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रांची, जासं। Raksha Bandhan 2019 - भाई बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन 15 अगस्त को देशभर में मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर इस बार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। एक तो 19 साल बाद रक्षाबंधन के दिन भद्रा नक्षत्र का अशुभ प्रभाव नहीं होगा। दूसरा सात साल बाद पंचांग का शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग की गणना करने के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की स्थिति देखी जाती है। तिथि पूर्णिमा, वार गुरुवार, नक्षत्र धनिष्ठा और श्रवण एवं बब व बालव करण रक्षाबंधन के लिए काफी उत्तम फलदायी साबित होगा। इससे पूर्व 2012 में इस प्रकार का पंचांग योग बना था।

रांची विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के लेक्चरर एसके घोषाल के अनुसार 15 अगस्त को सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा नक्षत्र समाप्त हो जाएगा। सूर्य कर्क राशि में तथा चंद्र मकर राशि में एवं बृहस्पति ग्रह का चार दिन पूर्व ही मार्गी होना अत्यंत दुर्लभ संयोग है। चिंतामणि पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 14 अगस्त को दोपहर बाद से 15 अगस्त को 3.58 बजे तक रहेगी।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण को सूर्पनखा ने भद्रा मुहूर्त में ही राखी बांधी थी। रावण की मृत्यु एक वर्ष पश्चात ही हो गई थी। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि भद्रा में शिव तांडव मुद्रा में रहते हैं जो कि अशुभ फलदायी होता है। इस कारण अन्य वर्षो की भांति भद्रा मुक्त एवं पंचांगनुसार शुभ संयोग है।

रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर बांधें वैदिक रक्षासूत्र
बाजार में एक से बढ़ कर एक राखी उपलब्ध है। बहन अपने भाईयों के लिए रेशम के अलावा सोने, चांदी के मंहगे से मंहगे राखी खरीदती हैं। फैशनेबुल राखी से बाजार पटा है। इसके बावजूद वैदिक रक्षासूत्र का अपना महत्व है। आज के समय में भी कई ऐसी बहने हैं जो दिखावे की बजाय वैदिक नियम का पालन करती हैं। ज्योतिष की माने तो बाजार से खरीदी गई राखी के अलावा बहनें अपने भाईयों के लिए घर में ही वैदिक रक्षासूत्र बना सकती हैं जो धार्मिक महत्व के अनुसार काफी श्रेष्ठकर माना गया है।

इस प्रकार बनाएं वैदिक रक्षासूत्र
ज्यातिष एसके घोषाल के अनुसार सबसे पहले साफ थाली में मौली धागा, अक्षत, कुमकुम, केसर, दूर्वा(घास)पुष्प रख लें। इसके बाद स्वास्ति वचन और रक्षामंत्र के बीच पीला या केसरिया सूती कपड़ा में सबको बांध लें और गणेश भगवान को नमन करते हुए भाई की कलाई पर बांधे। इस प्रकार बांधा गया रक्षासूत्र भाई-बहन के प्रेम को और प्रगाढ़ करती है।

राखी पूर्णिमा की पूजा-विधि
रक्षा बंधन के दिन बहनें भाईयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र या राखी बाधती हैं। साथ ही वे भाइयों की दीर्घायु, समृद्धि व खुशी आदि की कामना करती हैं। रक्षा-सूत्र या राखी बाधते हुए इन मंत्र उच्चारण करें। येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।। अर्थ जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बाधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बाधता हूं। हे रक्षे (राखी), तुम अडिग रहना। अपने रक्षा के संकल्प से कभी भी विचलित मत होना

ये है मुहूर्त
पूर्णिमा मुहूर्त प्रात: काल से 3.58 तक रक्षा बंधन मुहूर्त प्रात: 5.45 से सायं 06.01 तक रक्षा बंधन विशेष शुभ मुहूर्त अपराहन 1.43 से सायं 4.20 तक

मिठाइयों से सजी दुकानें
रक्षाबंधन का त्योहार 15 अगस्त को है। शहर में मिठाई की दुकानों पर तरह-तरह की मिठाईयां मौजूद हैं। मिठाईयों की विशेष पैकेजिंग की गई है। दुकानों में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। साथ राखी की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा सकती है।

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