जासं, रांची :कोरोना जांच में लगे स्वास्थ्य कर्मियों ने अब अपने वेतन भुगतान को लेकर हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है। इसके बाद रेलवे स्टेशन पर चल रहा जांच अभियान प्रभावित हो सकता है। जबकि अभी लगातार रेलवे स्टेशनों से कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। एक सप्ताह में स्टेशन से ही 140 से अधिक संक्रमित मिले हैं। इन कर्मियों का कहना है कि पिछले तीन महीने से कोरोना जांच में लगे कर्मियों का वेतन भुगतान नहीं हुआ है। रविवार को कर्मियों ने काला बिल्ला लगाकर कोविड टेस्टिग का काम किया। रांची रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, हटिया रेलवे स्टेशन और बस अड्डा पर कोरोना जांच के लिए बूथ बनाया गया है, ताकि बाहर से आने वाले लोगों का कोविड जांच किया जा सके। रांची रेलवे स्टेशन पर तीन शिफ्ट में कोरोना की जांच की जाती है। सुबह की शिफ्ट में 25 टीमें होती है। जबकि शाम की शिफ्ट में 10 टीम। वही रात में 7 टीम कोरोना जांच के लिए सैंपल ले रही है। मालूम हो कि सिविल सर्जन ने कोविड टेस्टिग टीम बनाया है, जिसमें करीब 300 की संख्या में कर्मियों को नियुक्त किया गया, लेकिन अब इन्हें मानदेय नहीं मिलने से ये परेशान हैं। बिना नियुक्ति पत्र का ही लोगों से करवाया जा रहा है काम : कर्मी

कोविड जांच बूथ में काम करने वाले कर्मियों ने कहा कि भुगतान को लेकर कई बार कहा गया लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला है। कर्मी अनीता ने बताया कि सभी को बिना नियुक्ति पत्र के ही काम पर रखा गया है। अन्य कर्मी उज्जवल ने बताया कि पैसे का भुगतान नहीं होता है तो मजबूरन वे सभी 26 अक्टूबर से हड़ताल पर चले जाएंगे। वही वर्षा सिन्हा ने कहा कि सदर अस्पताल के द्वारा जुलाई के महीने में कोविड जांच के लिए काम पर रखा गया है। 12 हजार प्रतिमाह भुगतान करने की बात कही गई, लेकिन अब तीन महीना होने को है पैसा नहीं मिला है। तकनीकी कारण की वजह से भुगतान में समस्या आयी है। बैंक से बात की जा रही है, उम्मीद है कि दो दिनों में सभी कर्मचारियों को पैसा मिल जाएगा। सभी को थोड़ा संयम से काम लेना होगा। देर हुई है लेकिन इस दिशा में काम लगातार किया जा रहा है।

- डा विनोद कुमार, सिविल सर्जन, रांची

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