रांची, जासं । कोरोना संक्रमण के पहले से मंदा चल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को भी बजट में एनर्जी बूस्टर की उम्मीद है। झारखंड  बिल्डर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष रोहित अग्रवाल बताते हैं कि रांची समेत राज्य के अन्य जिलों में कोरोना संक्रमण से पहले ही रियल स्टेट का कारोबार मंदा चल रहा था। वहीं वैश्विक संक्रमण के कारण हमारी कमर पर मार पड़ी। ऐसे में अब वर्क्स कांट्रैक्टस व रियल एस्टेट सेक्टर्स को बिना मदद के राज्य में फिर से स्थापित करना संभव नहीं है। ऐसे में हमारी उम्मीद है कि सरकार की तरफ से हमें  काॅमर्शियल लीजिंग या किराये के लिए वस्तु एवं सेवा की खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ देना चाहिए। इससे वर्क्स कांट्रैक्टस व रियल एस्टेट डेवलपर्स को कोविड के कारण उपजे कठिन हालात में राहत मिले।

रोहित अग्रवाल बताते हैं कि वर्तमान में किराये की आय पर जीएसटी चुकाना होता है, जबकि इसके निर्माण के वक्त आइटीसी की सुविधा नहीं दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि आनेवाले बजट में टैक्स छूट की सीमा बढाई जाय ताकि घरों की डिमांड में बढोत्तरी हो। इसके साथ ही 80 सी के तहत होम लोन चुकाने में प्रिंसिपल पर मिलनेवाली टैक्स छूट को भी बढाया जाय। अभी 80सी में 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है जिसमें होम लोन के प्रिंसिपल का भुगतान भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि महानगरीय शहरों में 60 वर्गमीटर और गैर महानगरीय क्षेत्रों में 90 वर्गमीटर में किफायती आवास बनाने की लिमिट तय की गई है। इसकी कीमत 45 लाख रू0 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अंडर कंस्ट्रक्शन घरों में जीएसटी दरें भी घटाई जानी चाहिए। वर्तमान में इसपर 5 फीसदी जीएसटी लगता है। इसे कुछ महीनों के लिए 0 प्रतिशत कर देना चाहिए। अभी अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर 1 फीसदी और नाॅन अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। यह भी कहा गया कि अभी मीडियम इनकम ग्रुप श्रेणी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की क्रेडिट सब्सिडी स्कीम की समय सीमा मार्च 2021 है, इस सब्सिडी स्कीम को अगले साल मार्च 2022 तक बढाया जा सकता है।

रोहित अग्रवाल ने कहा कि वर्क्स कांट्रैक्टर्स का एक मुख्य खर्च वाहनों और मशीनरी के रख-रखाव के लिए पेट्रोल-डीजल आदि की खरीद से संबंधित है। जीएसटी रेजीम के तहत इन उत्पादों को शामिल नहीं करने से इन उत्पादों पर वैट के भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त नहीं होता। यह सुझाया गया कि जीएसटी के दायरे में पेट्रोल, डीजल एवं अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का समावेश किया जाय। साथ ही उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा देने की मांग की।

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