रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 - हरियाणा विधानसभा चुनाव के हाल ही में आए परिणामों ने प्रदेश भाजपा को एक बार फिर से मंथन के मोड में डाल दिया है। भाजपा की चुनौती पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिले वोट प्रतिशत को बरकरार रखने की है। लोकसभा चुनाव के वोट प्रतिशत के आधार पर ही भाजपा ने इस बार 65 प्लस का नारा दिया है। हालांकि, यह नारा एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की साझा मुहिम को दिया गया है, लेकिन आजसू के साथ अभी से बन रही तनातनी की स्थिति से भाजपा फिलहाल असहज महसूस कर रही है।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मुद्दे जुदा होते हैं। यही वजह है कि हरियाणा में लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने बूते पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त कर पाई। हालांकि, वहां दोबारा सरकार बनाने में भाजपा जरूर कामयाब हो गई। लोकसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा को इस बार रिकार्ड मत मिले। 14 में से 12 सीटों पर एनडीए ने बढ़त बनाई और भाजपा का वोट प्रतिशत 50 फीसद को पार कर गया।

2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को इतनी ही सीटेें हासिल हुईं थी और उसे करीब 41 फीसद वोट मिले थे। लेकिन, 2014 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत घटकर 31 फीसद से कुछ अधिक पर सिमट कर रह गया था। परिणामस्वरूप, भाजपा को विधानसभा चुनाव में अपने बूते 37 सीटें हासिल हुई थीं। हालांकि, लोकसभा चुनाव के सापेक्ष वोट प्रतिशत में यदि 10 फीसद की गिरावट इस बार भी आती है, तो भी भाजपा पिछली बार से बेहतर स्थिति में होगी।

लेकिन, यहां यह भी बता दें कि लोकसभा चुनाव में सीटें गंवाने के बावजूद कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वोट शेयर में भी इजाफा हुआ है। जाहिर है कांग्रेस और झामुमो की संयुक्त ताकत विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनेगी।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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