गोला (रामगढ़), जासं। रामगढ़ जिले के कृषि बहुल गोला प्रखंड के खेतों में लगे धान के पौधे में जानलेवा कीड़े लगने से धान की फसल पुआल की खाक के रूप में तब्दील होती जा रही है। इससे किसान काफी चिंतित और मर्माहत हैं। इस जानलेवा बीमारी को समय पर काबू में नहीं लाया जाता है, तो यहां के किसानों के समक्ष भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

बताया जाता है कि गोला प्रखंड क्षेत्र के चोकाद, डुंडीगाछी, बेटुलकलां, बेटुलखुर्द, टांडिल, पतरातू, मगनपुर, सरला आदि दर्जनों गांव के खेतों में लगी धान की फसल में सूक्ष्म आकार के कीड़ों का दल लाखों की संख्या में पौधों में मधुमक्खी की भांति लग जाते हैं। कच्चे धान के दाने में नहीं, पौधे में कीडे़ लग जाते हैं। पौधे को पूरी तरह से कीड़े चूस जाते हैं। वहीं से धान की फसल पुआल बनना शुरू हो जाती है।

धीरे-धीरे पूरा खेत कीड़े की चपेट में आ जाता है। इससे धान पूरी तरह से चौपट हो जाती है। प्रभावित किसानों ने अपने स्तर से इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक दवाओं को खेतों में डाला है। लेकिन कीड़ों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है और धान देखते ही देखते स्वाहा होते जा रहे हैं। किसानों को इसके उपचार के लिए प्रखंड से अबतक कोई सलाह नहीं दी गई है।

गोला प्रखंड के चोकाद गांव के बीरबल महतो, करमू महतो, डुंडीगाछी गांव के धनेश्वर महतो, मनोरंजन महतो, अंदू महतो, गंगासागर महतो, अरुण महतो, राजेश महतो, दुलेश्वर महतो, हीरालाल महतो, कैलाश महतो, गोविंद महतो, नंदकिशोर महतो, सेवधर महतो, कांसीनाथ महतो, उमेश महतो, धनंजय महतो व लालकिशुन महतो के सैकड़ों एकड़ खेत में लगे धान कीडे़ की चपेट में आकर पूरी तरह से चौपट हो गए हैं।

किसानों ने बताया कि पूरे क्षेत्र के खेतों में कीड़े तेज गति से फैल रहे हैं। धान पकने से पहले खेत में ही धान पुआल का रूप ले सकता है। क्षेत्र के अधिकांश किसानों के धान की फसल इस रोग से प्रभावित हो रही है।

Edited By: Sujeet Kumar Suman

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