रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट ने रामगढ़ में अलीमुद्दीन अंसारी हत्याकांड के सजायाफ्ता दीपक मिश्र को जमानत दे दी है। गुरुवार को अदालत ने उन्हें दस-दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। इससे पहले एक बार हाई कोर्ट ने दीपक मिश्र को जमानत देने से इन्कार कर दिया था। दरअसल, निचली अदालत ने इस मामले में दीपक मिश्र सहित अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उनकी ओर से निचली अदालत के सजा के खिलाफ अपील दाखिल कर जमानत की गुहार लगाई गई थी।

सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता एके कश्यप ने अदालत को बताया कि मॉब लिंचिंग की घटना के दौरान दीपक मिश्र को नेतृत्वकर्ता बताया गया था। इसका कोई साक्ष्य नहीं है। इसके अलावा अलीमुद्दीन की पत्नी ने जिस असलम अंसारी की सूचना देने पर प्राथमिकी दर्ज कराई है, निचली अदालत में उसकी गवाही नहीं की गई है। साथ ही, अलीमुद्दीन को मारने में उपयोग किए गए लाठी-डंडे दीपक मिश्र के घर से बरामद नहीं किए गए थे।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें जमानत की सुविधा मिलनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने दीपक मिश्र को जमानत की सुविधा प्रदान कर दी। ज्ञात हो कि प्रतिबंधित मांस ले जाने के आरोप में जून 2017 में अलीमुद्दीन की पीटकर हत्या कर दी गई। इस मामले में निचली अदालत ने मार्च 2018 में 11 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दीपक मिश्र को छोड़कर सभी को पूर्व में हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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