यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कैग रिपोर्ट: झारखंड सरकार के पास 5471 करोड़ का हिसाब नहीं
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड सरकार के पास 5471 करोड़ रुपये की राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार के पास 5471 करोड़ रुपये की राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है। यह हकीकत भारत के नियंत्रक-महालेखाकार (कैग) की रिपोर्ट में उजागर हुई है। यह भी पता चला है कि विभिन्न कारणों से 62,879 करोड़ रुपये के 38 एमओयू रद हो गए।
राज्य गठन के वर्ष 2000 से लेकर 2016 तक 17,081 करोड़ रुपये के एसी बिल (आकस्मिक विपत्र) के विरुद्ध सरकार के विभिन्न महकमों ने महज 11,610 करोड़ रुपये के डीसी बिल (विस्तृत आकस्मिक विपत्र) ही एजी को उपलब्ध कराए हैं। महालेखाकार (लेखा परीक्षा) सी नेडुंचेलियन ने कैग रिपोर्ट जारी करने के दौरान यह जानकारी दी। कैग ने शनिवार को राज्य वित्त, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और सामान्य सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्र पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की।
एसी बिल के तहत विशेष परिस्थिति में कोषागार से अग्रिम के तौर पर राशि की निकासी कर उसका व्यय किया जाता है। लेकिन इस व्यय का ब्योरा डीसी बिल के तौर पर 25 दिनों के भीतर देना होता है। सरकारी विभागों ने ऐसी 5471 करोड़ रुपये की राशि का कोई लेखा-जोखा ही नहीं दिया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी राशि को व्यक्तिगत खातों में भी रखने की विसंगति को पकड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च, 2016 के अंत तक 5217.97 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि को व्यक्तिगत खातों में डाला गया था। यह राशि बजट की राशि को लैप्स होने से बचाने के लिए इन खातों में डाली जाती है जो कि वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।
बजट की राशि खर्च के लिए होती है, लेकिन राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट में खर्च की जगह बचत के नए रिकॉर्ड कायम कर दिए। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015-16 के दौरान बजट की 17,524.86 करोड़ रुपये की राशि पड़ी रह गई, जो कि कुल बजटका 24 फीसद है। कैग की मानें तो यह सरकार के अनुचित बजट आकलन की ओर इशारा करती है।
वहीं, मोमेंटम झारखंड का आयोजन कर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने में जुटी झारखंड सरकार को कैग ने आईना दिखाया है। उसने स्पष्ट कहा है कि भूमि अर्जन की विफलता और सरकारी सरलीकरण में कमी के कारण झारखंड में 62,879 करोड़ रुपये के 38 एमओयू रद हो गए।
