राज्य ब्यूरो, रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि आजादी के बाद से जिस पार्टी ने देश पर शासन किया, उसने आजादी की जंग में शहीद महापुरुषों को भुला दिया। आजादी का ठेका लेनेवाले एक परिवार ने उनके लिए कुछ भी नहीं किया। महापुरुषों के साथ राजनीति हुई। लेकिन एनडीए की सरकार पहली बार संग्रहालय बनाकर इतिहास के पन्नों से बाहर रहे ऐसे महापुरुषों की गाथाओं-कृतियों को सामने लाने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री गुरुवार को बिरसा मुंडा कारागार (पुरानी जेल) के जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा, पूर्वजों के बलिदानों का ऋण चुकाया नहीं जा सकता। लेकिन हम उनकी अमर गाथाओं को लोगों के बीच लाने के लिए भव्य संग्रहालय-स्मारक बनाकर उनका ऋण चुकाने का प्रयास कर रहे हैं। कहा, पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो उन्होंने गुमनाम वीर शहीदों की खोजबीन शुरू कराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से पहली बार भगवान बिरसा की वीर गाथा को बताने का काम किया। मुख्यमंत्री ने नाम लिए बिना कहा कि अंग्रेजों के पाले हुए लोग हमारी संस्कृति को नष्ट करने में लगे हैं। उनकी सक्रियता और बढ़ गई है।  

शहीदों के गांवों से लाई जाएगी मिट्टी :

मुख्यमंत्री ने बताया, संग्रहालय परिसर में भगवान बिरसा की 100 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित होगी। इसके लिए नवंबर माह में जन सहयेाग से शहीदों के गांव से मिट्टी लाई जाएगी। बगल के पार्क में देश की सीमाओं और सियाचिन जैसे कठिन जगहों पर जान गंवानेवाले जवानों की कृतियों को भी स्थान दिया जाएगा। उन्होंने बगल में बन रहे 150 मीटर ऊंचे बिरसा मुंडा टावर का भी जिक्र किया, जहां से पूरी रांची देखी जा सकेगी। उन्होंने अगले साल प्रधानमंत्री द्वारा संग्रहालय का उद्घाटन कराने की भी बात कही। उन्होंने खूंटी के डुम्बारीबुरू पहाड़ी के सौंदर्यीकरण की भी घोषणा की।

पूर्व में सिर्फ पार्क का हुआ था शिलान्यास :

मुख्यमंत्री ने एक अखबार (दैनिक जागरण नहीं) में छपी उस खबर का खंडन किया जिसमें तीसरी बार बिरसा मुंडा कारागार के जीर्णोद्धार व संग्रहालय का शिलान्यास होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि पूर्व में सिर्फ पार्क का शिलान्यास हुआ था।

 प्रेरित होगी युवा पीढ़ी :

राज्यपाल राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा, यह सुखद है कि धरती आबा की मृत्यु जिस कारागार में हुई, सरकार उसके जीर्णोद्धार कर संग्रहालय के रूप में विकसित कर रही है। इस पहल से हमारे युवा एवं भावी पीढ़ी महान स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित होंगे। उनमें देशभक्ति की भावना प्रबल होगी।

शहीदों के डाक्यूमेंटेशन पर खर्च होंगे 100 करोड़ :

ओराम इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि केंद्र सरकार पूरे देश के शहीदों के डाक्यूमेंटेशन व गुमनाम शहीदों को आगे लाने का काम कर रही है। यह डाक्यूमेंटेशन विदेशी भाषाओं में भी होगा, ताकि विदेशों के लोग भी इनके बारे में जान सकें। इसपर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा, अभी तक जो भी डाक्यूमेंटशन तैयार है वह अंग्रेजों द्वारा स्पांसर्ड है।

सम्मानित हुए शहीदों के परिजन :

राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भगवान बिरसा के अलावा अन्य शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इनमें बिरसा मुंडा के पौत्र सुखराम मुंडा, सिदो-कान्हू के वंशज नीला मुर्मू, रसका मुर्मू भी शामिल हैं। इससे पहले पाहन ने परंपरागत तरीके से बिरसा मुंडा कारागार के जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय का शिलान्यास कराया।

ये दिग्गज भी रहे उपस्थित :

कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, सांसद कड़िया मुंडा, रामटहल चौधरी, मंत्री लुइस मरांडी, नीलकंठ सिंह मुंडा, सीपी सिंह, विधायक शिवशंकर उरांव, रामकुमार पाहन, गंगोत्री कुजूर, मेयर आशा लकड़ा भी उपस्थित थीं। इनमें से कई दिग्गजों ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया। कड़िया मुंडा ने शहीदों की जीवनवृत्त बनाने तथा स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की।

फैक्ट फाइल

- कारागार का जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय का निर्माण लगभग 27 करोड़ की लागत से होगा। इसमें 25 करोड़ रुपये केंद्र सरकार दे रही है।

- जिस काल कोठरी में भगवान बिरसा को कैद कर रखा था उसे विशेष रूप से संरक्षित किया जाएगा। 

यह सब भी होगा :

- बिरसा मुंडा समेत झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी एवं संस्कृति का प्रदर्शन।

- भगवान बिरसा मुंडा की विशाल मूर्ति लगाई जाएगी।

- पूरे जेल परिसर का सौंदर्यीकरण।

- लाइट एंड साउंड प्रोग्राम के माध्यम से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग और शहीदों की शौर्य गाथा को बताया जाएगा।

- फ्रीडम वॉक में शहीदों को लोग श्रद्धांजलि दे सकेंगे। - इसमें छोटानागपुर के राजा मदरा मुंडा की भी प्रतिमा लगेगी।