रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से शेल कंपनियों में निवेश संबंधित मामले में मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की गई। याचिका में प्रार्थी शिवशंकर शर्मा पर छवि खराब करने के लिए गलत आरोप लगाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया है कि प्रार्थी ने जो आरोप लगाएं हैं, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। उनकी ओर से आरोपों के पक्ष में एक भी दस्तावेज या साक्ष्य नहीं दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि अदालत को गुमराह करने और गलत जानकारी देने के लिए प्रार्थी के खिलाफ अदालत को आपराधिक मामला चलाना चाहिए।

कल्पना सोरेन व सरला मुर्मू कंपनी की निदेशक

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से उक्त याचिका सीआरपीसी की धारा 340 के तहत दाखिल की गई है। याचिका में मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया है कि औद्योगिक उद्देश्यों के लिए 11 एकड़ जमीन देने में सोहराई लाइव स्टाक प्राइवेट लिमिटेड को जमीन दी गई थी। सोहराई पशुधन को कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन मिली है। मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन और सरला मुर्मू सोहराई लाइव स्टाक प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं।

एसयूवी को झारखंड सरकार ने ही खरीदा है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन आरोपों का भी खंडन किया है कि उन्होंने अपने लिए हाई-एंड एसयूवी खरीदने के साथ-साथ अपने आधिकारिक आवास को सुसज्जित करने के लिए सरकारी पैसों की बर्बादी की है। उन्होंने दावा किया है कि एसयूवी को सरकार ने आधिकारिक इस्तेमाल के लिए ही खरीदा था। प्रार्थी की ओर से छवि खराब करने के उद्देश्य से उनके और उनके परिवार के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। बता दें कि सोमवार को सरकार की ओर से हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर प्रार्थी शिवशंकर शर्मा पर अदालत को गलत जानकारी देने और भ्रमित करने का आरोप लगाया गया है।

शिवशंकर शर्मा ने कोर्ट में दाखिल की हैं याचिकाएं

हालांकि, मंगलवार को अदालत नहीं बैठने के कारण शेल कंपनी और सीएम लीज आवंटन मामले में सुनवाई नहीं हो सही। अब इस मामले की सुनवाई 8 जुलाई 2022 को होगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर विभागीय मंत्री रहते हुए अपने नाम से खनन लीज आवंटित कराने का आरोप है। दूसरा आरोप यह है कि उनके करीबी लोगों ने शेल कंपनी बनाकर अवैध रूप से रुपयों का निवेश किया है। मंगलवार को हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन कोर्ट नहीं बैठने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। बताया गया कि अब 8 जुलाई 2022 को इस मामले की सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस डा. रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करने वाली थी। मालूम हो कि शिवशंकर शर्मा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की हैं। इन याचिकाओं पर प्रार्थी पक्ष की ओर से बहस पूर्ण कर ली गई है। सरकार 8 जुलाई 2022 को अपना पक्ष रखेगी।

Edited By: M Ekhlaque