फहीम अख्तर, रांची। मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित 'निर्मल हृदय' का एक और काला कारनामा उजागर हुआ है। यहां से न सिर्फ नवजातों को बेचा जाता था बल्कि नाबालिग लड़कियों का भी सौदा किया जाता था। यौन शोषण के बाद जब नाबालिग गर्भवती हो जाती थी तो उसे यहां पनाह दी जाती थी फिर उसके बच्चे को या तो बेच दिया जाता था या फिर विदेश भेजकर धर्म प्रचार के काम में लगा दिया जाता था।

बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला कल्याण अधिकारी और पुलिस ने जांच में पाया कि कुछ दिनों पूर्व सिमडेगा की एक नाबालिग को दिल्ली में बेचा गया। वहां उसका यौन शोषण हुआ। वापस लौटी तो गर्भवती स्थिति में उसे मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय में भर्ती कराया गया। पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया, इसके बाद बच्चे को छोड़कर घर लौट गई। आशंका है कि संबंधित बच्चे का सौदा हो चुका है। सीडब्ल्यूसी और समाज कल्याण अधिकारी द्वारा संबंधित बच्चे का पता लगाया जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो नाबालिगों की कोख और जन्मे बच्चे के सौदे का खेल ग्राउंड जीरो स्तर से चल रहा है। मानव तस्कर और दलाल से मिशनरीज ऑफ चैरिटी के सदस्यों की साठगांठ रहती है। जांच में यह बात सामने आ रही है कि सबने इसे कमाई का धंधा बना लिया था। सेटिंग कर पहले नाबालिग बच्चियों को बेचा गया। उसकी पूरी ट्रैकिंग की गई। गर्भवती होने के बाद उसे निर्मल हृदय को सौंप दिया गया। यहां बच्चे के जन्म के बाद उसे बेच दिया गया। कई मामलों में नाबालिग को कुछ पैसे देकर तो कई में उसे ऐसे ही घर भेज दिया गया। यह खेल खूंटी, सिमडेगा, गुमला, सरायकेला-खरसावां, लोहरदगा सहित अन्य इलाकों में चल रहा था। इस खेल की सूचना स्पेशल ब्रांच को मिली है। स्पेशल ब्रांच के अधिकारी इसका पता लगाने में जुट गए हैं।

नक्सलियों से शोषित पीड़िता भी पहुंची है निर्मल हृदय

नक्सलियों से यौन शोषण की शिकार हुई पीड़िता भी निर्मल हृदय पहुंची है। खूंटी की एक नाबालिग का पीएलएफआइ (पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया) उग्रवादी ने यौन शोषण किया था। निर्मल हृदय में पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद पीड़िता बच्चे को निर्मल हृदय के जिम्मे ही छोड़कर चली गई है। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस नक्सली लिंक को भी खंगालने में जुट गई है।

26 फाइलों के सत्यापन में दो की मिली जानकारी

सीडब्ल्यूसी को 26 बच्चों की फाइल हाथ लगी थी। इसका सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन में मौजूद फोन नंबरों और पते के आधार पर केवल दो ही बच्चे का पता चल सका है। अन्य का कोई अता-पता नहीं है। संबंधित नंबरों व दिए गए पते के आधार पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी जांच में जुटे हैं।

280 बच्चों का पता लगाने में जुटी है पुलिस

2015 से 2018 तक में रिकॉर्ड से गायब रहे 280 बच्चों का पुलिस पता लगा रही है। अब तक की फाइलों में पता चला है कि 450 गर्भवतियों की डिलीवरी निर्मल हृदय के माध्यम से कराई गई थी। इनमें 170 बच्चों की ही सीडब्ल्यूसी को जानकारी दी गई थी। बाकी बचे 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है। इसके अलावा नाबालिगों को 18 वर्ष का बताकर 130 गर्भवतियों की डिलीवरी की भी जांच चल रही है।

By Sachin Mishra