रांची, जेएनएन। Coal Unions Strike Today 100 फीसद एफडीआइ के खिलाफ कोलकर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का झारखंड में व्यापक असर देखा गया। इस दौरान रामगढ़, चतरा, हजारीबाग, गिरिडीह और धनबाद में सभी काेयला परियोजनाओं में कोयले का उत्खनन और परिवहन का कार्य पूरी तरह से ठप रहा। अनुमान के मुताबिक 20 से 25 लाख टन काेयले का उत्‍पादन हड़ताल के कारण नहीं हो सका। करीब 450 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।

मजदूर यूनियनों की हड़ताल से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र को कोयले की सप्लाई नहीं भेजी जा सकी। कांटा घरों में भी सन्‍नाटा पसरा रहा। हड़ताल को सफल बनाने के लिए विभिन्न संगठित और असंगठित मजदूर सुबह से ही जुटे रहे। इधर पांचों केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य मजदूर संगठनों के नेताओं ने संबंधित कोल एरिया कार्यालय पर अपनी आवाज बुलंद करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया है। मजदूर एवं उनके नेता केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। 

कोल सेक्टर में हड़ताल असरदार, पावर प्लांटों पर गहराएगा संकट

कोयला उद्योग में 100 फीसद एफडीआइ नीति के विरोध में मजदूर संगठनों की हड़ताल ने कोल इंडिया को हिला कर रख दिया है। मंगलवार को कोल इंडिया की सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल समेत अन्य इकाइयों में उत्पादन और डिस्पैच बुरी तरह प्रभावित रहा। ढुलाई ठप होने से पावर प्लांटों को कोयला नहीं भेजा जा सका है। अभी कुछ दिनों के लिए तो प्लांटों के पास स्टॉक है लेकिन अगर हड़ताल और खिंची तो मुसीबत बढ़ सकती है।

पावर प्लांटों से उत्पादन प्रभावित हो सकता है जिससे बिजली संकट गहराएगा। झारखंड की इकाइयों से न सिर्फ राज्य के प्लांटों बल्कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, प. बंगाल और विशाखापट्टनम तक कोयले की सप्लाई होती है। मजदूर संगठनों ने दो से पांच दिनों तक हड़ताल की घोषणा कर रखी है। कोल इंडिया में 2.92 लाख मजदूर कार्यरत हैं।

सभी संगठन एकजुट

भारतीय मजदूर संघ से जुड़े श्रमिक सोमवार से ही हड़ताल पर थे। मंगलवार को इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू सहित विभिन्न संगठन के श्रमिकों ने भी सुबह से काम ठप कर दिया। हड़ताल समर्थक उत्पादन बंद कराने को सुबह से सक्रिय थे। अधिकारियों की टीम सुबह से कोलियरी पिट पर हाजिरी बनाने को तैयार थी। लेकिन श्रमिक नहीं पहुंचे। जरूरी सेवाओं में लगे कुछ श्रमिकों की ही हाजिरी बनाई गई। उन्हें हड़ताल से बाहर रखा गया था। इसमें चिकित्सा, पानी, बिजली व खदानों से पंपिंग सेवा थी। सीआइएसएफ के जवान भी संवेदनशील स्थानों पर तैनात थे। हड़ताल के दौरान विधि-व्यवस्था का संकट उत्पन्न न हो इस लिहाज से पुलिस प्रशासन भी सतर्क था।

मालगाड़ी के रैक नहीं भेजे जा सके

हड़ताल से पावर प्लांटों पर व्यापक असर पडऩे वाला है। कई पावर प्लांटों के पास एक सप्ताह से भी कम का कोयला स्टॉक है। झारखंड के कोडरमा में आठ दिन तो बोकारो में 16 दिन का कोयला बचा है। वहीं वेस्ट बंगाल के कोलाघाट का स्टॉक शून्य है। डीवीसी अंडाल के पास दो दिन, वेस्ट बंगाल बोकेसर में 4 दिन, डीवीसी मिजिया के पास 3 दिन, एनटीपीसी फरक्का के पास 6 दिन , वेस्ट बंगाल सागरदिघी में 6 दिन का कोयला स्टॉक है। धनबाद में हड़ताल के कारण दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक के पावर प्लांट प्रभावित होंगे। वहीं, रामगढ़ जिले के विभिन्न रेलवे साइडिंग से आज मालगाड़ी से एक रैक भी कोयला पावर प्लांटों को नहीं भेजा जा सका।

आकलन के मुताबिक विभिन्न पावर प्लांटों में करीब 20-24 हजार टन कोयला नहीं भेजा जा सका। मालगाड़ी से प्रतिदिन औसतन 10 रैक कोयला भेजा जाता है। यहां से राज्य के संयंत्रों के अलावा ओडि़शा, पश्चिम बंगाल के कई निजी इस्पात संयंत्रों में भी रैक से कोयला भेजा जाता है। कोल वाशरी को फिर से चालू करने में कम से कम 12 घंटे से भी अधिक का समय लगने की बात बताई जा रही है। हजारीबाग क्षेत्र के महाराष्ट्र व गुजरात के पावर प्लांट में कोयला की आपूर्ति की जा रही थी। लेकिन, दो दिनों की हड़ताल की वजह से यहां से कोई रैक नहीं भेजा जा सका है।

75 फीसद उत्पादन व डिस्पैच प्रभावित : चेयरमैन

कोल इंडिया चेयरमैन अनिल कुमार झा ने स्वीकारा कि हड़ताल असरदार रही है। कहा कि कंपनी के अनुसार 75 फीसद उत्पादन व डिस्पैच प्रभावित हुआ है। मालूम हो कि कोल इंडिया की सभी कंपनी मिलकर 13 लाख टन कोयला उत्पादन व 14 लाख टन डिस्पैच करती हैं। 215 रैक कोयला का डिस्पैच किया जाता है। जिसमें अधिकतर पावर प्लांट को ही कोयला डिस्पैच होता है।

पावर प्लांट       कहां कितना स्टॉक

  1. हरियाणा पानीपत     20 दिन
  2. हरियाणा झज्जर       21 दिन
  3. पंजाब रोपड़          25 दिन
  4. उत्तर प्रदेश हरिद्वारगंज 10 दिन
  5. एनटीपीसी उजाहर      5 दिन
  6. एनटीपीसी फरक्का     6 दिन
  7. एनटीपीसी दादरी       29 दिन
  8. डीवीसी   कोडरमा      8 दिन
  9. डीवीसी अंडाल        2 दिन
  10. डीवीसी बोकारो       16 दिन
  11. डीवीसी दुर्गापुर       19 दिन
  12. डीवीसी चंद्रपुरा       55 दिन
  13. डीवीसी  मिजिया      3 दिन
  14. डीवीसी रघुनाथपुर     7 दिन
  15. वेस्ट बंगाल संतालडीह  7 दिन
  16. वेस्ट बंगाल कोलाघाट   00 दिन
  17. वेस्ट बंगाल बोकेसर     4 दिन
  18. वेस्ट बंगाल बंडेल      8 दिन 
  19. वेस्ट बंगाल सागरदिघी 6 दिन
  20. कोलकाता ईएसपी       21 दिन    
  21. दुर्गापुर प्रोजेक्ट पावर प्लांट 7 दिन
  22. मैथन पावर लिमिटेड       28 दिन

सीसीएल बरका सयाल प्रक्षेत्र में व्यापक असर

कोल इंडिया में सौ प्रतिशत एफडीआई और निजीकरण के खिलाफ संयुक्त मोर्चा द्वारा आहूत मंगलवार को हड़ताल का सीसीएल बरका सयाल प्रक्षेत्र में व्यापक असर देखा जा रहा है। क्षेत्र के भुरकुंडा ,उरीमारी ,सयाल, सौंदा डी, सेंट्रल सौंदा, बिरसा ,न्यू बिरसा, बलकुदरा सहित विभिन्न कोयला खदानों में कोयला उत्पादन के साथ-साथ  ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह से ठप है। वाहनों का पहिया थम गया है। कोयला खदानों में हाईवा शावेल बड़ी बड़ी मशीने खड़ी हो गई है।

सीसीएल बरका सयाल प्रक्षेत्र में 95 प्रतिशत से अधिक श्रमिक हड़ताल के समर्थन में काम पर नहीं आए हैं । हड़ताल का असर पानी बिजली सेवा में भी देखा जा रहा है। यह हड़ताल एटक, इंटक  सीटू, एचएमएस सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से केंद्र सरकार के मजदूर नीतियों के खिलाफ आहूत की गई है। हड़ताल को सफल बनाने के लिए यूसीडब्ल्यू के विंध्याचल बेदिया, सीटू के डीडी रामनंदन, झाकोमयू संजीव बेदिया, बीसीकेयूके मिथिलेश सिंह, कोफीमयू के उदय सिंह राकोमस के राजू यादव ,राकोमयू के देवेंद्र सिंह, एजेकेएसएस के सतीश सिन्हा , दीझाकोमयू के अनील सिंह एनसीओइए पीडी सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता लगे हुए हैं।

झंडा बैनर के साथ सैकड़ों हड़ताल समर्थक सुबह से ही सड़कों पर उतर चुके  है। कोलियरियों में सन्नाटा सा छाया हुआ है। हड़ताल की सफलता को ले वासुदेव साव ,जयनारायण बेदिया, लखेन्द्र राय, विनोद मिश्रा ,धनंजय सिंह, डा जीआर भारत ,नरेश मंडल, विकास कुमार ,अर्जुन सिंह, संजय शर्मा ,सत्यनारायण ठाकुर ,अशोक गुप्ता, रमाकांत दुबे ,बैजनाथ कुमार, उदय मालाकार ,सुधीर सिंह ,संजय यादव, शिवशंकर पांडे ,आजाद भुईयां ,जगन्नाथ पासवान आदि  लगे हुए हैं।

सीसीएल का गिरिडीह एरिया ठप

कोयला उद्योग में सौ फीसद एफडीआइ के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सीसीएल की गिरिडीह एरिया में अभूतपूर्व सफलता मिली है। पूरे गिरिडीह में उत्पादन एवं डिस्पैच पूरी तरह से ठप है। एक छटांक कोयला का न तो उत्पादन हुआ है और न ही यहां से बाहर कोयला भेजा गया है। सभी संगठित और असंगठित मजदूर मंगलवार की सुबह से ही हड़ताल पर चले गए हैं। इधर पांचों केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य मजदूर संगठनों के नेता एरिया कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। मजदूर एवं उनके नेता केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

चतरा के टंडवा में सीसीएलकर्मियों की हड़ताल का व्यापक असर

एफडीआइ के खिलाफ सीसीएल की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का टंडवा क्षेत्र में व्यापक असर है। सीसीएल की आम्रपाली एवं मगध सहित सभी परियोजनाओं में कोयले का उत्खनन और परिवहन का कार्य पूरी तरह से ठप है। कांटा घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। सीसीएल के एक भी कर्मी ड्यूटी पर नहीं है। जानकारों का कहना है कि पांच वर्षों में यह पहला मौका है, जब चारों ओर सन्नाटा का नजारा देखने को मिल रहा है। मगध और आम्रपाली की स्थापना पांच वर्ष पहले हुआ है। हड़ताल को सफल बनाने के लिए विभिन्न संगठित और असंगठित मजदूर सुबह से ही जुटे हुए हैं। इधर पांचों केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य मजदूर संगठनों के नेता एरिया कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। मजदूर एवं उनके नेता केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

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