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झारखंड में आदिवासी का प्यार पाने को भाजपा बेकरार, 'तीर-धनुष' के सहारे अपनी जड़ें मजबूत रखे हुए है झामुमो

Published: Mon, 26 Oct 2026 06:26 PM (IST)

भाजपा झारखंड में आदिवासी समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए प्रयासरत है, क्योंकि आरक्षित सीटों पर झामुमो का दबदबा ...और पढ़ें

नितिन नवीन के मिशन झारखंड में जनजातीय को जोड़ने पर जोर।

नितिन नवीन के मिशन झारखंड में जनजातीय को जोड़ने पर जोर।

HighLights

  1. भाजपा झारखंड में आदिवासी समर्थन पाने को बेताब, मिशन झारखंड शुरू।

  2. झामुमो ने आदिवासी भावना को तीर-धनुष से जोड़े रखा।

  3. नितिन नवीन ने जनजातीय समुदाय से दिल का रिश्ता बनाने पर जोर।

अश्विनी रघुवंशी, रांची। झारखंड में आदिवासी का प्यार पाने को भाजपा बेकरार है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन झारखंड की राजधानी रांची आए तो यह बात समझ आ गई कि जनजातीय समुदाय का साथ परम आवश्यक है। उन्होंने मिशन झारखंड का आगाज करते हुए सबको समझाया कि आदिवासी समुदाय के साथ दिल का रिश्ता बनाने का प्रयास करे।

इसकी वजह भी है। आदिवासियों के प्रचंड समर्थन से झामुमो नीत इंडी गठबंधन लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहा है। फिलवक्त अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 28 विधानसभा सीटों में भाजपा के खाता में सिर्फ एक है।

यही अंतर ऐसा है जिसने भाजपा को सत्ता से दूर कर दिया है। झामुमो को इसका भान है। केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो आदिवासी भावना को तीर धनुष से जोड़े रखने में कामयाब है। 2019 से अब तक हुए आठ उप चुनाव हैं।

सात चुनावों में इंडी गठबंधन जीता है, एक में एनडीए। संदेश साफ है कि आदिवासियों का भरोसा झामुमो में बना हुआ है। अब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने टास्क दिया है कि गिरिडीह उप चुनाव के पहले कुछ ऐसा करे कि आदिवासियों का एक हिस्सा कमल खिलाने में भाजपा का साथ दे।

लब्बोलुआब यह है कि झारखंड की सियासत के केंद्र में जनजातीय समाज है। रघुवर राज के बाद झामुमो ने आदिवासियों के साथ मजबूत राजनीतिक रिश्ता बना रखा है। 2019 और 2024 में आदिवासियों ने खुल कर झामुमो नीत इंडी गठबंधन का साथ दिया है।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का आकलन है कि झारखंड का किला जीतने के लिए जनजातीय समाज को साधना आवश्यक है। सरना बनाम ईसाई और धर्म परिवर्तन जैसे मसले को भाजपा और धार देने को तैयार है। झामुमो को जल, जंगल और जमीन के सवाल पर घेरने की रणनीति है।

झामुमो के रणनीतिकार भाजपा के हर दांव की काट को तैयार है। निकट भविष्य मे सियासत और दिलचस्प होगी। झारखंड में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों के आंकड़े और पिछले तीन विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव के नतीजों के आंकड़े सब कुछ आसानी से बयां कर रहे हैं।

इसलिए ओडिशा के राज्यपाल बनाए गए ब्रज मोहन

झारखंड में अनुसूचित जाति का साथ लंबे समय से भाजपा को मिलता रहा है, चाहे लोकसभा का चुनाव हो अथवा विधानसभा। पिछले तीन लोकसभा चुनावों से पलामू सीट पर भाजपा को जीत मिली है।

पिछले तीन विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 9 सीटों पर भाजपा भारी रही है। पलामू के ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है। इसे अनुसूचित जाति के लिए सम्मान के तौर पर पेश किया जा रहा है।

झारखंड में आरक्षित सीटें

लोकसभा क्षेत्र : 14

  • एसटी आरक्षित : 05
  • एससी सुरक्षित : 01
  • कुल प्रतिशत : 42.96
  • एसटी आरक्षित सीट : खूंटी, लोहरदगा, सिंहभूम, दुमका और राजमहल
  • एससी सुरक्षित क्षेत्र : पलामू

विधानसभा क्षेत्र : 81

  • एसटी आरक्षित : 28
  • एससी सुरक्षित : 09
  • एसटी फीसद : 34.57
  • एससी प्रतिशथ : 11.11
  • कुल प्रतिशत : 45.68

एसटी सुरक्षित क्षेत्र

बोरियो, बरहेट, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, शिकारीपाड़ा, दुमका, जामा, घाटशिला, पोटका, सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, खरसावां, तमाड़, तोरपा, खूंटी, खिजरी, मांडर, सिसई, गुमला, विशुनपुर, सिमडेगा, लोहरदगा, मनिका एवं कोलेबिरा।

एससी आरक्षित सीट

देवघर, सिमरिया, चतरा, जमुआ, चंदनकियारी, जुगसलाई, कांके, छतरपुर एवं लातेहार।

हाल के चुनावों में ये रहा हाल

चुनाव वर्ष एवं प्रकार आरक्षित श्रेणी  भाजपा झामुमो कांग्रेस
2014 विधानसभा चुनाव एसटी (ST) 11 13 01
  एससी (SC) 05 00 00
2019 विधानसभा चुनाव एसटी (ST) 02 19 06
  एससी (SC) 06 02 00
2024 विधानसभा चुनाव एसटी (ST) 01 20 07
  एससी (SC) 03 02 02
2014 लोकसभा चुनाव एसटी (ST) 03 02 00
  एससी (SC) 01 00 00
2019 लोकसभा चुनाव एसटी (ST) 03 01 01
  एससी (SC) 01 00 00
2024 लोकसभा चुनाव एसटी (ST) 00 03 02
  एससी (SC) 01 00 00