रांची/देवघर, राज्य ब्यूरो। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद राज्य सरकार ने श्रावण पूर्णिमा के मौके पर सोमवार को शर्तों के साथ 100 श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन की व्यवस्था करने का आदेश दिया है। अभी यह व्यवस्था सिर्फ देवघर के स्थानीय लोगों और नियमित सरकारी पूजा में शामिल होने वाले लोगोंं के लिए की गई है।

इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनने, सैनिटाइजर लगाने, शारीरिक दूरी का पालन करने समेत तमाम गाइडलाइन का अनुपालन करने की शर्त रखी गई है। निर्देश दिया गया है कि कम से कम 100 श्रद्धालुओं को सावन पूर्णिमा के मौके पर दर्शन की सुविधा दी जाय। श्रद्धालुओं के दर्शन की पूरी व्यवस्था को सीसीटीवी कैमरे में कैद किया जाएगा। सरकार की ओर से जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि मंदिर को भादो के महीने में खोलने के मुद्दे पर बाद में निर्देश जारी किया जाएगा।

क्या हुई है व्यवस्था

देवघर के मंदिर प्रभारी विशाल सागर के हवाले से जारी जानकारी के मुताबिक सोमवार को मंदिर का पट सुबह 4:15 बजे खुलेगा। इसके बाद सरदार पंडा की अगुवाई में चिन्हित पुरोहित और नित्य पूजा में शामिल होने वाले स्थानीय 100 श्रद्धालुओं को प्रशासनिक भवन के रास्ते 150 मीटर लंबे फुट ओवरब्रिज के रास्ते शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कराया जाएगा। इस दौरान सबकी थर्मल स्कैनिंग भी होगी। दर्शन के लिए एक श्रद्धालु को 20 सेकेंड का समय मिलेगा। मंदिर का पट सुबह 6: 30 बजे बंद कर दिया जाएगा। वहीं शाम में सात बजे मंदिर का पट खोलकर 8:15 बजे बंद कर दिया जाएगा।

कैसे चला घटनाक्रम

गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर श्रावणी मेला व कांवर यात्रा के लिए मंदिर खोले जाने की मांग की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने कोरोना महामारी के चलते मंदिर में दर्शन पर लगाई गई रोक को सही माना था। हाई कोर्ट ने सरकार से इंटरनेट के जरिये लोगों के लिए ऑनलाइन दर्शन कराने की व्यवस्था करने को कहा था। इसके बाद सांसद निशिकांत दुबे सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी झारखंड हाई कोर्ट के तीन जुलाई के आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया था, लेकिन आदेश में यह कहा गया कि बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दर्शन पर पूरी तरह रोक सही नहीं है। सीमित संख्या में शारीरिक दूरी के साथ लोगों को इजाजत दी जानी चाहिए।

'श्रद्धालुओं को फूल व जल ले जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें पूरी तरह सैनिटाइज किया जाएगा। श्रद्धालुओं का चयन पंडा धर्मरक्षिणी महासभा एवं मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारियों द्वारा किया गया है। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट और सरकार के निर्देश के आलोक में सिर्फ सोमवार के लिए बहाल की गई है।' -कमलेश्वर प्रसाद सिंह, उपायुक्त देवघर।

'सुप्रीम कोर्ट के स्तर से दिए गए सुझावों का हम सम्मान करते हैं। सरकारी पूजन के बाद पूरे एहतियात के साथ 100 आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कराया जाएगा।' -बाबा झा, प्रतिनिधि, सरदार पंडा, बैद्यनाथ मंदिर।

31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का क्या था आदेश

ऑनलाइन दर्शन को वास्तविक दर्शन नहीं कहा जा सकता। सीमित संख्या में शारीरिक दूरी के साथ लोगों को दर्शन की इजाजत दी जानी चाहिए। टोकन जारी करना भी एक तरीका हो सकता है। जब सारी चीजें खुल रही हैं तो ऐसे में धाॢमक महत्व के मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि भी खुलने चाहिए। राज्य सरकार आने वाली पूॢणमा और भादो मास में इस व्यवस्था को लागू करने की कोशिश करे।

3 जुलाई को हाई कोर्ट ने क्या कहा था

मंदिर खोलने और श्रावणी मेला हो या नहीं इससे जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए तीन जुलाई को झारखंड हाई कोर्ट ने कहा था कि वर्तमान समय इतने बड़े मेले के आयोजन का नहीं है। वैष्णो देवी और बालाजी की तर्ज पर बाबा मंदिर में ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था होनी चाहिए। श्रद्धालुओं की भावना देखते हुए पूरे सावन महीने सरकार ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था कराए।

काशी विश्वनाथ मंदिर में हो रहा दर्शन-पूजन

श्रावण मास में बाबा मंदिर में भले भोलेनाथ के दर्शन से श्रद्धालु वंचित रह गए, लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों को भगवान के दर्शन हुए। वहां व्यवस्था की गई है कि पांच-पांच श्रद्धालुओं का जत्था मंदिर में प्रवेश करेगा। फिर निश्चित अंतराल और दूरी के बाद दूसरा जत्था आगे जाता है। मास्क और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था है। भीड़ लगाने पर सख्त पाबंदी है, इस पर पुलिस नजर रखती है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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