कोडरमा, [अनूप कुमार]। कोरोना काल में सीबीएसई यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने स्कूलों को मान्यता देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था क्या शुरू की, जालसाजी करने वालों ने इसमें भी फर्जीवाड़ा शुरू कर दियाा। फर्जीवाड़ा करने वाले लोग राज्य सरकार के पोर्टल पर फर्जी एनओसी तक अपलोड कर दे रहे हैं। कोडरमा जिले के चाराडीह स्थित बीआर इंटरनेशनल स्कूल और चेचाई स्थित इकरा पब्लिक स्कूल में भी ऐसा ही मामला सामने आया है।

बीआर इंटरनेशनल स्कूल को करीब एक माह पूर्व पोर्टल में आवेदन, अपलोड किए गए दस्तावेजों और सीबीएसई के निरीक्षण दल के भौतिक सत्यापन के आधार पर सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हो चुकी है, जबकि इकरा पब्लिक स्कूल अभी मान्यता के फाइनल लिस्ट में है। दोनों स्कूलों के द्वारा पोर्टल पर जो दस्तावेज अपलोड किए गए हैं, उनमें अधिकतर जालसाजी कर तैयार किए गए हैं। इनमें राज्य के माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी एनओसी, डीईओ सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, भवन प्रमंडल कोडरमा द्वारा जारी बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट जैसे आवश्यक दस्तावेज शामिल हैं।

बता दें कि इन स्‍कूलों का डीईओ ने कभी निरीक्षण नहीं किया है, लेकिन निरीक्षण में सबकुछ सही पाए जाने का प्रमाण पत्र अपलोड है। इसी तरह फायर सेफ्टी विभाग ने भी कभी निरीक्षण नहीं किया। इसके बावजूद फायर सेफ्टी का एनओसी अपलोड है। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का कहना है कि एजेंट की गलती से गलत दस्तावेज अपलोड हो गए। इसमें सुधार किया जा रहा है।

जिसके हस्ताक्षर, वह व्यक्ति है ही नहीं

भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के हस्ताक्षर का बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट अपलोड किया गया है, उस नाम के कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल कार्यालय में न तो वर्तमान में हैं और न ही कभी पूर्व में रहे हैं।

सरस पोर्टल पर किया जाता है आवेदन

सीबीएसई से मान्यता के लिए स्कूलों को सीबीएसई के सरस (स्कूल एफिलिएशन रि इंजीनियर्ड सिस्टम) में दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होता है। इसमें राज्य सरकार द्वारा निर्गत एनओसी, फायर सेफ्टी, बिल्डिंग सेफ्टी, वाटर, सर्टिफिकेट ऑफ लैंड समेत अन्य प्रमाण पत्र अपलोड करने होते हैं। वहीं राज्य सरकार से एनओसी के लिए झारखंड एजुकेशन की वेबसाइट पर निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन करना होता है। इसके बाद संबंधित जिले के डीईओ स्तर से स्कूल का भौतिक निरीक्षण प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक स्तर से एनओसी जारी किया जाता है।

क्यूआर कोड स्कैन होने पर नहीं खुलती डिजिटल कॉपी

जांच के दौरान तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक जटाशंकर चौधरी द्वारा जारी एनओसी का क्यूआर कोड स्कैन करने पर सर्टिफिकेट की डिजिटल कॉपी नहीं खुल रही है।

'मेरे कार्यकाल में उक्त दोनों विद्यालय का न तो निरीक्षण किया गया है और न ही सर्टिफिकेट जारी किया गया है। पूर्व के कार्यकाल में यदि जारी हुआ हो तो इसके बारे में कार्यालय के लोग बता सकते हैं।' -अलका जायसवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी, कोडरमा।

'उक्त दोनों स्कूलों का न तो डीईओ स्तर से कभी निरीक्षण किया गया है और न ही डिस्पैच रिकाॅर्ड के अनुसार इस तरह का प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है।' -मनोज कुमार, प्रधान सहायक, डीईओ कार्यालय, कोडरमा।

'उक्त दोनों स्कूलों ने ऑनलाइन आवेदन किया हुआ है, लेकिन प्रमाणपत्र निर्गत नहीं किया गया है। जानकारी मिली है कि जिले के चार स्कूलों ने विभाग का जाली प्रमाणपत्र तैयार किया है। इसमें ये दोनों स्कूल शामिल हैं।' -निर्मल, फायर सेफ्टी अधिकारी, कोडरमा।

'एक एजेंट के चक्कर में पड़ने से कुछ गड़बड़ी हो गई है। संबंधित व्यक्ति के द्वारा कुछ जाली दस्तावेज अपलोड कर दिए गए हैं। अब फिर से फ्रेश दस्तावेज तैयार कर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं।' -ओमप्रकाश राय, ट्रस्टी सह प्रबंधक, बीआर इंटरनेशनल स्कूल, कोडरमा।

'अभी सीबीएसई से मान्यता नहीं मिली है। रही बात पोर्टल पर आवेदन की तो उसमें जो दस्तावेज अपलोड किए गए हैं, उनमें सुधार किया जा रहा है।' -मो. मकसूद आलम, प्राचार्य, इकरा पब्लिक स्कूल, कोडरमा।

Edited By: Sujeet Kumar Suman