मुख्यमंत्री ने कहा, काम छोटा नहीं होता, बड़े सपने भी देखो, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक व पिछड़ी जाति के युवकों को मिला ऋण

रांची, राब्यू : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अल्पसंख्यक, पिछड़ी जाति समेत 1141 दिव्यांगजनों के बीच 6.42 करोड़ रुपये का ऋण बांटा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लाभुक युवक-युवतियों को संबोधित करते हुए कहा है कि कोई काम छोटा नहीं होता। एक मजदूर से लेकर मुख्यमंत्री तक के सफर की वे स्वयं बानगी हैं।

हां, इतना जरूर है कि सपने बड़े देखने चाहिए। उन्होंने लाभुकों से अपील की वे समय पर कर्ज चुकाए और फिर ऋण लेकर और बड़ा काम करें। रिम्स आडिटोरियम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम छह दिव्यांगों, 228 एससी, 497 एसटी, 227 अल्पसंख्यक तथा अन्य के बीच ऋण का वितरण हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के 19 वर्षो के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब समारोह आयोजित कर अल्पसंख्यकों को एकमुश्त ऋण प्रदान किया गया। एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों से संबद्ध वित्त एवं सहकारी निगमों के लिए अलग से बजटीय प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि 2014 तक महज 4798 अल्पसंख्यक लाभुकों को ऋण दिया गया था, जबकि पिछले साढ़े चार वर्षो में इस समुदाय के 2454 लाभुकों को ऋण देकर उन्हें स्वावलंबी बनने का मार्ग दिखाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी को नौकरी नहीं दे सकती। ऐसे में युवा हुनरमंद बने व नौकरी मांगने के बजाए नौकरी प्रदाता बनें।

मैंने खुद पांच लाख रुपये ऋण लेकर खोली थी दुकान : रघुवर

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लाभुकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि 1977 में उन्होंने पांच लाख रुपये का ऋण बैंक से लिया था। उन्होंने कहा कि बैंक लोन के लिए बेवजह कितना दौड़ाते है, उन्हें इसका अंदाजा है। 25 फीसद अनुदान पर मिले इस कर्ज से उन्होंने इलेक्ट्रिकल दुकान खोली थी, फिर ऋण भी चुकता किया था।

श्रम विभाग में कराएं निबंधन और पाएं सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने लाभुकों से अपना निबंधन श्रम विभाग में कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि निबंधन के बाद दुर्घटना में मृत्यु होने पर दो लाख तथा अंत्येष्टि के लिए 25 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। बच्चों को पढ़ाने के लिए ढाई सौ से आठ हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति मिल सकती है। इसके अलावा अन्य कई सरकारी सुविधाएं भी मिलेंगी।

वियतनाम जाएंगे बांस के कारीगर, 50 हजार को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा झारखंड में बांस का कारोबार उद्योग का स्वरूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि बांस के कारीगरों को सरकार वियतनाम भेजेगी। राज्य के नौ जिलों में बांस की वस्तुओं को बनाने के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास बांस के उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजार है। इससे 50 हजार युवक-युवतियों को रोजगार मिलेगा। सरकार उनके उत्पादों को निर्यात करेगी।

भेड़, बकरियों की तरह नहीं ठूंसे जाएंगे इंसान, दौड़ेगी बसें

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी परिवहन की व्यवस्था उतनी समृद्ध नहीं है, जितनी होनी चाहिए। लोग बसों में भेड़-बकरियों की तरह ठूंसे जाते हैं। शीघ्र ही इस स्थिति से निजात के लिए परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होगी। सरकार ग्रामीण युवाओं को अनुदान पर बसें उपलब्ध कराएगी। कल्याण विभाग बैंकों से संपर्क कर उन्हें ऋण मुहैया कराएगा ताकि वे भाग दौड़ से बच सकें।

झारखंड गुजरात व महाराष्ट्र से कम नहीं, अनुदान भी बढ़ेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में प्रचुर मात्रा में खनिज है, मजबूत मानव संसाधन है। यह किसी भी मामले में गुजरात और महाराष्ट्र से कम नहीं है। झारखंड की प्रतिभाओं ने हुनर दिखाना शुरू कर दिया है। हाल ही में जलकुंभी से निर्मित एक ट्रक चटाई इटली भेजी गई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न लाभकारी योजनाओं के तहत वितरित होने वाले ऋण में अनुदान की सीमा भविष्य में और बढ़ाई जाएगी।

Posted By: Jagran

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