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सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने रांची के ऐतिहासिक योगदा आश्रम में लगाई हाजिरी, क्यों खास है यह आश्रम

Published: Mon, 05 Oct 2026 04:39 PM (IST)

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने रांची के ऐतिहासिक योगदा सत्संग आश्रम का दौरा किया। उन्होंने वरिष्ठ संतों से ...और पढ़ें

सीएम हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने चुटिया स्थित योगदा सत्संग आश्रम पहुंचकर स्वामी ईश्वरानंदजी एवं स्वामी निर्मलानंदजी से मुलाकात की।

सीएम हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने चुटिया स्थित योगदा सत्संग आश्रम पहुंचकर स्वामी ईश्वरानंदजी एवं स्वामी निर्मलानंदजी से मुलाकात की।

HighLights

  1. सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने योगदा आश्रम का दौरा किया।

  2. उन्होंने संतों से मुलाकात कर आध्यात्मिक गतिविधियों की जानकारी ली।

  3. परमहंस योगानंद के कक्ष और विरासतों का अवलोकन किया।

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड की राजनीति और अध्यात्म का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन ने राजधानी रांची के चुटिया स्थित ऐतिहासिक योगदा सत्संग आश्रम का दौरा किया। इस वीआईपी दौरे ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आध्यात्मिक हलकों में भी खासी सुर्खियां बटोरी हैं।

आश्रम पहुंचने पर मुख्यमंत्री दंपति का आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने आश्रम के वरिष्ठ संतों स्वामी ईश्वरानंद जी और स्वामी निर्मलानंद जी से शिष्टाचार मुलाकात की। संतों ने मुख्यमंत्री को आश्रम की हालिया आध्यात्मिक गतिविधियों, सामाजिक सेवा कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे अभियानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

परमहंस योगानंद के कक्ष और विरासतों का किया अवलोकन

दौरे के दौरान सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने उस पावन स्थल का गहराई से अवलोकन किया, जहां महान आध्यात्मिक गुरु और क्रिया योग के प्रचारक श्री श्री परमहंस योगानंद जी का सान्निध्य रहा था। इस दौरान उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख स्थलों का भ्रमण किया।

  • परमहंस योगानंद जी का पावन कक्ष: मुख्यमंत्री ने उस ऐतिहासिक कक्ष का मुआयना किया, जहां गुरुजी निवास करते थे। यहां योगानंद जी द्वारा उपयोग में लाई गईं चारपाई, उनके चरण-चिन्ह और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं (जैसे उनके वस्त्र, छाता और एक पवित्र गुलाब का फूल) आज भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  • फोटो एवं पुस्तक गैलरी: गैलरी में मुख्यमंत्री ने परमहंस योगानंद जी के जीवन से जुड़े दुर्लभ फोटोग्राफ्स, उनके द्वारा रचित विश्व प्रसिद्ध साहित्य (जैसे योगी कथामृत), शिष्यों की पुस्तकें और उनके सम्मान में जारी किए गए विशेष डाक टिकटों को बहुत बारीकी से देखा।
  • स्मृति मंदिर और ऐतिहासिक लीची वेदी: मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर में स्थित ध्यान मंदिर, शांत वातावरण वाले उद्यानों, स्मृति मंदिर और उस ऐतिहासिक लीची वेदी का भी परिभ्रमण किया जहां बैठकर योगानंद जी घंटों ध्यान साधना किया करते थे।

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क्या है योगदा आश्रम (योगदा सत्संग शाखा मठ) और इसका ऐतिहासिक महत्व

1. स्थापना और संस्थापक

  • स्थापना वर्ष: योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया की स्थापना वर्ष 1917 में महान आध्यात्मिक गुरु श्री श्री परमहंस योगानंद जी द्वारा की गई थी।
  • रांची का यह आश्रम इस संस्था का मुख्य केंद्र और पहला आश्रम है। परमहंस योगानंद जी वही संत हैं जिन्होंने पश्चिम देशों (अमेरिका और यूरोप) में प्राचीन भारतीय योग और क्रिया योग के विज्ञान का प्रचार-प्रसार किया था। उनकी विश्व प्रसिद्ध आत्मकथा ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ ए योगी (योगी कथामृत) को आध्यात्मिक साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है।

2. ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व

  • रेजिडेंशियल स्कूल की शुरुआत: परमहंस योगानंद जी ने साल 1918 में रांची में बच्चों के लिए एक आवासीय विद्यालय की नींव रखी थी, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा दी जाती थी।
  • मुख्य भवन: आश्रम का पुराना मुख्य भवन आज भी सुरक्षित है, जहां योगानंद जी रहा करते थे। इस भवन में उनकी स्मृतियों को सहेज कर रखा गया है।

3. आश्रम के प्रमुख आकर्षण और स्थल

  • ध्यान मंदिर: यह एक विशाल और भव्य भवन है (जो जोधपुरी पत्थरों से निर्मित है), जहां एक साथ सैकड़ों साधक और भक्त बैठकर शांतिपूर्वक ध्यान साधना करते हैं।
  • स्मृति मंदिर और लीची वेदी: आश्रम परिसर में स्थित स्मृति मंदिर और वह ऐतिहासिक लीची का पेड़/वेदी जहां योगानंद जी अक्सर बैठकर ध्यान किया करते थे, भक्तों के लिए बड़े ही पवित्र तीर्थ स्थल माने जाते हैं।

वर्तमान गतिविधियां

यह आश्रम आज भी दुनिया भर के लोगों को क्रिया योग, ध्यान साधना, और मानसिक-आध्यात्मिक शांति की शिक्षा देने का एक प्रमुख केंद्र है। यहां नियमित रूप से सत्संग, सामूहिक ध्यान, और योगदा सत्संग पाठमाला के माध्यम से लोगों को तनावमुक्त और संतुलित जीवन जीने की कला सिखाई जाती है।

रांची के चुटिया क्षेत्र में स्थित यह आश्रम न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के आध्यात्मिक मानचित्र पर एक बेहद महत्वपूर्ण और शांतिकुंज केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है।