संजीव रंजन, रांची : टीम इंडिया का विश्व कप जीतने का सपना टूट गया। भारतीय टीम विश्व कप से बाहर हो गई। महेंद्र सिंह धौनी का शहर निराश है, अपने राजकुमार को शहर विश्व कप की ट्राफी के साथ देखना चाहता था। यह उनका अंतिम विश्व कप जो था। निराश खेल प्रेमी और पूर्व क्रिकेटर इस हार के लिए भारतीय टीम प्रबंधन और कोच रवि शास्त्री को दोषी मान रहे हैं। सवाल उठा रहे कि महेंद्र सिंह धौनी को बल्लेबाजी क्रम में नीचे क्यों उतारा। यह माही और जडेजा का ही पराक्रम था कि भारतीय टीम एक समय जीत की दहलीज पर पहुंच गई थी लेकिन बस चंद कदम दूर रह गई। प्रशंसकों की मानें तो अगर माही पहले उतरते तो तस्वीर दूसरी होती।

खेल के जानकारों की मानें तो तीन विकेट गिरने के बाद पिच पर ऐसा बल्लेबाज होना चाहिए था जो एक छोर पर टिका रहता और युवा खिलाड़ियों को अपने साथ खेलाता। लेकिन हुआ उल्टा धौनी से पहले दिनेश कार्तिक, रिषभ पंत व हार्दिक पांड्या को भेज दिया गया। जबकि कोच रवि शास्त्री अच्छी तरह जानते हैं कि धौनी ऐसे बल्लेबाज हैं जो दबाव में स्वयं भी अच्छा खेलते हैं और साथियों को भी दबाव से मुक्त रखते हैं। ऐसे कई मैचों में माही ने टीम इंडिया को संकट से उबारा है। लेकिन ऐसा क्या था कि विश्व कप के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में धौनी को सातवें स्थान पर उतारा गया। धौनी जब आउट होकर पवेलियन लौट रहे थे तो उनकी आंखें बहुत कुछ बयां कर रही थीं।

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जोश को अनुभव का साथ मिलना चाहिए था :

धौनी को क्रिकेट में लाने वाले उनके स्कूल के प्रशिक्षक केआर बनर्जी भी इस बात से चकित हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि लीग मैच में गलती सुधारने का मौका मिलता है लेकिन नाकआउट में एक गलती आपको बाहर का रास्ता दिखा देती है और टीम इंडिया के साथ यही हुआ। रिषभ व पांड्या दोनों युवा व जोशीले खिलाड़ी हैं इसलिए उनके सामने अनुभवी, धैर्य व गंभीर खिलाड़ी होना चाहिए था। इसके लिए धौनी सबसे मुफिद था लेकिन उसे नीचे उतारा गया जो टीम के लिए घातक सिद्ध हुआ।

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क्रम बदलने से हुआ नुकसान :

पूर्व रणजी खिलाड़ी आदिल हुसैन भी मानते हैं कि बल्लेबाजी क्रम में इतने बदलाव से टीम को नुकसान हुआ। धौनी को चार या पांच नंबर पर उतारना चाहिए था। बल्लेबाजी क्रम में फेरबदल उस समय किया जाता है जब आप बहुत बड़ा टारगेट का पीछा कर रहे हों, लेकिन यहां जो लक्ष्य था उसे हासिल किया जा सकता था। लेकिन बल्लेबाजी क्रम में बदलाव कर हमने उस लक्ष्य को जटिल कर दिया और नतीजा यह हुआ कि हम विश्व कप से बाहर हो गए। यह तब है जब धौनी ने अपने करियर में कई बार टीम को इस तरह की परिस्थितियों से उबारा है।

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माही ऊपर आते तो कहानी कुछ और होती :

क्रिकेट प्रशिक्षक और महेंद्र सिंह धौनी के करीबी जय कुमार सिन्हा ने कहा विश्व कप के इतने महत्वपूर्ण मैच में इस तरह का प्रयोग नहीं होना चाहिए था। सभी को पता है कि यह मैच कितना महत्वपूर्ण है इसके बाद भी धौनी का बल्लेबाजी क्रम बदलना सही निर्णय नहीं कहा जा सकता। धौनी इस विश्व कप में जिस तरह से बल्लेबाजी करते रहे हैं उसमें उनकी भूमिका मुख्यरूप से पारी बनाने की रही है। आज जब तीन विकेट जल्द गिर गए उस समय उन्हें ही भेजना चाहिए था लेकिन दिनेश कार्तिक को भेजा गया। इसके बाद भी उन्हें न उतार कर पहला विश्व कप खेल रहे रिषभ पंत व हार्दिक पांड्या को उतार दिया गया जिन्हें दबाव में बल्लेबाजी करने का अनुभव नहीं है। अगर माही ऊपर आते तो कहानी कुछ और हो सकती थी।

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टीम प्रबंधन ने क्या सोचा कहना मुश्किल :

क्रिकेट प्रशिक्षक चंचल भंट्टाचार्य भी मानते हैं कि विकेट की पतझड़ को रोकने के लिए माही सबसे सही बल्लेबाज था। लेकिन टीम प्रबंधन ने उसे नीचे क्यों उतारा यह कोच रवि शास्त्री ही बता सकते हैं। लक्ष्य हासिल किया जा सकता था लेकिन भारतीय बल्लेबाजो ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं संभाली। मध्य क्रम पूरे विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका आज मध्य क्रम के बल्लेबाजों के पास मौका था लेकिन वे असफल साबित हुए।

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आज फिर मैच फिनिशर साबित होते माही

रांची जिला क्रिकेट संघ के पूर्व सचिव सुनील कुमार सिंह ने कहा कि अगर माही को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर लाया जाता तो आज फिर वे मैच फिनिशर की भूमिका निभाते नजर आते। उन्होंने माना कि सातवें नंबर पर जब धौनी बल्लेबाजी करने आए थे तब उनके दिमाग में विकेट बचाने के साथ साथ रन गति बढ़ाने की भी योजना रही होगी। वे जानते थे कि उनके आउट होते ही टीम धराशायी हो जाती इसलिए वह संभलकर खेलते नजर आए। अगर ऊपर उतरे होते तो विकेट भी बचता और रन भी बनते। लेकिन किस योजना के तहत माही को नीचे उतारा गया यह समझ से बाहर है।

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