रांची, राज्य ब्यूरो। झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के विदेश दौरे से लौटने के बाद 16 जनवरी तक मोर्चा की नई कार्यकारिणी के गठन की संभावना है। इसके बाद ही पार्टी का रुख स्पष्ट हो पाएगा, साथ ही झाविमो के भाजपा में विलय के कयास पर भी विराम लग सकेगा। बहरहाल इस पूरे प्रकरण पर बाबूलाल मरांडी की चुप्पी से झाविमो में ऊहापोह की स्थिति है। पार्टी के शेष दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की भी इस मामले में कुछ स्पष्ट बोलने की स्थिति में नहीं है। अलबत्ता प्रदीप जहां पार्टी की मौजूदा गतिविधियों को विलय की राह की ओर बढ़ते कदम करार देते हैं तो बंधु तिर्की कहते हैं- धुआं है तो कहीं आग भी होगी। आगे क्या होगा, हम भी इंतजार कर रहे हैं, आप भी करें।

पार्टी के निवर्तमान केंद्रीय महासचिव अभय कुमार सिंह के अनुसार बाबूलाल मरांडी ने कभी सौदे की राजनीति नहीं की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पद तक का त्याग किया है। ऐसे में राज्यहित में जो भी फैसले लेंगे, पूरी कार्यसमिति इसका समर्थन करेगी। उनका दावा है कि बाबूलाल ने अबतक न तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की है और न ही भाजपा में किसी पद के लिए विचार-विमर्श ही किया है। केंद्रीय कार्यसमिति भंग होने के बाद सारे फैसले का अधिकार अध्यक्ष होने के नाते बाबूलाल मरांडी को दिया गया है। कार्यकारिणी के गठन के बाद की रणनीति भी वे खुद तय करेंगे।

मैैं जहां हूं, वहीं रहूंगा : प्रदीप यादव

झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीम बाबूलाल मरांडी के भाजपा में जाने की अटकलें हैं। साथ ही पार्टी के हाल में उनके साथ जीतकर विधानसभा पहुंचे पोडैय़ाहाट विधायक प्रदीप यादव व बंधु तिर्की के पार्टी में शामिल होने न होने को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। सोमवार को रांची से लौटने के बाद विधायक प्रदीप ने अपने आवास पर  इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका भाजपा में जाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है।

उन्होंने कहा कि विगत दस साल की मेरी राजनीतिक यात्रा देखी जाए तो कोई भी सहसा पता कर सकता है मैैं इस दौरान झारखंड के आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यकों व पिछड़ों के हित को लेकर लड़ाई लड़ता रहा हूं। विगत दस वर्षों में भाजपा ने इन समुदायों की अनदेखी कर इनके अहित में कई काम किए हैैं। हर मौके पर इनके हक अधिकार को छीनने की कोशिश की गई है। इसलिए मेरा जैसा व्यक्ति भाजपा में जाएगा यह सवाल ही पैदा नहीं होता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हो सकता है कि झारखंड विकास मोर्चा का कदम उस ओर हो और झाविमो के अधिकांश नेता मुखातिब भी हैं। पर व्यक्तिगत तौर पर मेरी भाजपा या कांग्रेस के किसी भी नेता से बातचीत नहीं हुई है। मैं जहां हूं, वहीं रहूंगा।

इस दौरान बाबूलाल मरांडी के भाजपा में जाने के कयासों पर उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी राज्य के शीर्ष नेता हैं। मैं उन्हें अपना एक आदर्श के रूप में मानता हूं लेकिन उनके बारे में बहुत कुछ नहीं कह सकता। हालांकि सूत्रों की मानें तो प्रदीप यादव अपने राजनीतिक कयासों को लेकर 16 जनवरी को कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। उस दिन मकर संक्रांति के अवसर पर पत्रकार सम्मेलन उन्होंने अपने घर पर आयोजित की है। जिसमें राजनीति को लेकर लंबी बातचीत हो सकती है।

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