रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड में एक बार फिर सहायक अवर निरीक्षक (एएसआइ) से दारोगा में प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस मुख्यालय ने एक बार फिर सभी जिलों से मंतव्य मांगा है कि कौन-कौन जमादार दारोगा में प्रोन्नति के योग्य हैं और अर्हता को पूरा करते हैं।

1700 जमादार कर रहे इंतजार

झारखंड में करीब 1700 जमादार प्रोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। सीमित परीक्षा के चलते जमादारों की प्रोन्नति बाधित हुई थी। सीमित परीक्षा के प्रविधान को समाप्त करने संबंधित पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार की भी मुहर लग चुकी है। हालांकि, इससे संबंधित अधिसूचना अब तक जारी नहीं हो सकी है। इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय ने सरकार के निर्देश पर अपने स्तर पर प्रोन्नति संबंधित तैयारियां शुरू कर दी है।

इसल‍िए नहीं बन पाए हैं दारोगा

ये एएसआइ 35 वर्ष तक की ड्यूटी पूरी कर चुके हैं, लेकिन प्रोन्नति नहीं होने से दारोगा नहीं बन पा रहे हैं। जबकि, दूसरे राज्यों में इनसे पांच साल या इससे ज्यादा जूनियर भी दारोगा बन चुके हैं।

सिपाही-हवलदार से सीधे दारोगा में प्रोन्नति

सिपाही-हवलदार से सीधे दारोगा में प्रोन्नति के लिए पूर्व की रघुवर सरकार में वर्ष 2016 में नियमावली में संशोधन कर सीमित विभागीय परीक्षा का प्रविधान शुरू किया गया था। इस नियमावली के तहत दारोगा के रिक्त पदों में 50 फीसद रिक्त पद पर सीधी बहाली से दारोगा बनाने व शेष 50 फीसद में 25 फीसद सीमित परीक्षा से सिपाही से दारोगा व 25 फीसद रिक्त पद पर एएसआइ को प्रोन्नति देकर दारोगा बनाने का प्रावधान किया गया।

नियमावली के पूर्व सीमित परीक्षा का प्रविधान नहीं था

जबकि, इस नियमावली के पूर्व सीमित परीक्षा का प्रविधान नहीं था। 50 फीसद पद पर एएसआइ ही दारोगा में प्रोन्नत होते थे। रघुवर सरकार के इस नियमावली संशोधन का तब से ही विरोध हो रहा है। सीमित परीक्षा को समाप्त करने के लिए पुलिस एसोसिएशन लगातार सरकार से पत्राचार करता रहा। इस नियमावली से एक बार नियुक्ति व प्रोन्नति हो चुकी है। वर्ष 2018-19 में इस नियमावली से ही दारोगा के पद पर सीधी बहाली से 2123 पद भरे गए। सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से 1544 रिक्त पदों को भरने के लिए परीक्षा हुई, लेकिन इस परीक्षा के माध्यम से 395 सिपाही-हवलदार ही दारोगा के पद पर प्रोन्नत हुए। 1149 पद रिक्त रह गए थे।

Edited By: M Ekhlaque