रांची, राज्य ब्यूरो। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने कोरोना से निपटने के लिए सभी जिलों को 50-50 लाख रुपये शनिवार को जारी कर दिए। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी अनुशंसा की थी। कुल 12 करोड़ रुपये विभिन्न जिलों को जारी किए गए। विभाग ने मेडिकल कॉलेजों व जिला अस्पतालों में स्थापित क्वारंटाइन सेंटरों व आइसोलेशन सेंटरों के लिए भी 43.10 करोड़ रुपये की मांग की थी। बता दें कि राज्य सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए 200 करोड़ रुपये आपदा राहत फंड से उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस राशि से ही स्वास्थ्य विभाग और उपायुक्तों को राशि प्रदान की जा रही है। इधर, चतरा में मां भद्रकाली मंदिर का कपाट 31 मार्च तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

कोरोना से बचाव के लिए उठाएंं सारे आवश्यक कदम : राज्यपाल

राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को मुख्य सचिव डॉ. डीके तिवारी तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी को राजभवन बुलाकर राज्य सरकार द्वारा कोरोना से निपटने तथा इसके प्रसार को रोकने को लेकर अबतक की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने दोनों पदाधिकारियों से कहा कि कोरोना से बचाव के लए सारे आवश्यक कदम उठाए जाएं।

राज्यपाल ने राजभवन में कोरोना से बचाव को लेकर किए गए प्रयासों की समीक्षा की। दोनों अधिकारियों ने राज्यपाल को बताया कि झारखंड में अभी तक इसका मरीज नहीं मिला है। इसके बावजूद सारे एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। पदाधिकारियों ने राज्य सरकार द्वारा जारी रेगुलेशन, 200 करोड़ रुपये के फंड उपलब्ध कराने तथा लोगों के बीच जागरूकता लाने को लेकर किए जा रहे प्रयासों से भी राज्यपाल को अवगत कराया। साथ ही, सभी जिलों के उपायुक्तों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन हेतु दिशा-निर्देश जारी करने की जानकारी दी।

इधर, राज्यपाल ने कोरोना से बचाव को लेकर लोगों से अगले कुछ सप्ताह तक सजग और सतर्क रहने तथा बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है। 60 से 65 वर्ष या इससे अधिक आयु के लोगों तथा बच्चों को घर में रहने का सुझाव दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर रविवार को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक जनता कफ्र्यू का पालन करने की भी अपील की है। साथ ही, रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल जाने से बचने, किसी परिचित चिकित्सक से फोन पर ही सलाह लेने, जो सर्जरी बहुत आवश्यक न हो उसकी तिथि आगे बढ़ाने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने बेवजह सामान संग्रह नहीं करने तथा अफवाहों से बचने की भी अपील की है।

कोरोना से बचाव के उपाय बताएंगे राज्य के 2745 पीएलवी

राज्य के 2745 पीएलवी (पारा लीगल वॉलेंटियर) कोरोना वायरस से बचाव के उपायों की जानकारी देंगे। साथ ही, वे स्वास्थ्य सेवाओं में मदद करने के लिए भी तैयार हैं। झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस एचसी मिश्र ने इस संंबंध में राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा है कि राज्य में 2745 पीएलवी हैं, जिनका इस्तेमाल कोरोना वायरस से बचाने के उपायों की जानकारी देने में लिया जा सकता है।

पीएलवी की पहुंच तालुका से लेकर गांव तक है, ऐसे में वे लोगों को अपनी भाषा में कोरोना वायरस से बचाव के उपायों की जानकारी देने में सक्षम हैं। इसके अलावा उन्हें चिकित्सकीय टीम की सुरक्षा सहित अन्य कार्यों में लगाया जा सकता है। इससे सभी को सहुलियत होगी। पत्र में यह भी कहा गया है कि जब तक चाहे जिला प्रशासन पीएलवी की सेवा ले सकता है।

इसके लिए पीएलवी को झालसा की ओर से भुगतान किया जाएगा। झालसा कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस एचसी मिश्र की ओर से सीएस को पत्र लिखने के बाद झालसा ने भी सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को निर्देश जारी किया है। झालसा ने कहा है कि जस्टिस एचसी मिश्र के पत्र का अक्षरश: पालन किया जाए। दरअसल, राज्य के सभी जिला विधिक प्राधिकार में पीएलवी की नियुक्ति की गई है, जो लोगों को कानूनी जागरूकता प्रदान करते हैैं।

सरहुल और रामनवमी जुलूस पर डीसी लगाएं रोक

कोरोना से बचाव को लेकर राज्य सरकार ने सरहुल व रामनवमी जुलूस पर रोक लगाने का भी निर्णय लिया है। हालांकि इस संबंध में स्पष्ट रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन उपायुक्तों से आयोजकों से बात कर अगले सप्ताह आयोजित होनेवाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों व कार्यक्रमों पर रोक लगाने को कहा गया है। स्वास्थ्य सचिव डा. नितिन मदन कुलकर्णी ने सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर यह निर्देश देते हुए कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए व्यक्तियों के बीच सामाजिक दूरी जरूरी है।

इस संबंध में पहले ही मुख्य सचिव द्वारा दिशानिर्देश जारी किया जा चुका है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा भेजे गए अद्यतन दिशानिर्देश का भी हवाला देते हुए कहा है कि आगामी सप्ताह धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होंगे। वर्तमान परिस्थिति में इस प्रकार का आयोजन पूरी तरह अवांछनीय है। ऐसे में तत्काल आयोजकों से वार्ता कर ऐसे आयोजनों को हतोत्साहित किया जाना आवश्यक है।

31 मार्च तक बंद रहेगा भद्रकाली मंदिर का कपाट

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए चतरा का ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर का कपाट 31 मार्च तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। 31 मार्च तक मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी रहेगी। मंदिर की नियमित पूजा के अनुष्ठान में सिर्फ पुजारी शिरकत करेंगे। इस बाबत शनिवार को मंदिर के कार्यालय कक्ष में मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव सह अंचल अधिकारी बैद्यनाथ कामती ने की।

इस मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय कुमार भी उपस्थित थे। बैठक के दौरान कोरोना वायरस के खतरे पर विस्तृत चर्चा के पश्चात सर्वसम्मति से तय किया गया कि देश के अन्य मंदिरों की तरह मां भद्रकाली मंदिर परिसर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए 31 मार्च तक बंद रखा जाए। मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना को लेकर यह व्यवस्था बनाई गई कि मंदिर के पांच पुजारी नियमित रूप से सुबह की श्रृंगार पूजा, दोपहर का भोग तथा शाम की संध्या आरती का अनुष्ठान करेंगे।

बासंतिक नवरात्र की कलश स्थापना पुजारियों के द्वारा ही मंदिर परिसर में की जाएगी। 31 मार्च के बाद की स्थिति पर 31 मार्च के दिन ही निर्णय लिया जाएगा। अंचल अधिकारी ने बताया कि मां भद्रकाली मंदिर प्रबंधन समिति के इस निर्णय से मंदिर समिति के अध्यक्ष सह अनुमंडल पदाधिकारी तथा उपायुक्त को भी अवगत करा दिया गया है। मालूम हो कि मां भद्रकाली मंदिर कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर काफी संवेदनशील स्थल माना जाता है। क्योंकि इस परिसर में दूसरे प्रदेशों के अलावा विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते रहते हैं।

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