रांची, राज्य ब्यूरो। बाल विवाह उन्मूलन के लिए बनाई गई राज्य कार्ययोजना के विमोचन अवसर पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री डा. लुइस मरांडी ने कहा कि अगर शादी सही उम्र में हो तो जिंदगी आबाद और गलत उम्र में हो तो बर्बाद हो जाती है। अशिक्षा और अज्ञानता बाल विवाह की मूल वजह है, जो साझा प्रयास से दूर होगा। मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के दिशानिर्देश में झारखंड सरकार डबल इंजन की रफ्तार से दौड़ रही है। राज्य गठन के प्रारंभिक चरण में विकास के जिन मानकों पर झारखंड पिछड़ गया था, उसे पाटने की कोशिश की जा रही है।

विकास आयुक्त डीके तिवारी ने कहा कि आधारभूत संरचनाओं के निर्माण और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में झारखंड ने लंबी छलांग लगाई है। शिशु मृत्यु दर में राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। आर्थिक और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी राज्य आगे है। इससे इतर 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं में एनीमिया और कुपोषण हमारे लिए आज भी चुनौती बना हुआ है। यूनिसेफ की कंट्री हेड डा. यास्मिन अली ने कहा कि झारखंड में बाल विवाह का प्रतिशत 53 से घटकर 38 पर आया है। राष्ट्रीय औसत की बात करें तो यह 27 फीसद है। इस क्षेत्र में और भी काम करने की जरूरत है। बच्चियों और भावी पीढि़यों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह आवश्यक है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव डा. अमिताभ कौशल ने बाल विवाह रोकने के लिए इससे संबद्ध कानून और नीतियों का ईमानदारी से अनुपालन तथा जागरूकता पर जोर दिया। बाल विवाह को रोकने के लिए संचालित संभव कार्यक्रम के प्रतिनिधि के तौर पर स्वेता टुडू और गोरांग नायक ने भी अपनी बातें रखीं।

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