राज्य ब्यूरो, रांची: रांची सिविल कोर्ट के वकील मनोज झा की हत्या के विरोध में शुक्रवार को राज्य के 35 हजार से अधिक वकील न्यायिक कार्य दूर रहे। राज्य के किसी भी अदालती कार्य में अधिवक्ता शामिल नहीं हुए। इस कारण एक भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। राज्य के 37 बार संघ में 35 हजार से अधिक वकील प्रैक्टिस करते हैं। वकीलों ने मनोज झा की हत्या की पेशेवर तरीके से जांच करने और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। उनके परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की। झारखंड बार काउंसिल ने सभी वकीलों से न्यायिक कार्य बहिष्कार करने की घोषणा की थी। झारखंड राज्य बार काउंसिल के चेयरमैन राजेंद्र कृष्णा कहा कि अधिवक्ताओं पर हाल के दिनों में लगातार हमले हो रहे हैं। वकीलों की हत्याएं भी हुईं हैं। अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए सरकार से दो साल से अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की जा रही है। राज्य सकार ने इस कानून को लागू करने का आश्वासन भी दिया था। इसके बाद बार काउंसिल ने कानून का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंपा। प्रारूप विधि विभाग के पास लंबित है। काउंसिल के वाइस चेयरमैन राजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि काउंसिल अब एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कराने के लिए लगातार आंदोलन करने का निर्णय लिया है। सरकार को एक माह में कानून लाने को कहा गया है। कानून लागू करने के लिए अध्यादेश जारी करने पर दबाव बनाना जाएगा। जरूरत पड़ी तो पूरे राज्य में आंदोलन होगा। बता दें कि रांची के वकील मनोज कुमार झा की 26 जुलाई को तमाड़ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस अभी तक इस हत्याकांड का खुलासा नहीं कर सकी है और इसका मुख्य आरोपी भी अभी तक फरार है। वकील मनोज झा की हत्या पर झारखंड हाई कोर्ट ने एसएसपी को तलब कर अनुसंधान में तेजी लाने और स्पीडी ट्रायल करने का निर्देश दिया है।

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