रांची, राज्य ब्यूरो। नक्सलियों का गढ़ माना जाने वाला छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अति संवेदनशील है। यहां नक्सलियों के भय से 5000 आदिवासी परिवारों ने अपना घर छोड़ दिया है। उन्होंने झारखंड सहित दूसरे राज्यों में शरण ली है, जहां वे जैसे-तैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैैं। ऐसे परिवारों को चिह्नित कर उनकी सूची उपलब्ध कराने का निर्देश केंद्र ने दिया है, ताकि उनके पुनर्वास पर ठोस निर्णय लिया जा सके। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में सात राज्यों के गृह सचिव को पत्राचार कर पूरी रिपोर्ट मांगी है।

इन राज्यों में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश व बंगाल शामिल हैं। पत्र में बताया गया है कि यह मुद्दा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उठाया है। इसका उद्देश्य नक्सलियों के भय से बस्तर छोडऩे वाले आदिवासी परिवारों का पुनर्वास है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीन जुलाई, 31 जुलाई, चार सितंबर व एक अक्टूबर को भी सभी सात राज्यों को पत्राचार किया था, लेकिन अब तक ये राज्य अपनी रिपोर्ट नहीं दे पाए, जिसके चलते कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।

इधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस पत्राचार के बाद से ही झारखंड के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। इस संबंध में सभी जिलों को पत्राचार किया जा रहा है, ताकि ऐसे पीडि़त परिवार को चिह्नित किया जा सके। नक्सली हिंसा के मामले में छत्तीसगढ़ अति संवेदनशील रहा है। झारखंड से सटा होने के कारण नक्सली एक राज्य में वारदात को अंजाम देकर दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके चलते पुलिस कारगर अभियान नहीं चला पाती है। जबकि आपसी समन्वय के मसले पर दोनों राज्यों के आलाधिकारियों की अक्सर बैठकें व बातें होती रहती हैं।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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