रांची, [आनंद मिश्र]। झारखंड में बैंकों का धंधा मंदी के दौर से गुजर रहा है। ब्याज दर कम होने के बावजूद बैंकों को कर्जदार नहीं मिल रहे हैं और वहीं पुराना दिया गया ऋण एक बड़ा बोझ बनकर सामने आया है। ऐसी दोहरी आफत का सामना बैंकों ने कभी नहीं किया है। जब सीडी रेशियो (ऋण-जमा अनुपात) घटकर 42.43 फीसद पर पहुंच गया हो और ग्रास एनपीए (गैर निष्पादित आस्तियां) का आंकड़ा नया रिकाॅर्ड बनाते हुए 8.20 प्रतिशत पर पहुंच जाए। कोराेना समेत तमाम वजहों से उपजा संकट राज्य के बैंकों को परेशान करना वाला है।

जाहिर है बैंकों की वित्तीय सेहत दुरुस्त नहीं है। हाल ही में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में गत वित्तीय वर्ष 2020-21 की अंतिम तिमाही के नतीजों के फाइनल आंकड़ों पर मंथन किया गया और चिंता भी जताई गई। बैंकों की ब्याज दरें अपने न्यूनतम स्तर पर हो और लोग कर्ज लेने में रुचि न दिखाएं तो बैंकों के लिए इसे काफी निराशाजनक स्थिति कही जाएगी।

हालांकि ऐसा नहीं कि बैंकों को कर्ज लेने वाले नहीं मिल रहे हैं लेकिन जो हैं वे बैंकों के मनमाफिक नहीं हैं। मनमाफिक कर्जदार वे होते हैं, जिनकी ऋण लेने और अदा करने की क्षमता होती है। वे समय पर लिए गए ऋण को चुकाने में समक्ष होते हैं। बैंक ऐसे ही लाेगों को कर्ज देना पसंद करती है और ऐसे सक्षम लोग कर्ज के लिए बैंकों की दहलीज तक जाने से कतरा रहे हैं। हां, जमा जरूर कर रहे हैं और इसी से सीडी रेशियो (ऋण-जमा अनुपात) का संतुलन गड़बड़ा गया है।

कोर रेशियो तो 31.89 पर जाकर टिका है। वहीं, एनपीए की स्थिति के एक हद से ज्यादा गुजर जाने से बैंक कुछ डरे हुए भी हैं। प्राथमिक क्षेत्र का ऋण प्रवाह की मंद गति यही बताती है। सीडी रेशियो में गिरावट के प्रतिकूल प्रभाव के लिए एसएलबीसी ने कुछ हद तक एसबीआइ को जवाबदेही ठहराया है। हालांकि सिर्फ एसबीआइ ही नहीं, खराब सीडी रेशियो प्रदर्शित करने वाले बैंकों में केनरा बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, साउथ इंडिया बैंक, फेडरल बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक भी शामिल हैं, जिनका सीडी रेशियो महज 12-23 फीसद के दायरे में रहा। 

6775 करोड़ का कर्ज फंसा

झारखंड के बैंकों का एनपीए (गैर निष्पादित आस्तियां) अब चिंताजनक स्थिति 8.21 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सीधे शब्दों में समझें ताे दिया गया कर्ज डूबता नजर आ रहा है और यह अब बढ़कर 6775.87 करोड़ तक पहुंच गया है। झारखंड में विजय माल्या या मेहुल चोकसी जैसे बड़े कॉरपोरेट बकायदारों के न होने के बावजूद एनपीए इस स्तर तक पहुंच गया, जो बैंकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। एसएलबीसी की रिपोर्ट में बैंकों ने काफी हद तक इस एनपीए के लिए प्राथमिक क्षेत्र को जिम्मेदार ठहराया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए 36 फीसद, पंजाब नेशनल बैंक का 34 फीसद, यूको बैंक का 24 फीसद, फेडरल बैंक का 66 फीसद से अधिक है।

कुछ खास स्कीमें जिनमें दिया गया कर्ज फंस गया

स्कीम फंसा कर्ज

पीएमईजीपी 132.72

केसीसी 1255.22

पीएमएमवाई 499.61

एसएचजी 193.61

सीडी रेशियो की गिरावट

बैंकों में जितना पैसा जमा किया जाता है, उसके सापेक्ष कितना पैसा बैंक लोन के रूप में बांट रहे हैं, इसी के अनुपात को क्रेडिट टू डिपॉजिट रेशियो (सीडी रेशियो) या ऋण-जमा अनुपात कहा जाता है। झारखंड में जमा 2,58,929.74 करोड़ के सापेक्ष 1,09,871.96 करोड़ का ऋण बैंकों द्वारा समेमित रूप से दिया गया है। यह 42.43 प्रतिशत को बयां करता है, जो कि एक निराशानजक आंकड़ा है। जबकि दिसंबर-20 की तिमाही में यह 50.43 प्रतिशत था और 31 मार्च-2020 की तिमाही में 55.63 फीसद। वहीं, जमा के सापेक्ष कोर ऋण महज 82,560.22 करोड़ रहा। स्पष्ट है कि कोर सीडी रेशियो महज 31.89 प्रतिशत रहा। कोर सीडी रेशियो जमीनी आंकड़ों की सच्चाई काे दर्शाता है। बैंकों की आंकड़ेबाजी से इतर यह वास्तविकता के ज्यादा करीब होता है।

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