रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। Babulal Joins BJP झारखंड के सर्वाधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में सबकी नजर झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी के रुख पर है। गुरुवार को वे एक सप्ताह के विदेश भ्रमण के बाद रांची पहुंचे और आते ही गतिविधियां तेज कर दीं। बाबूलाल मरांडी सारी तैयारियां भीतर ही भीतर कर रहे हैैं और भाजपा में विलय को लेकर गोलमोल जवाब दे रहे हैैं।

अलबत्ता यह तय हो गया है कि वे अपनी पार्टी का विलय करेंगे और इसके लिए वे आवश्यक तकनीकी जटिलताओं को दूर करने में लगे हैैं। जल्द ही वे झाविमो की नई कार्यकारिणी का गठन करेंगे, जिसे वे भंग कर चुके हैैं। इसके अलावा वे राज्य में नवगठित हेमंत सोरेन की सरकार से समर्थन वापस लेंगे। झारखंड विकास मोर्चा के तीन विधायकों ने सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रखा है। हालांकि इससे हेमंत सोरेन की सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

बाबूलाल मरांडी की हरसंभव कोशिश है कि वे अपने दोनों विधायकों प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को साथ रहने के लिए राजी करें। संभावना है कि प्रदीप यादव देर-सवेर साथ आएं, लेकिन बंधु तिर्की के मानने की गुंजाइश कम है। दोनों विधायकों ने बगावती तेवर दिखाए तो बाबूलाल मरांडी उन्हें दल से निष्कासित कर देंगे। ऐसी स्थिति में दोनों विधायक किसी अन्य दल में जाने की स्थिति में भी नहीं होंगे और बाबूलाल मरांडी को पार्टी के विलय में कोई अड़चन नहीं आएगी। दरअसल भाजपा की ओर से यही संदेश झाविमो को दिया गया है कि पार्टी का पूर्ण विलय किया जाए। इसी दिशा में बाबूलाल मरांडी भरसक कोशिश कर रहे हैैं।

गुरुवार को रांची पहुंचने के बाद अपने कार्यालय में झारखंड विकास मोर्चा के अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने समर्थकों और नजदीकी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।

बीजेपी चाहती है विलय करना, कई दल चाहते हैैं : बाबूलाल

झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी के भाजपा में शामिल होने और दल के विलय की बातें भले ही काफी आगे बढ़ गई है, लेकिन वे खुद इस मामले पर खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैैं। गुरुवार को झाविमो मुख्यालय में उन्होंने दार्शनिक अंदाज में तमाम सवालों के जवाब दिए। कई प्रश्न पर वे सिर्फ मुस्करा कर रह गए। अलबत्ता यह जरूर कहा कि बीजेपी चाहती है कि उनके दल झाविमो का विलय हो जाए।

भाजपा में झाविमो के विलय पर स्पष्ट कहने से बच रहे बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल ने यह भी जोड़ा कि कई दलों की यह इच्छा है। कोई यहां विलय चाहता है तो कोई वहां। करना होगा तो कार्यकर्ताओं को बुलाकर बातचीत करेंगे। आपलोगों को (मीडिया को) भी बुलाकर स्पष्ट करेंगे। इसमें सनसनी पैदा करने सरीखी कोई बात नहीं है। यह भी जोड़ा कि मीडिया अपनी बातें रखने को स्वतंत्र है। एक समाचारपत्र (दैनिक जागरण नहीं) ने मेरी भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात की खबर दी है। अगर मैैं मिलता तो कोई तस्वीर भी होती। मुझे यह पता नहीं है कि कहां क्या चर्चा हो रही है?

जो निर्णय होगा सबको बुलाकर करेंगे एलान, लोग अटकलें लगाने को स्वतंत्र

बेफिक्र लहजे में उन्होंने कहा कि राजनीति में न तो कोई दूर होता है न करीब होता है। वे निर्लिप्त भाव से काम करते हैैं। अब नई कार्यसमिति का गठन करेंगे। कई बातें मन में चल रही हैं। संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। जब कोई बात होगी तो अवश्य लोगों को बताएंगे। उन्होंने बताया कि जीत हासिल करने के बाद अपने विधानसभा क्षेत्र धनवार नहीं गए हैैं। वे जल्द ही वहां का दौरा करेंगे।

विलय की अड़चन ऐसे होगी दूर

बाबूलाल मरांडी की हरसंभव कोशिश है कि वे अपने दोनों विधायकों प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को साथ रहने के लिए राजी करें। संभावना है कि प्रदीप यादव देर-सवेर साथ आएं, लेकिन बंधु तिर्की के मानने की गुंजाइश कम है। दोनों विधायकों ने बगावती तेवर दिखाए तो बाबूलाल मरांडी उन्हें दल से निष्कासित कर देंगे। ऐसी स्थिति में दोनों विधायक किसी अन्य दल में जाने की स्थिति में भी नहीं होंगे और बाबूलाल मरांडी को पार्टी के विलय में कोई अड़चन नहीं आएगी। दरअसल भाजपा की ओर से यही संदेश झाविमो को दिया गया है कि पार्टी का पूर्ण विलय किया जाए। इसी दिशा में बाबूलाल मरांडी भरसक कोशिश कर रहे हैैं। इधर, प्रदीप यादव के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वे भाजपा में विलय को तैयार हैं, लेकिन वे भाजपा में महत्‍वपूर्ण पद चाहते हैं।

हेमंत सरकार से समर्थन लेंगे वापस

इसके साथ ही झारखंड विकास माेर्चा 19 दिन पुरानी हेमंत सरकार से समर्थन अपना वापस लेगा। यह हेमंत सरकार को पहला झटका है। हालांकि झाविमो की समर्थन वापसी से हेमंत सरकार की सेहत पर फर्क नहीं पड़ेगा। इससे पहले झाविमो ने हेमंत सरकार को अपना समर्थन दिया था। झाविमो के तीन विधायक बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की का समर्थन हेमंत सरकार को हासिल हुआ था।

अब आगे ये कवायद करेंगे बाबूलाल मरांडी

  1. झाविमो की नई कार्यसमिति गठित करेंगे, जल्द बुलाएंगे बैठक।
  2. कार्यसमिति की मंजूरी लेकर करेंगे भाजपा में विलय का एलान।
  3. बाबूलाल भरसक कोशिश करेंगे कि दोनों विधायक आएं उनके साथ।
  4. अगर साथ आने को राजी नहीं हुए तो दोनों विधायक को निष्कासित कर देंगे बाबूलाल।

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