रांची, [नीलमणि चौधरी]। भूखंड अब भी निवेश के लिए पहली पसंद है। निवेशकों के साथ जरूरतमंद भी अपार्टमेंट की बजाय भूखंड खरीदना ही बेहतर मानते हैं। हालांकि, फ्लैट के साथ भूखंड की बिक्री में भी पिछले साल की तुलना में कमी आयी है। साल 2018-19 में 3792 फ्लैट बिके जबकि 2019 के आठ माह में सिर्फ 2051 फ्लैट की ही रजिस्ट्री हुई। वहीं, जमीन की बात करें तो 2017-18 में 2231 भूखंड की रजिस्ट्री हुई। वहीं, 2018-19 आंकड़ा घटकर 1367 रहा।

राजधानी के विभिन्न इलाकों में बन रहा अपार्टमेंट या तो अधूरा है या खरीददार के इंतजार में अवशेष बन रहा है। इसमें कई अपार्टमेंट सरकारी नियम के कारण फंस गए हैं। कांके मौजा के चंदवे, बरियातू, कडरू, डोरंडा, हीनू, मोरहाबादी में सैकड़ों एकड़ जमीन को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। जबकि इन इलाकों के करीब 50 अपार्टमेंट का प्रोजेक्ट लगभग पूर्ण होने की कगार पर था। अपार्टमेंट के दो हजार फ्लैट का निबंधन रूका हुआ है। एक फ्लैट की न्यूनतम कीमत 30 लाख मानें तो दो हजार फ्लैट की कीमत छह सौ करोड़ रुपया होता है। इस प्रकार छह सौ करोड़ रुपया डंप हो गया है। कई प्रोजेक्ट में बिल्डर के साथ बैंक व आमलोगों की भी पूंजी लगी हुई है।

इस साल फ्लैट की बिक्री में 20 प्रतिशत की आयी कमी

आंकड़ों पर गौर करे तो पिछले साल की तुलना में इस साल फ्लैट की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत तक की कमी आयी है। पिछले साल 2018-19 में कुल 3792 फ्लैट के डीड की रजिस्ट्री हुई। वहीं इस साल आठ महीने में महज 2051 फ्लैट के डीड की ही रजिस्ट्री हुई। वहीं, जमीन में अब भी निवेशकों का भरोसा कायम है।

क्यों फंसा है प्रोजेक्ट

निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-22 क, 2016 के अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार ने कैशरे ङ्क्षहद/ गैरमजरुआ आम भूमि/ गैरमजरुआ खास भूमि, वन भूमि/जंगल आदि को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया। उक्त भूखंड की खरीद बिक्री बंद कर दी गई। विशेष परिस्थिति में डीसी के आदेश से ही उक्त भूमि का निबंधन हो सकता है। जबकि कई अपार्टमेंट इस जद में आ गए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

रीयल स्टेट सेक्टर मंदी की चपेट से उबर नहीं पायी है। रीयल स्टेट सेक्टर से निवेशक भाग रहे हैं। दूसरी ओर राजधानी में कई प्रोजेक्ट प्रतिबंधित सूची में डाल देने के बाद डंप होने के कगार पर है। जबकि विभागीय क्लीयरेंस व नक्शा पास होने के बाद अपार्टमेंट बना था।- क्रेडाई उपाध्यक्ष, विजय अग्रवाल

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