रांची, जेएनएन। दिवाली को लेकर खरीददारों से बाजार गुलजार है। घर की सजावट से लेकर साड़ी, कपड़े और गहनों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दुकानदारों का कहना है कि दिवाली में दस दिन के आसपास का समय बचा है। ऐसे में ग्राहकों से बाजार गुलजार है। माह के अंत में दिवाली होने से भी वेतनभोगी ग्राहक पहले खरीदारी कर रहे हैं।

पिछले दिनों बाजार में आर्थिक मंदी की खबरों के बावजूद कारोबारियों को दीवाली पर जमकर पैसों की बारिश होने की उम्मीद है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार दीपावली पर बाजार पिछले साल की अपेक्षा अधिक मुनाफे वाला रहेगा। बाजार में ज्यादातर दुकानों में कपड़ों व इलेक्ट्रॉनिक्स समानों पर  बड़ी छूट भी दी जा रही है। महिलाएं घर की सजावट के सामान और गहनों की खरीदारी में जुटी हैं। 

कपड़ों पर मिल रहा भारी छूट

दीपावली पर बाजार में ग्राहकों को कपड़ों पर भारी छूट दी जा रही है। ज्यादातर दुकानों में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही हैं। अपर बाजार के साड़ी विक्रेता विनोद जायसवाल ने बताया कि बाजार में ग्राहक आ रहे हैं। महिलाएं कॉटन और फैंसी साडिय़ों की ज्यादा मांग कर रही हैं। सिल्क की मांग चंदेरी और कांजीवरम से कुछ कम है। ढकाई के एक बार फिर से फैशन में आने के कारण मांग बढ़ी है। महिलाएं साड़ी से मैचिंग आर्टिफिशियल गहनों की भी खरीदारी कर रही हैं। कान के मैचिंग इयर रिंग 250-500 तक में बाजार में उपलब्ध है। वहीं कंगन भी 150-350 तक में उपलब्ध हैं।

पुरुष भी खरीदारी में नहीं है पीछे

इस दिवाली पुरुष भी खरीदारी में पीछे नहीं हैं। पुरुष परिधानों की भी अच्छी बिक्री हो रही है। बाजार में पारंपरिक  कपड़ों के साथ जिंस और शर्ट की भी मांग है। पुरुष परिधान पर भी बाजार में अच्छी छूट मिल रही है। डिजाइनर कुर्ता पैजामा 700-1500 रुपये तक में उपलब्ध है।

बाजार में हैं रांची के बने तोरण

बाजार में इस साल रांची के बने हुए तोरण बाजार में उपलब्ध हैं। इससे पहले तोरण ज्यादातर कोलकाता से आते थे। इसके अलावा माल दिल्ली से भी मंगाया जाता था। दिवाली पर रंगोली बनाने के लिए की परंपरा है। इसके लिए बाजार में 20-50 तक के कई रंग के रंगोली रंग उपलब्ध हैं। वहीं जिन्हें रंगोली बनाने नहीं आती अनके लिए 30-100 तक में रंगोली स्टीकर भी उपलब्ध है।

गिफ्ट पैक डेढ़ सौ रुपये से पांच सौ रुपये तक में उपलब्ध

गिफ्ट पैक डेढ़ सौ रुपये से पांच सौ रुपये तक में उपलब्ध है। वहीं, फैशन के इस दौर में पारंपरिक मिट्टी के दीये की डिमांड कम नहीं हुई है। बदलते दौर को देखते हुए कुम्हार मिट्टी के एक से बढ़कर एक डिजाइनर दीये तैयार कर रहे हैं। कुम्हार टोली, हरमू रोड, मोरहाबादी, चुटिया आदि इलाके में सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन के दर्जनों दुकानें हैं। यहां पर खरीदारों की भीड़ देखी जा सकती है। मांग को देखते हुए कुम्हार बाहर से भी फैशनेबल दीये मंगा रहे हैं।

मिट्टी के दीये आज भी पहली पसंद

अमीर वर्ग जहां इलेक्ट्रिक लाइट, टेराकोटा दीये आदि पसंद कर रहा है वहीं, पारंपरिक मिट्टी के दीये मध्यमवर्गीय की आज भी पहली पसंद है। मिट्टी के दीये सस्ता होने के साथ शुद्ध माना जाता है। धर्म कार्य में मिट्टी के दीये की प्रधानता होती है। धार्मिक मान्यता के कारण भी इसकी बिक्री आज भी कम नहीं हुई है। हरमू रोड में सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन दुकानदार राजकुमारी देवी के अनुसार मिट्टी के दीये की डिमांड कम नहीं हुई है लेकिन लोग फैशनेबल दीये खोजते हैं। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए ग्रामीण इलाके मांडर, खूंटी, सिमडेगा से दीये मंगाए जा रहे हैं। इसकी कीमत पांच रुपये से 50 रुपये तक है। वहीं, सिंपल दीये की कीमत एक रुपये प्रतिपीस है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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