रांची : जो कंपनी अस्तित्व में थी ही नहीं, उस कंपनी के नाम पर 9.54 करोड़ रुपये का ऋण ले लिया। फर्जी दस्तावेज, फर्जी कोटेशन के आधार पर बैंक को चूना लगाया गया। इसमें टाटा मोटर्स के अधिकृत डीलर के शाखा प्रबंधक ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद सीबीआइ की रांची स्थित आर्थिक अपराध शाखा ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत धोखाधड़ी के मामले में चार नामजद व अन्य अज्ञात के विरुद्ध दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। एक प्राथमिकी में 6.23 करोड़ व दूसरी प्राथमिकी में 3.31 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। आरोप सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज,रामगढ़ के संचालक संजय शाह, भारत लॉजिस्टिक्स व शिवा ट्रांसपोर्ट कंपनी के संचालक मुकेश शाह, इनार इंडस्ट्रीयल इंटरप्राइजेज (टाटा मोटर्स के अधिकृत डीलर) रामगढ़ के शाखा प्रबंधक रविकांत प्रसाद व भीम बॉडी बिल्डर्स के संचालक भीम राणा पर लगा है।

आरोपितों ने रामगढ़ के मेसर्स सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज का दस्तावेज दिया था और बताया था कि यह कंपनी टैंकर का चेसिस बनाती है। छानबीन में पता चला कि यह कंपनी अस्तित्व में ही नहीं है। दूसरी कंपनी भीम बॉडी बिल्डर्स को भी टैंकर निर्माता कंपनी बताया गया था, जो जांच में छोटा रिपेय¨रग व छोटा-मोटा डेंटिंग-पेंटिंग शॉप है। जाली दस्तावेज दिखाकर ऋण लिया गया है। बैंक के सभी ऋण जब एनपीए हो गए तो बैंक ने आरोपितों के 30 चेचिस को जब्त कर लिया। किसी भी चेचिस पर टैंकर की बॉडी नहीं बनी थी।

दिसंबर 2016 से मई 2017 के बीच लगाया चूना

आरोपितों ने दिसंबर 2016 से मई 2017 के बीच बैंक ऑफ इंडिया की रामगढ़ शाखा से वाहन/टैंकर ऋण फाइनेंस के नाम पर चूना लगाया। यह ऋण टाटा मोटर्स से चेचिस खरीदने व ऑयल टैंकर का बॉडी बनाने के नाम पर लिया। जांच के क्रम में यह बात सामने आई कि मेसर्स भारत लॉजिस्टिक्स व मेसर्स शिवा ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रोपराइटर मुकेश शाह ने रिलायंस, बीपीसीएल व एचपीसीएल के लिए पेट्रोलियम उत्पाद परिवहन का जाली वर्क आर्डर दिखाया। आरोपित मुकेश शाह, उनके भाई संजय शाह व रविकांत प्रसाद (टाटा मोटर्स के अधिकृत डीलर मेसर्स इनार इंडस्ट्रीयल इंटरप्राइजेज के शाखा प्रबंधक) ने विभिन्न स्थानीय युवकों के नाम पर आयल टैंकर का ऋण स्वीकृत कराया। उन युवकों की मासिक आय छह हजार से 10 हजार रुपये तक थी। बैंक को आश्वस्त किया कि सभी वाहन मेसर्स भारत लॉजिस्टिक्स व मेसर्स शिवा ट्रांसपोर्ट कंपनी के अधीन संचालित होंगे। सभी ऋण टाटा मोटर्स के अधिकृत विक्रेता इनार इंडस्ट्रीयल इंटरप्राइजेज से वाहनों के चेसिस खरीदने व टैंकर के बॉडी बनाने के नाम पर लिए गए।

रामगढ़ में नहीं बनती है ऑयल टैंकर की बॉडी

सीबीआइ की प्रारंभिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि रामगढ़ में कोई भी अधिकृत टैंकर बॉडी बनाने वाला नहीं है। टैंकर अधिकतर रांची व जमशेदपुर में ही बनते हैं, जो तीन से चार लाख रुपये तक में बनते हैं। इससे यह साबित हो गया कि संजय शाह ने मेसर्स सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज नामक जाली फर्म बनाया और फर्जी कोटेशन व दस्तावेज के आधार पर प्रति टैंकर 7.50 लाख से 10.90 लाख रुपये के दर से ऋण स्वीकृत करवाया। बैंक ऑफ इंडिया की रामगढ़ शाखा से 6.23 करोड़ रुपये का ऋण टैंकर निर्माण के लिए मेसर्स सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज के खाते में स्थानांतरित किए गए। आरोपितों ने उक्त राशि नकदी रूप में निकाल ली।

केस के अनुसंधानकर्ता सीबीआइ के आर्थिक अपराध शाखा रांची के दारोगा विवेक कुमार करेंगे।

भीम बॉडी बिल्डर के खाते में करवाया 2.72 करोड़ स्थानांतरित

सीबीआइ की प्रारंभिक जांच में यह साबित हुआ कि रामगढ़ का मेसर्स भीम बॉडी बिल्डर छोटा-मोटा डेंटिंग-पेंटिंग व छोटा रिपेय¨रग शॉप है। इसके संचालक भीम राणा ने बैंक को टैंकर निर्माण करने से संबंधित कोटेशन दिया और प्रत्येक टैंकर में 7.50 लाख रुपये से 10.90 लाख रुपये खर्च आने की बात कही। इस तरह के कागजात पर बैंक से ऋण स्वीकृत हुआ और भीम बॉडी बिल्डर के केनरा बैंक के खाते में ऑयल टैंकर निर्माण के एवज में 2.72 करोड़ रुपये का स्थानांतरण करवाया।

Posted By: Jagran