खूंटी, जासं। #धरतीआबा_बिरसा मुंडा की 144वीं जयंती शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसके लिए बिरसा मुंडा की जन्मस्थली अड़की प्रखंड अंतर्गत उलिहातू गांव में तैयारियां पूरी हो गई हैं। ग्रामीणों में उल्लास है। हालांकि आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण इस वर्ष प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं किया जा रहा है। कल्याण विभाग के अधिकारी यहां पहुंचकर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे।

दूसरी ओर उलिहातू के ग्रामीण अपने पूर्वज धरती आबा की जयंती को उल्लास पूर्वक मनाने की तैयारी में जुटे हैं। गुरुवार को बिरसा की जन्मस्थली बिरसा ओड़ा की साफ-सफाई व धुलाई कर दी गई। इसके अलावा गांव के अखरा में नाच-गान के आयोजन को लेकर तैयारियां कर ली गई हैं। शुक्रवार की सुबह बिरसा ओड़ा में स्थापित बिरसा मुंडा की प्रतिमा की ग्रामीण आदिवासी रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना करेंगे। सबसे पहले भगवान बिरसा मुंडा के वंशज पूजन करेंगे। इसके बाद अन्य ग्रामीण बारी-बारी से पूजन कर बिरसा मुंडा की प्रतिमा को नमन करेंगे। प्रारंभ में कांसे के लोटे में जल भरकर आम के पत्तों से प्रतिमा पर शुद्ध जल का छिड़काव कर प्रतिमा का शुद्धीकरण किया जाएगा। पूजा-अर्चना के बाद शाम को गांव के अखरा में नाच-गान होगा जिसमें आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

दूसरी ओर खूंटी कचहरी परिसर स्थित बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर जिला प्रशासन एवं राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग माल्यार्पण कर भगवान बिरसा मुंडा को नमन करेंगे। कचहरी परिसर में बिरसाइत धर्म मानने वाले आदिवासी महिला-पुरुष भी परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वज धरती आबा को नमन करेंगे। 

उलिहातू में विकास तो दिखता है, लेकिन रोजगार के साधन नहीं

चुनाव का नाम आते ही लोग मुखर हो जाते हैं। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। भगवान बिरसा की जन्मस्थली उलिहातू में विकास तो काफी हद तक दिखता है। करीब 20 फीट चौड़ी चमचमाती सड़क, हर घर में बिजली व पानी का कनेक्शन, सड़कों के किनारे लगी सोलर स्ट्रीट लाइट, गांव में छात्रों के दसवीं तक की शिक्षा के लिए आवासीय विद्यालय, स्वास्थ्य उपकेंद्र, युवाओं के खेलने के लिए फुटबॉल मैदान व ग्रामीणों को 24 घंटे एंबुलेंस की सुविधा- कुछ बानगी है, जो यह बताने को काफी है कि इस गांव में विकास की किरण पहुंच चुकी है।

गांव में बेटियों की शिक्षा की व्यवस्था सिर्फ आठवीं तक ही

नेताओं से अपेक्षा एवं विकास योजनाओं का हाल जानने के लिए उलिहातू के ग्रामीणों से गुरुवार को दैनिक जागरण ने बात की। ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। गांव के सोमा मुंडा ने कहा कि सरकार बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है, लेकिन गांव में बेटियों की शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। मात्र आठवीं कक्षा तक छात्राओं के पढऩे की व्यवस्था है। इससे आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें खूंटी या फिर मुरहू भेजना पड़ता है। जबकि छात्रों के लिए 10वीं तक आवासीय विद्यालय है। छात्र यहां रहकर पढ़ाई करते हैं।

दुबराज मुंडा ने कहा कि उनके परिवार को उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन नहीं मिला है, जबकि कई अन्य लोगों का कहना था कि गैस कनेक्शन तो मिल गया है, लेकिन रिफिल के लिए पैसा नहीं होने एवं परेशानी के कारण खाली सिलिंडर घर में  पड़ा है। विलसन तोपनो ने बताया कि अस्पताल में नियमित डॉक्टर नहीं बैठते हैं। सप्ताह में कुछ ही दिन अस्पताल खुलता है। 

क्षेत्र में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं, पलायन करना मजबूरी

विकास मुंडा ने कहा कि क्षेत्र में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हैं। रोजगार के लिए पलायन मजबूरी बन गई है। पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी बनाई गई है, लेकिन इससे पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होती। खासकर गर्मी में परेशानी बढ़ जाती है। सरकारी योजनाओं में लोगों को काम नहीं मिल रहा है। विधायक फंड से काम नहीं हुआ है। उज्ज्वला योजना का लाभ उनके परिवार को नहीं मिला है। कुल मिलाकर काफी समस्याएं गिनाते हुए ग्रामीण यह भी स्वीकार करते हैं कि गांव में विकास कार्य हुए हैं लेकिन अभी और ध्यान देने की जरूरत है।

सिंचाई सुविधा दुरुस्त होनी चाहिए

गांव के लोग खेती के लिए पूर्णत: वर्षा पर आश्रित हैं। सिंचाई के साधन के नाम पर चेकडैम का निर्माण किया गया, लेकिन यह क्षतिग्रस्त हो गया। इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए इस दिशा में पहल करें। गांव में व्याप्त पेयजल संकट को भी दूर किया जाना चाहिए। -सुखराम मुंडा, बिरसा मुंडा के वंशज   

गांव का नहीं हुआ अपेक्षित विकास : ग्राम प्रधान

भगवान बिरसा मुंडा का पैतृक गांव होने के बावजूद उलिहातू गांव का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। यह बातें उलिहातू के ग्राम प्रधान निर्मल मुंडा ने जागरण से बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि गांव में सड़क व बिजली की सुविधा तो है, पर गर्मी के दिनों में पानी के लिए काफी परेशानी होती है। काफी दूरी पर स्थित कुआं व डाड़ी का गंदा पानी पीना पड़ता है। बेरोजगारी के चलते महज 70 रुपये में मजदूरी करनी पड़ती है, जबकि काम भी कभी-कभार ही मिलता है।

सरकार ने आवासीय विद्यालय तो बना दिया पर यहां बच्चों को अंग्रेजी, गणित व साइंस की उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। गांव के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन खेती और पशुपालन है। यदि सरकार जल, जंगल, जमीन पर पूर्ण अधिकार दे और लोगो को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देकर बिरसा मुंडा के गांव का उत्थान करे तो गरीबी, लाचारी व बेबसी का अंत हो सकता है। अगली सरकार और जनप्रतिनिधि से हम यही अपेक्षा करते हैं। तभी भगवान बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और धरती आबा का सपना साकार होगा।

Posted By: Alok Shahi

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