विनोद श्रीवास्तव, रांची

देश के 100 स्मार्ट सिटी के क्रियान्वयन की प्रतिस्पद्र्धा में रांची भले ही तीसरे पायदान पर हो, परंतु प्रस्तावित कोर कैपिटल एरिया को 2020 तक पूरी तरह से स्मार्ट बनाना दूर की कौड़ी है। कहने को उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने 2017 में ही प्रस्तावित स्मार्ट सिटी का शिलान्यास कर दिया था। इससे इतर स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार को अबतक भूमि आवंटन नियमावली तक बनाने में सफलता नहीं मिली है। और तो और इस बाबत गठित एसपीवी रांची स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लिमिटेड महज कागजी संस्था बनकर रह गया है।

हाल ही में नगर विकास एवं आवास विभाग ने संबंधित परिसर में आधारभूत संरचनाओं के लिए प्रस्तावित लगभग 600 करोड़ रुपये की परियोजना कॉरपोरेशन से वापस लेते हुए झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (जुडको) के हवाले कर दिया है। बताते चलें कि कई बार विज्ञापन निकालने के बाद कॉरपोरेशन के सीईओ पद पर यतीन सुमन बहाल किए गए थे, परंतु हर मामले में विभागीय हस्तक्षेप से क्षुब्ध होकर उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

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कंवेंशन सेंटर तथा जुपमी का निर्माण प्रगति पर

स्मार्ट सिटी परिसर को एजुकेशनल हब के रूप में विकसित करने के साथ-साथ वहां मल्टी परपस बिल्डिंग तथा आवासीय ईकाइयों का निर्माण किया जाना है। प्रथम चरण में कंवेंशन सेंटर और झारखंड अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीच्यूट (जुपमी) का निर्माण प्रगति पर है। पावर ग्रिड पर काम शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 2000 फ्लैटों के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। अन्य 60 हजार परिवारों को बसाने के लिए प्रस्तावित आवासीय कालोनी का विकास पीपीपी मोड पर किया जाना है।

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कुल 10 हजार करोड़ की परियोजना, मिले 400 करोड़

कोर कैपिटल एरिया को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए तकरीबन 10 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए केंद्रांश और राज्यांश मद में 1000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत है। अबतक 400 करोड़ रुपये जारी हो चुके है। शेष राशि पीपीपी मोड पर विभिन्न कंपनियों द्वारा खर्च किए जाने की तैयारी है।

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फोकस पैन सिटी पर भी, पर रफ्तार धीमी

सिर्फ 656.30 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित सिटी को स्मार्ट बनाने से पूरी रांची स्मार्ट नहीं होगी। लिहाजा पैन सिटी को स्मार्ट बनाने की तैयारी भी सरकार की है, लेकिन इसे मूर्त रूप देने की रफ्तार धीमी है। चौबीस घंटे जलापूर्ति के लिए सरकार ने एल एंड टी के साथ करार किया है। 2020 तक इस योजना को धरातल पर उतारने का लक्ष्य है। वेंडर मार्केट का निर्माण जहां हो चुका है, वहीं रवींद्र भवन और हज हाऊस का निर्माण प्रगति पर है। पब्लिक साइकिल शेय¨रग सिस्टम पर एक साल पहले शुरू हुई कार्रवाई अब मूर्त रूप ले रही है।

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यातायात प्रबंधन में बाधक बना कमांड कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सेंटर

जबतक कमांड कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सेंटर का निर्माण नहीं हो जाता, यातायात प्रबंधन दूर का ढोल है। अब तक चार बार टेंडर हो चुके हैं, लेकिन यह तकनीकी अड़चनों में फंस रहा। कहने को सैनिक मार्केट और हिनू में मल्टी लेवेल पार्किंग के लिए जमीन देखी गई, परंतु वह विवादित निकली।

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हरमू फ्लाईओवर का नहीं सुलझ रहा पेंच, फिर बन रहा डीपीआर

राष्ट्रपति के हाथों जिन तीन सड़कों को स्मार्ट बनाने और दो फ्लाई ओवर के निर्माण कार्य का शिलान्यास कराया गया था, उनमें हरमू फ्लाईओवर का पेंच फंसा है। पांच बार टेंडर के बाद भी इसकी राह आसान नहीं हुई। एक बार फिर इसका संशोधित डीपीआर तैयार कराया जा रहा है। एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक की सड़क को स्मार्ट बनाने की प्रारंभिक कार्रवाई अभी शुरू ही की गई है।

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कोट

1110.73 करोड़ की लागत से स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन पर कार्य शुरू हो चुका है। भूमि आवंटन पालिसी लगभग तैयार है। वित्तीय वर्ष 2019-20 की प्रथम तिमाही से भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सीपी सिंह

मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग

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फिलहाल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण हो रहा है। स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन की ओर से जलापूर्ति की योजना पर अधिक बजट का प्रावधान किया गया है। बैठक में बजट की राशि को कम करने का निर्देश दिया गया है। स्मार्ट सिटी में सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम व रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का भी निर्माण होगा। इसके अलावा कुछ योजनाएं पीपीपी मोड पर भी शुरू की जाएंगी।

- आशा लकड़ा, मेयर, रांची।

Posted By: Jagran

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