झारखंड के गांव में इटली का स्वाद: पारंपरिक चूल्हे पर बनता है ऑथेंटिक पिज्जा, दिल्ली तक से खिंचे चले आ रहे लोग
रांची के ग्रामीण अंचल में 'अमोरे मियो' नामक एक इटैलियन भोजनालय अपने प्रामाणिक वुड-फायर पिज्जा के लिए चर्चा में है।

रांची का फेमस इटालियन पिज्जा। (वीडियो ग्रैब)
HighLights
रांची के ग्रामीण अंचल में 'अमोरे मियो' इटैलियन भोजनालय।
पारंपरिक वुड-फायर ओवन में बनता है प्रामाणिक इटैलियन पिज्जा।
स्थानीय जैविक सामग्री और किसानों से सीधे खरीदी सब्जियां।
डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में ग्रामीण अंचल में एक ऐसा भोजनालय संचालित हो रहा है जो विशुद्ध इटालियन जायके के लिए चर्चा में है।
पारंपरिक खानपान के बीच यह छोटा सा कैफे प्रामाणिक इटैलियन पिज्जा के शौकीनों का पसंदीदा ठिकाना बन चुका है।
हाल ही में इंस्टाग्राम पर सोशल मीडिया क्रिएटर (@jamshedpur.wala) के एक वीडियो के जरिए यह जगह अचानक सुर्खियों में आ गया है।
रांची से करीब 25 किलोमीटर दूर टाटा मार्ग स्थित बयांगडीह-जारिया में संचालित इस आउटलेट का नाम ‘अमोरे मियो’ (इटालियन भाषा में 'मेरा प्यार') है। यह न सिर्फ भोजन का केंद्र है, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वावलंबन का जरिया भी बन चुका है।
स्कूल की कैंटीन से शुरू हुआ सफर
इसकी शुरुआत की कहानी काफी दिलचस्प है। वीडियो में महिला ने बताया कि वर्षों पहले धर्म प्रचार के सिलसिले में इटली से आए फादर कार्लो और मैडम हयारी ने इस इलाके में एक स्कूल शुरू किया था।
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स्कूल परिसर में कैंटीन न होने की वजह से फादर कार्लो ने मिट्टी, ईंट और लकड़ी की मदद से एक पारंपरिक 'वुड-फायर' ओवन तैयार किया और उसमें पिज्जा पकाना शुरू किया। वतन लौटने से पहले इस दंपती ने स्थानीय ग्रामीणों को पारंपरिक ओवन का इस्तेमाल और असली इतालवी पिज्जा बनाने की बारीक तकनीक सिखाई।
शुरुआती दौर में दिलचस्पी की कमी के कारण यह केंद्र बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। हालांकि, वर्ष 2014 में स्थानीय आदिवासी युवाओं ने इसकी संभावनाओं को भांपते हुए इसे नए सिरे से शुरू करने का बीड़ा उठाया।
ताजी और जैविक सामग्री ही असली पहचान
वर्तमान में यह आउटलेट न केवल आसपास के निवासियों बल्कि शहरियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है, जहां रोजाना सैकड़ों पिज्जा बेचे जाते हैं। वीडियो में महिला ने बताया कि यहां दूर-दूर से लोग पिज्जा खाने आते हैं। दिल्ली से भी लोग आते हैं।
इस भोजनालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पैकेटबंद और प्रोसेस्ड सामग्रियों का इस्तेमाल नहीं करते। पिज्जा में इस्तेमाल होने वाला पनीर स्थानीय स्तर पर ही तैयार किया जाता है। टमाटर, शिमला मिर्च और अन्य हरी सब्जियां सीधे लोकल किसानों के खेतों से खरीदी जाती हैं।
पारंपरिक लकड़ी-मिट्टी के ओवन में धीमी आंच पर पकने के कारण इसका स्वाद बाजार में मिलने वाले सामान्य पिज्जा से काफी अलग और शुद्ध रहता है।
पारंपरिक विदेशी पाक-कला और स्थानीय संसाधनों के अनूठे संगम ने इस सुदूर गांव को जायके के नक्शे पर एक खास पहचान दिला दी है।
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