रांची, राज्य ब्यूरो। सीबीआइ ने चारा घोटाला मामले में सजायाïफ्ता लालू प्रसाद की जमानत का विरोध किया है। सीबीआइ की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में लालू प्रसाद की तबीयत की मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्हें कई बीमारियां जरूर हैैं, लेकिन इससे उन्हें जान का खतरा नहीं है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई।

इस दौरान सीबीआइ की ओर से कहा गया कि इस मामले में उसका जवाब तैयार है, लेकिन उसे अदालत में दाखिल करने का आदेश दिया जाए। अदालत ने सीबीआइ के आग्रह को स्वीकार करते हुए लालू के अधिवक्ता को जवाब की प्रति देने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले में अगली सुनवाई के लिए 22 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई।  

सीबीआइ के शपथ पत्र में कहा गया है कि दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई है। इस मामले में लालू ने मात्र 22 माह ही जेल में बिताए हैं। ऐसे में सजा की आधी अवधि भी पूरी नहीं हो रही है। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट इस मामले में उनकी याचिका खारिज कर चुका है। जहां तक उनके स्वास्थ्य की बात है, तो रिम्स के चिकित्सक लगातार उनके स्वास्थ्य की मॉनीटरिंग कर रहे हैैं। 15 बीमारियां होने के बाद भी फिलहाल उनकी जान को कोई खतरा नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जाए।

लालू प्रसाद की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार और देवर्षि मंडल ने अदालत को बताया कि बढ़ती उम्र और तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। बता दें कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद को सीबीआइ की विशेष अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत के आदेश के खिलाफ लालू ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की है। इसमें सजा को निलंबित करते हुए जमानत देने की मांग की गई है।

Posted By: Alok Shahi

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