कांग्रेस और झामुमो ने मिलकर छात्रों को दिया धोखा, भाजपा सरकार बनने पर होगी सीबीआई जांच: आदित्य साहू
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की सीबीआई जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का ...और पढ़ें

HighLights
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस को भाजपा ने बताया सकारात्मक कदम।
भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में सीबीआई जांच।
कांग्रेस-झामुमो पर छात्रों को धोखा देने का आरोप लगाया।
राज्य ब्यूरो, रांची। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की सीबीआई जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य को भेजे नोटिस को सकारात्मक कदम बताया है। सोमवार को प्रेस वक्तव्य जारी कर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को न्याय की दिशा में पहला कदम बताया है।
आदित्य साहू ने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट में सभी नियुक्तियों की सीबीआइ जांच की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के हक और उनके भविष्य की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट की यह टिप्पणी कि मामले में सक्षम एजेंसी से जांच की आवश्यकता हो सकती है, बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार की सारी काली करतूतों का सच सामने आकर रहेगा।
अब राज्य सरकार को बहानेबाजी और पैंतरेबाजी छोड़ जवाब देना होगा कि आखिर वह सीबीआइ जांच से क्यों भाग रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झामुमो ने मिलकर राज्य के बच्चों के साथ छल एवं साजिश करने का काम किया है। सीआइडी जांच के नाम पर मुख्य सरगना और बड़ी मछलियों को बचाने की कवायद हो रही है।
सरकार और झामुमो ने बर्बरता की सारी सीमाओं को पार किया: प्रतुल
भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस ब्रीफिंग करते हुए कहा कि राज्य सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी नाजी पार्टी की तर्ज पर चल रही है। जिस तरीके से नाजी पार्टी में लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए फर्जी मुकदमे, पुलिसिया कार्रवाई और प्रतिबंधों का सहारा लिया था, झारखंड सरकार और झामुमो भी उसी तर्ज पर बर्बरता कर रही है।
प्रतुल ने कहा कि धरना-प्रदर्शन से पहले अनुमति, सोशल मीडिया पर लिखने-लाइक करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन जैसी बातें सामने आना बेहद गंभीर है। सरकार स्पष्ट करे कि क्या राज्य में अब अपनी बात रखने के लिए भी नागरिकों को पुलिस से अनुमति लेनी होगी।
अगर ऐसा है तो यह लोकतंत्र नहीं, अघोषित आपातकाल की मानसिकता है। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन उसकी आड़ में विपक्ष, छात्रों और आम नागरिकों की आवाज को कुचलना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
