पुल और सड़क निर्माण के लिए एआई का उपयोग अनिवार्य, निर्माण के दौरान कंप्यूटर में दर्ज हो जाएगी गुणवत्ता
भारत सरकार ने पुल और सड़क निर्माण के लिए एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग अनिवार्य कर दिया है, खासकर उन ...और पढ़ें

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय का झारखंड समेत सभी राज्यों को संदेश।
HighLights
पुल-सड़क निर्माण में एआई का उपयोग अनिवार्य।
निर्माण गुणवत्ता कंप्यूटर में स्वचालित रूप से दर्ज होगी।
परियोजनाएं समय पर, बिना मानवीय त्रुटि के पूरी होंगी।
अश्विनी रघुवंशी, रांची। झारखंड समेत किसी भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से पुल या सड़क बनाना है तो उसके निर्माण में एआई (कृत्रिम बुद्धिमता) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मुख्य सचिव अविनाश कुमार और पथ निर्माण सचिव सुनील कुमार को इसका सर्कुलर भेजा है।
इसमें एआई के जरिए पुल और सड़क निर्माण का तौर तरीका बताया गया है। बताया गया कि एआई के उपयोग से सड़क का निर्माण खुद ब खुद प्राक्कलन के मुताबिक होता जाएगा। निर्माण कार्य के दौरान उसकी गुणवत्ता भी स्वत: कंप्यूटर में दर्ज होती जाएगी। जब चाहिए तब जांच लीजिए।
देश भर के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क एवं सेतु निर्माण के तकनीकी प्रविधान पर जो परिपत्र निर्गत किया है, उसमें हर जिज्ञासा का समाधान है। इसके तहत सड़क निर्माण की निविदा में उन्हीं संवेदकों को अवसर दिया जाएगा जिनके पास एआइ आधारित सक्षम मोटर ग्रेडर, इंटेलिजेंट कांपेक्टर रोलर हैं।
नई सड़क बनेगी तो प्राक्कलन के मुताबिक मशीन खुद मिट्टी का भराव करेगी। बाकी सारी परत की सामग्री भी मशीन खुद बिछाती जाएगी।हर परत की मजबूती का कार्य भी मशीन से होगा।
जिन परियोजना में एआई आधारित निर्माण निर्धारित है, उसमें चुनिंदा या आंशिक हिस्सा में इसे लागू नहीं किया जा सकता। पूरी लंबाई में एआइ से कार्य होगा। संवेदक के पास हरेक परत के निर्माण की विवरणी कंप्यूटर में दर्ज रहेगी। सरकारी अभियंता कभी भी कंप्यूटर को देख सकेंगे।
सड़क निर्माण में एआई से लाभ
इस आधुनिक और स्वचालित तकनीक का नाम आटोमेटेड एंड इंटेलिजेंस मशीन एडेड कंस्ट्रक्शन (एआई-एमसी) है। परंपरागत रूप से सड़क के निर्माण में मानव श्रम का अधिक उपयोग होता है। अभी हरेक स्तर पर मानवीय जांच की जरूरत होती है।
एआई-एमसी तकनीक में ग्रेडर, पेवर और रोलर कंपैक्टर पर सेंसर, कंप्यूटर और थ्रीडी जीपीएस एवं जीएनएसएस सिस्टम लगाए जाते हैं। मशीनों में सड़क का थ्रीडी डिजाइन दर्ज कर दिया जाता है। मशीन खुद ही उसी डिजाइन के मुताबिक खुद सड़क का निर्माण करती जाती है। इससे निर्माण के दौरान सड़क की मोटाई, समतल होना और मजबूती का आंकड़ा लगातार मिलते रहता है।
मशीनें बिना किसी इंसानी गलती के एकदम सटीक काम करती हैं। सड़कें उबड़-खाबड़ नहीं बनती हैं। लंबे समय तक चलती हैं। रात के समय भी इन मशीनों से सटीकता के साथ काम जारी रखा जा सकता है, जिससे परियोजना समय पर पूरी हो सकती है। गिट्टी, डामर और अन्य सामग्री आवश्यकता के मुताबिक उपयोग में आती है।
अब एआई आधारित तकनीकी के आधार पर ही सेतु और सड़क का निर्माण किया जाएगा। भारत सरकार समर्थित हरेक परियोजना में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। एनएचएआइ को भी दिशा निर्देश मिले हैं। इसके दूरगामी लाभ होंगे।
-संतोष कुमार आर्य, क्षेत्रीय महाप्रबंधक, एनएचएआई, रांची
