रांची : कोरोना संकट के बीच अर्थव्यवस्था को गति देने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीदें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) पर टिकी हैं। भारत सरकार ने मुश्किल दौर में इस सेक्टर विशेष को राहत देने के लिए भारी भरकम पैकेज देने की घोषणा की है। वित्तीय संकट से जूझ रही झारखंड की अति सूक्ष्म, लघु व मध्यम इकाईयों को जाहिर है इस पैकेज से आस बंधी है। राज्य का एमएसएमई सेक्टर इन घोषणाओं को राहत भरी उम्मीद करार देता है। इंडस्ट्री सेक्टर का मानना है कि इस पैकेज को यदि श्रम संबंधी कानूनों में रियायतों का सहारा मिले तो न सिर्फ प्रोडक्शन बल्कि रोजगार सृजन में भी खासा तेजी देखने को मिलेगी। झारखंड को इस पैकेज से तत्काल कितनी मदद मिलेगी यह आकलन तो फिलहाल मुश्किल है लेकिन फिर भी मुश्किल दौर से गुजर रहे एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा तो मिली ही है।

झारखंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन (जेसिया) के उपाध्यक्ष विनोद नेमानी कहते हैं कि इस पैकेज से एमएसएमई सेक्टर को तत्काल लाभ मिलेगा। उद्योगों को नया लोन मिल सकेगा। एक साल तक मूलधन भी नहीं चुकाना होगा और इसकी समय सीमा भी चार वर्ष की होगी। हालांकि इसे व्यवहारिक तौर पर भी देखना होगा। बैंकों का सहयोगात्मक रवैया भी आवश्यक है। लेबर के मद में पीएफ की छूट भी सराहनीय है। इससे कुछ वक्त तक इंडस्ट्री को राहत होगी और लेबर का नुकसान भी नहीं होगा। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि इंडस्ट्री को तत्काल खड़ा करने के लिए श्रम संबंधी कानूनों को फौरी तौर पर लचीला बनाना होगा। कुछ राज्यों ने ऐसा किया भी है। प्रोडक्शन बढ़ाने और तत्काल लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए यह बहुत जरूरी है कि इन कानूनों में कुछ छूट दी जाए। अभी 20 से अधिक लेबर होने पर फैक्ट्री लॉ लागू हो जाता है।

चैंबर ऑफ कामर्स और जेसिया के पूर्व अध्यक्ष रह चुके विकास सिंह कहते हैं कि वित्तीय संकट से गुजर रही कंपनियों के लिहाज से देखें तो यह पैकेज कुछ राहत देगा। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार फिलहाल यही कर भी सकती है। हालांकि हमें यह भी समझना होगा कि यह ग्रांट नहीं लोन है। मौजूदा वक्त बहुत भारी है, इससे उबरने में समय लगेगा। अनिश्चितता का दौर अभी आगे भी बना रहेगा।

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झारखंड में 5000 से अधिक हैं लघु एवं मध्यम इकाईयां :

झारखंड में पांच हजार से अधिक लघु एवं मध्यम इकाईयां हैं। इनमें सर्वाधिक सिंहभूम क्षेत्र के आदित्यपुर में हैं। लॉक डाउन की अवधि में सभी इंडस्ट्री बंद पड़ी हैं। सूक्ष्म इकाईयों की संख्या हजारों में है लेकिन इसका कोई सटीक आंकड़ा सरकार के पास भी नहीं है। 20 मई के बाद राज्य में 152 लघु एवं मध्यम इकाईयों में कुछ हद तक उत्पादन शुरू हुआ है। यदि यह सेक्टर सरकार की बूस्टर डोज से जी उठा तो 2.50-3.00 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है।

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घाटे से उबरेगी बिजली वितरण कंपनी : केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज का सकारात्मक असर राज्य में घाटे में चल रही बिजली वितरण निगम को भी मिलेगा। केंद्र ने राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को 90 हजार करोड़ का पैकेज देने की घोषणा की है। झारखंड बिजली वितरण निगम के लिए लॉकडाउन भारी घाटे का सबब रहा है। पूर्व से ही भयंकर संचरण-वितरण घाटा झेल रही बिजली वितरण निगम का राजस्व संग्रह महज 30 प्रतिशत हुआ है। सामान्य दिनों में निगम की वसूली 300 करोड़ रुपये है, लेकिन पिछले माह महज 113 करोड़ रुपये वसूला जा सका है। यही हाल रहा तो कम से कम घाटे से उबरने के लिए 1000 करोड़ रुपये की दरकार बिजली वितरण निगम को होगी। कम राजस्व वसूली के कारण कर्मियों को वेतन तक पर आफत आ सकती है।

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इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के कोट :

- कोरोना के कारण गत करीब दो महीने से लघु उद्योग धंधे बंद होने से फैक्ट्री मालिक काफी चिंता में पड़ गए थे। इस संकट की स्थिति में वित्तमंत्री द्वारा घोषित 50 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई में पूंजी निवेश की घोषणा से लघु उद्योग जगत को राहत जगी है।

फिलिप मैथ्यू

अध्यक्ष जेसिया

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सरकार द्वारा घोषित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के वर्गीकरण में बदलाव कर इसे निवेश के साथ टर्न ओवर के साथ जोड़ने से अनेक लघु उद्योगों को फायदा होगा। लघु उद्योग की निवेश सीमा को पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने से और साथ-साथ टर्न ओवर के साथ जोड़ने से लघु उद्योगों को फायदा होगा।

अंजय पचेरीवाल

मानद सचिव जेसिया

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कोरोना संकट शुरू होते ही सरकार ने उद्यमियों को कामगारों के पेमेंट पर देने वाला 12-12 प्रतिशत कुल 24 प्रतिशत ईपीएफ सरकार द्वारा वहन तीन महीने के लिए किए जाने की घोषणा की थी। जिसे आज बढ़ाकर और तीन महीना यानि कुल छह माह करने से उद्योगों को कुछ राहत मिलेगी।

रणधीर शर्मा

संयुक्त सचिव जेसिया

Posted By: Jagran

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