रांची, राज्य ब्यूरो। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो ने मिड डे मील के बदले टोलों में जाकर बच्चों को खाद्यान्न (चावल) बांटने को लेकर शिक्षकों को दिए गए आदेश पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि इसपर उनकी सहमति नहीं थी। विभागीय पदाधिकारियों ने अपने मन से यह निर्णय ले लिया। मंत्री के अनुसार, टोलों में जाकर चावल बांटने से लॉकडाउन और शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन  हो सकता है। वहां भीड़ इकट्ठा होने से संक्रमण का भी खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने शिक्षकों से कहा है कि वह इस पर विवेक से काम करें और कोई भी कार्य सुरक्षा और बचाव को ध्यान में रखते ही करें।

दरअसल, विभाग ने कोरोना से बचाव को लेकर स्कूलों के बंद रहने की स्थिति में टोलों में जाकर बच्चों के बीच चावल वितरण करने का आदेश विद्यालय प्रबंधन समिति और प्रभारी शिक्षकों को दिया है। शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने चावल के वितरण से तो इन्कार नहीं किया है लेकिन वितरण के लिए वाहन और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित करने की मांग की है। इससे पहले संघ ने मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर वितरण में होनेवाली परेशानी की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था। साथ ही स्कूलों में ही चावल वितरण करने की अनुमति मांगी थी। इधर, झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी इसे अव्यवहारिक बताते हुए वितरण के आदेश का विरोध किया है।

बता दें कि विभाग ने मिड डे मील बंद होने की अवधि की अवधि के लिए बच्चों को चावल बांटने का आदेश दिया है, जबकि कुकिंग कॉस्ट और अंडा या फल की राशि बच्चे या अभिभावकों के बैंक खाते में जाएगी। बताया जाता है कि विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के आलोक में आनन-फानन में बच्चों को चावल और राशि बांटने का निर्णय लिया। न्यायालय ने स्कूल बंद होने की स्थिति में मिड डे मील संचालन को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इधर, शिक्षकों का कहना है कि बिहार सरकार चावल के बदले राशि ही बच्चों को उपलब्ध करा रही है।

Posted By: Alok Shahi

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