BIT मेसरा रांची के वैज्ञानिकों का कमाल, चांद के गड्ढों की पहचान के लिए विकसित की AI तकनीक
BIT मेसरा के शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की सतह पर क्रेटरों की पहचान और विश्लेषण के लिए AI-आधारित अत्याधुनिक तकनीक विकसित ...और पढ़ें

चांद की फाइल फोटो
HighLights
BIT मेसरा ने AI से चंद्र क्रेटर पहचान तकनीक विकसित की।
चंद्रयान-2 डेटा का उपयोग कर डीप लर्निंग फ्रेमवर्क बना।
भविष्य में चंद्र अन्वेषण में यह तकनीक सहायक होगी।
कुमार गौरव, रांची। अंतरिक्ष विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में रांची स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी (बीआईटी), मेसरा के शोधकर्ताओं ने एक बड़ी सफलता हासिल की है।
शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की सतह पर मौजूद क्रेटरों (गड्ढों) की सटीक पहचान और विश्लेषण के लिए एक अत्याधुनिक एआई-आधारित तकनीक विकसित की है।
यह महत्वपूर्ण शोध भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आइएसआरओ) के चंद्रयान-2 अनाउंसमेंट आफ अपार्चुनिटी (एओ) प्रोग्राम के तहत प्रायोजित किया गया था।
इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का संचालन प्रमुख अन्वेषक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संचिता पाल और सह प्रमुख अन्वेषक रिमोट सेंसिंग एंड जियोइंफार्मेटिक्स विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मिली घोष के मार्गदर्शन में किया गया।

बीआईटी मेसरा के विज्ञानियों द्वारा डेवलप किए गए यंत्र के सहारे चंद्रयान की ली गई तस्वीर। जागरण
इस परियोजना में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की पीएचडी शोधार्थी मीमांसा सिन्हा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शोधकर्ताओं ने चंद्रयान-2 के टीएमसी-2 डीईएम डेटा का उपयोग करते हुए चंद्र सतह के छोटे एवं जटिल क्रेटरों की पहचान के लिए एक अनुकूलित डीप लर्निंग फ्रेमवर्क विकसित किया।
अध्ययन में विभिन्न डीप लर्निंग माडल का परीक्षण किया गया, जिसमें मास्क आर-सीएनएन विद रेसनेट-101 बैकबोन ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
शोध की मुख्य उपलब्धियां और टूल्स
शोध में पाया गया कि डिजिटल एलिवेशन माडल (डीईएम) आधारित तकनीक पारंपरिक इमेज आधारित पद्धतियों की तुलना में अधिक सटीक और भू-आकृतिक रूप से प्रभावी है।
इससे क्रेटरों की सीमाओं, गहराई और क्षतिग्रस्त क्रेटरों की पहचान बेहतर तरीके से कर पाना संभव है। इस परियोजना के अंतर्गत शोधकर्ताओं ने टीएमसी-2, लोला, सेलीन और एनएसी जैसे बहु-सेंसर डेटा का एकीकृत उपयोग कर क्रेटर डिटेक्शन की नई कार्यप्रणाली को तैयार करने में सफलता प्राप्त की।

बीआईटी मेसरा के विज्ञानियों द्वारा डेवलप किए गए यंत्र के सहारे चंद्रयान की ली गई तस्वीर। जागरण
इसके साथ ही, व्यास, गहराई, ढाल, वृत्ताकारता और सतही खुरदरापन जैसे मापदंडों के स्वचालित विश्लेषण के लिए एक विशेष मार्फोमेट्रिक एक्सट्रैक्शन फ्रेमवर्क को भी विकसित किया गया।
शोध करनेवाली टीम ने क्रेटर मार्फो नामक एक विशेष आर्क जीआइएस प्रो-टूलबाक्स भी तैयार किया है, जो आटोमेटिक क्रेटर विश्लेषण में सहायक होगा। इसके माध्यम से एक किलोमीटर आकार के क्रेटरों का उच्च-रिजाल्यूशन कैटलाग तैयार किया गया है।
अब आगे की तैयारी
शोध में यह भी सामने आया कि केवल एक डेटा सेट पर निर्भर रहने से सेंसर रिजाल्यूशन और कवरेज से संबंधित व्यवस्थित त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है।

डॉ. संचिता पाल, डॉ. मिली घोष, मिमांसा सिन्हा।
इसलिए, बहु-स्रोत डेटा आधारित विश्लेषण को अधिक विश्वसनीय माना गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आनेवाले दिनों में इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा सके। इसके माध्यम से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को भी अधिक आसान बनाया जा सके।
इस तकनीक के पूरी तरह लागू होने के बाद, भविष्य के चंद्र मिशनों और अन्य ग्रहों की मैपिंग को पूरी तरह से आटोमेटिक और रीयल-टाइम बनाया जा सकेगा।
ऐसा माना जा रहा है कि इस शोध के निष्कर्षों के आधार परअंतरिक्ष विज्ञान में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। इस उपयोगी शोध से बीआईटी मेसरा में खुशी की लहर है। शोधकर्ताओं को उनकी उपलब्धि के लिए बधाइयां मिल रही हैं।
चंद्रयान-2, टीएमसी-2, डीईएम व ओएचआरसी इमेजरी का उपयोग करके डीईएम आधारित चंद्र क्रेटर पहचान के लिए एक अनुकूलित डीप लर्निंग फ्रेमवर्क विकसित किया गया है। इससे कई डीप लर्निंग आर्किटेक्चर को कार्यान्वित व मूल्यांकन किया जा सकता है। इनमें से रेसनेट101 के साथ मास्क आर-सीएनएन ने क्रेटर पहचान व विभाजन के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन प्राप्त किया।
-डॉ. मिली घोष, सह प्रमुख अन्वेषक।
विकसित की गई तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों के भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में हमारी योजना इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की है, ताकि डेटा संग्रहण की प्रक्रिया और आसान हो सके।
