूर्व की संघर्ष यात्रा को भी साझा किया। कहा, वियतनाम ने अमेरिका सहित अन्य देशों से वर्षो लड़ाई की और आज वही वियतनाम चीन जैसे देश को टक्कर दे रहा है। टेक्सटाइल जैसे क्षेत्र में एक शक्ति बनकर उभर रहा है।

प्रधान ने कहा कि झारखंड में भी सभी तरह के रिसोर्स हैं। टाटा स्टील का उदाहरण दिया। कहा, ऐसे प्रयोग राज्य के अन्य जगहों पर भी हो सकते हैं। झारखंड के युवा भी मेहनती है, वे बदलाव ला सकते हैं, राज्य और देश की अर्थनीति को दिशा दे सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में हम 21 वीं सदी में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हम सभी झारखंड और देश को मिलकर एक प्रमुख शक्ति संपन्न राज्य बनाएं।

गरीब की कोई जात नहीं होती : धर्मेद्र प्रधान ने आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में दस फीसद आरक्षण देने को लेकर किए गए संविधान संशोधन की भी चर्चा की। कहा, देश के इतिहास में शुक्रवार को एक नया अध्याय जोड़ा गया। 124 वां संविधान संशोधन कर सरकार ने भारत के गरीब लोगों के लिए दस फीसद आरक्षण का प्रावधान किया है। आजादी के 70 साल बाद भी यह प्रश्न सबके सामने था। क्योंकि गरीब की कोई जाति, संप्रदाय व धर्म नहीं होता। गरीबी एक अभिशाप है।

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