स्पेस रिसर्च में भारत की छलांग! BIT मेसरा के इस मेगा प्रोग्राम में जुटीं देश की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनियां
BIT Mesra News: बीआईटी मेसरा और इन-स्पेस ने उन्नत प्रणोदन प्रणालियों पर एक सप्ताह के कौशल विकास कार्यक्रम का शुभारंभ ...और पढ़ें

बीआईटी मेसरा के इस मेगा प्रोग्राम में जुटीं देश की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनियां।
HighLights
बीआइटी मेसरा में उन्नत प्रणोदन प्रणालियों पर कार्यक्रम शुरू।
इन-स्पेस के सहयोग से तकनीकी दक्षता बढ़ाना उद्देश्य।
उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा।
जागरण नेटवर्क, रांची। बीआईटी मेसरा के अंतरिक्ष अभियांत्रिकी एवं राकेट्री विभाग की ओर से रविवार को इन-स्पेस (IN-SPACe) के सहयोग से अल्पकालिक कौशल विकास पाठ्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया।
प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों एवं लैंडिंग मिशनों के लिए उन्नत प्रणोदन प्रणालियों पर आधारित यह सप्ताहव्यापी आवासीय कार्यक्रम देश के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करने और उद्योग-शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पूर्व निदेशक एवं विशिष्ट विज्ञानी डा. एस. पांडियन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर इन-स्पेस के प्रमोशन निदेशालय के निदेशक डाॅ. विनोद कुमार और बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में बीआइटी मेसरा के अंतरिक्ष अभियांत्रिकी एवं राकेट्री विभाग के अध्यक्ष डा. प्रियांक कुमार और इन-स्पेस के रेजिडेंट एक्सपर्ट मुरली शंकर शामिल हैं। वहीं, पाठ्यक्रम का समन्वय बीआइटी मेसरा के प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस डाॅ. अरुण कुमार पी. तथा इन-स्पेस के सहायक निदेशक डाॅ. वैभव गौड़ द्वारा किया जा रहा है।
देशभर से अंतरिक्ष क्षेत्र के दिग्गज और स्टार्टअप ले रहे हिस्सा
इस कार्यक्रम में अंतरिक्ष उद्योग, अनुसंधान संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से लगभग 50 प्रतिभागी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इनमें प्रमुख अंतरिक्ष स्टार्टअप्स जैसे-
- स्काईरूट एयरोस्पेस
- मनस्तु स्पेस
- स्पेसफील्ड्स
मणिपाल यूनिवर्सिटी, केपीआइटी और बीआइटी मेसरा के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह भागीदारी भारत के उभरते अंतरिक्ष पारितंत्र में विशेषीकृत तकनीकी प्रशिक्षण के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है।
प्रणोदन प्रौद्योगिकियों और भविष्य के मिशनों पर जोर
25 से 31 अक्टूबर तक निर्धारित इस पाठ्यक्रम में इसरो, डीआरडीओ (DRDO), उद्योग और शिक्षण जगत के विशेषज्ञों द्वारा 31 तकनीकी व्याख्यान एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पाठ्यक्रम के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:
- विविध प्रणोदन प्रणालियां: ठोस, द्रव, विद्युत, हाइब्रिड, हरित और क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक।
- उन्नत तकनीकें: तरल आक्सीजन–मीथेन प्रणोदन, अंतरिक्षयान प्रणोदन, मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणालियां और ग्रहों पर उतरने वाले मिशनों के लिए उन्नत समाधान।
- तकनीकी विषय: उन्नत सामग्री, तापीय प्रबंधन, सेंसर, नियंत्रण प्रणालियां, विनिर्माण, गुणवत्ता आश्वासन और विश्वसनीयता।
उद्योग और शिक्षा के बीच की दूरी को पाटना
यह पाठ्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। राकेट्री शिक्षा के क्षेत्र में अपनी दीर्घकालीन विरासत के साथ बीआईटी मेसरा भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
इस प्रकार की क्षमता-विकास पहलें शैक्षणिक ज्ञान और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटने के साथ-साथ इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
(नोट- यह खबर बीआईटी मेसरा की ओर से जारी प्रेस रिलीज पर आधारित है।)
