रांची/गिरिडीह, जेएनएन। झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में हुई वज्रपात की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं, दो दर्जन लोग घायल हो गए। पहली घटना में सरायकेला खरसांवा जिले के ईचागढ थाना क्षेत्र के आमनदीरी टोला जोजोडीह गांव निवासी राजेंद्र पुरान (30) वर्ष की शनिवार को ठनका गिरने से मौत हो गई।

दूसरी घटना में धनबाद के पश्चिमी टुंडी के मनियाडीह थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव की है। यहां शनिवार की शाम खेत में धान रोपकर लौट रही महिला की वज्रपात की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

तीसरी घटना गिरिडीह जिले के खोरीमहुआ में वज्रपात ने एक महिला की जान ले ली। वहीं, इसकी चपेट में आने से दर्जनाधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों में दो की स्थिति गंभीर बनी हुई है। धनवार प्रखंड के टुनमलकी, खेतो एवं चंद्रखो गांव के बीच बहियार में शनिवार दोपहर बाद यह घटना हुई। इसकी चपेट में आने से टुनमलकी निवासी राजेन्द्र यादव की पत्नी उर्मिला देवी (45) की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल मनोज तुरी एवं चंद्रिका तुरी की गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों को अन्यत्र रेफर कर दिया गया है।

वहीं, चौथी घटना गिरिडीह के मुफस्सिल थाना अंतर्गत मटुरखा गांव में घटी। यहां वज्रपात की चपेट में आने से तीस वर्षीय दिव्यांग करमी कुमारी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी भाभी सुवंती देवी झुलस गई है।

वज्रपात से दादी की मौत, पोते की हालत नाजुक
गिरिडीह में रविवार को डुमरी थाना क्षेत्र के कल्हाबर में वज्रपात से 45 वर्षीय महिला चंद्रवती देवी की मौत हो गई, जबकि उनका पोता गौतम तुरी बुरी तरह से झुलस गया। उसकी हालत नाजुक है। गौरतलब है कि झारखंड में अब तक वज्रपात के कई लोगों की मौत हो चुकी है।

पारसनाथ पर्वत पर आदिनाथ टोंक वज्रपात से क्षतिग्रस्त
जैन धर्मावलंबियों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पारसनाथ पर्वत स्थित भगवान आदिनाथ का टोंक वज्रपात से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टोंक के साथ-साथ भगवान का चरण भी खंडित हुआ है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार की मध्य रात्रि बादलों की गड़गड़ाहट तथा तेज चमक के साथ वज्रपात से टोंक क्षतिग्रस्त हो गया। पारसनाथ पर्वत 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों का निर्वाण स्थल है। यहां पर 24 तीर्थंकरों के अलावा गौतम स्वामी व अन्य आचार्य के टोंक बने हुए हैं। इन टोंको में कोई प्रतिमा नहीं है बल्कि भगवन के चरण स्थापित किए गए हैं। इन टोंको में से एक भगवान आदिनाथ के टोंक पर वज्रपात हो गया।

बताया जाता है कि पहले भी इस तरह की घटनाएं घट चुकी थी। इससे बचने के लिए सभी टोंको में तड़ित चालक लगाया गया था। आदिनाथ टोंक में भी तड़ित चालक लगा था, बावजूद वज्रपात से क्षतिग्रस्त हो गया। ऐसे में वज्रपात से हुई टोंक की क्षति की घटना यहां चर्चा का विषय बना हुआ है कि जहां तड़ित चालक लगा हुआ है, वे सभी टोंक वाकई में सुरक्षित है।

Posted By: Sachin Mishra

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