रांची, प्रदीप शुक्ला। राज्य के उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की साख पर एक बार फिर बट्टा लग गया है। झारखंड हाई कोर्ट द्वारा छठी जेपीएससी का परीक्षा परिणाम रद कर संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिए जाने के बाद छठी जेपीएससी परीक्षा परिणाम के आधार पर चयनित और राज्य के विभिन्न विभागों में पदस्थापित हो चुके 326 युवाओं की नौकरी पर भी संकट खड़ा हो गया है। इस फैसले को लेकर जेपीएससी और राज्य सरकार में उच्च स्तर पर गहन मंथन चल रहा है। अब आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजरी टिकी हैं।

झारखंड हाई कोर्ट ने आयोग को छठी जेपीएससी की मेधा सूची को रद कर आठ सप्ताह में संशोधित परीक्षा परिणाम घोषित करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना है कि प्रथम पत्र (हिंदी व अंग्रेजी) के अहर्ता अंक को कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना गलत है। अदालत ने आयोग को निर्देशित किया है कि विज्ञापन में की गई घोषणा के अनुरूप परीक्षा के प्रथम पत्र के अहर्ता अंक को कुल प्राप्तांक में जोड़े बगैर दूसरी मेधा सूची जारी करें। छठी जेपीएससी का अंतिम परिणाम 21 अप्रैल 2020 में जारी हुआ था। इसके खिलाफ अलग-अलग 15 याचिकाएं उच्च न्यायालय में दाखिल हुई थीं, जिनमें अंतिम परिणाम में गड़बड़ियों की शिकायत की गई थी। इन्हीं याचिकाओं को निस्तारित करते हुए अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि गड़बड़ी करने वाले आयोग के अफसरों के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

इससे पहले छठी जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी और अदालती आदेश समेत अलग-अलग कारणों से प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी तीन बार संशोधित हुआ था। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी ही है कि बार-बार गड़बड़ी क्यों हो रही है? क्या कुछ अभ्यíथयों को फायदा पहुंचाने के लिए निर्धारित मापदंड का पालन नहीं किया गया? यह किसके इशारे पर हुआ? ऐसे तमाम अनुत्तरित सवाल हैं जिनका जवाब अब आयोग के अफसरों को देना पड़ सकता है। निर्धारित प्रक्रिया में छेड़छाड़ के लिए जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर भी उच्च न्यायालय की नजर रह सकती है। एक अन्य पहलू भी है जिस पर भी गौर करना होगा। इस परीक्षा का अंतिम परिणाम आने में पांच साल लग गए। अब दोबारा मेधा सूची संशोधित होगी तो 100 से 150 चयनित युवाओं की नौकरी जा सकती है और भविष्य में वह भी विभिन्न अदालतों का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसे में यह पूरी परीक्षा ही पचड़े में फंस सकती है। फिलहाल आयोग इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील करने की तैयारी में जुट गया है। राज्य का काíमक विभाग भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और इससे संबंधित दस्तावेज एकत्र कर रहा है। सरकार का पक्ष क्या होगा और जेपीएससी किस आधार पर आगे की लड़ाई लड़ेगा, यह तय होने के बाद ही गतिविधियां आगे बढ़ेंगी। जेपीएससी की कई अन्य परीक्षाओं के परिणाम पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।

रूपा तिर्की मौत मामले में बढ़ी रार : झारखंड पुलिस की सब इंस्पेक्टर रूपा तिर्की की मौत मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष में चल रही जुबानी जंग के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन हो गया है। आयोग के अध्यक्ष झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता को छह महीने में इस मामले की तहकीकात कर जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है। तीन मई को साहिबगंज महिला थाना की तत्कालीन प्रभारी रूपा तिर्की का शव साहिबगंज स्थित उनके आवास में पंखे से झूलता पाया गया था। रूपा मूल रूप से रांची के रातू प्रखंड की रहने वाली थी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें पहली बार महिला थाना प्रभारी के रूप में पदस्थापित किया गया था। रूपा तिर्की के स्वजन और कई आदिवासी संगठन शुरू से ही रूपा की मौत को हत्या बता सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। भाजपा भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है।

वहीं, राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने चार दिन पहले ही पुलिस महानिदेशक को राजभवन तलब कर जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसको लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राजभवन पर काफी तल्ख टिप्पणी भी की थी। हालांकि पुलिस ने अपनी जांच में रूपा की मौत को आत्महत्या माना है। साथ ही रूपा तिर्की के एक सहकर्मी सब इंस्पेक्टर शिव कुमार कनौजिया को गिरफ्तार भी किया है। आरोप है कि वह काफी समय से रूपा को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।

[स्थानीय संपादक, झारखंड]

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