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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय नियुक्ति मामला: हाई कोर्ट ने परिणाम जारी करने की याचिका खारिज की

Published: Wed, 21 Oct 2026 09:45 PM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में विभिन्न पदों पर नियुक्ति परिणाम जारी करने की मांग वाली याचिका ...और पढ़ें

अदालत ने कहा- चयन प्रक्रिया में शामिल होने से नियुक्ति का अधिकार नहीं।

अदालत ने कहा- चयन प्रक्रिया में शामिल होने से नियुक्ति का अधिकार नहीं।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने बीएयू नियुक्ति याचिका खारिज की।

  2. आवेदन से नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलता, अदालत ने कहा।

  3. विश्वविद्यालय ने परिणाम घोषित नहीं किए थे।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में विभिन्न पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर परिणाम घोषित करने को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि किसी पद के लिए आवेदन करने या चयन प्रक्रिया में शामिल होने मात्र से अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को विश्वविद्यालय के 27 जनवरी के उस आदेश को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देने की छूट दी है, जिसके जरिए वर्ष 2023 में जारी नियुक्ति विज्ञापन रद किया गया था। इस संबंध में याचिका इशाक कच्छप, बिलेंद्र राम और संजर आलम ने दायर की थी।

याचिका के अनुसार, बीएयू ने दो मार्च 2019 को प्लंबर, हेल्पर सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित योग्यता के आधार पर आवेदन किया।

उन्हें प्रवेश पत्र भी जारी किए गए और उन्होंने चयन प्रक्रिया में भाग लिया। इसके बाद भी विश्वविद्यालय ने परिणाम घोषित नहीं किया। परिणाम जारी करने की मांग को लेकर झारखंड कर्मचारी मजदूर मोर्चा ने आठ जुलाई 2021 को विश्वविद्यालय को पत्र लिखा था।

इसके बाद विश्वविद्यालय ने 30 जनवरी 2023 को संबंधित पदों पर नियुक्ति के लिए दोबारा विज्ञापन जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने इस विज्ञापन के तहत भी आवेदन किया, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

विश्वविद्यालय ने हाई कोर्ट को बताया कि राज्यपाल सचिवालय के नौ जुलाई 2019 और 27 दिसंबर 2019 के निर्देशों के बाद वर्ष 2019 की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई थी। बाद में नए कुलपति की नियुक्ति के बाद संबंधित पदों के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी किया गया। राज्य के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव ने 11 मई 2023 को ज्ञापन जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया रोकने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में न तो परिणाम घोषित किया था और न ही चयन सूची जारी की थी। ऐसे में उनके पक्ष में नियुक्ति का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं हुआ। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।