रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News झारखंड के हर व्‍यक्ति पर 26 हजार रुपये का कर्ज है। जबकि 46% लोग अब भी गरीब हैं। झारखंड के आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021-22 में बढ़ते कर्ज का भी जिक्र किया गया है। स्पष्ट कहा गया कि ऋण का बोझ राजकोषीय घाटे में वृद्धि के फलस्वरूप बढ़ा है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2014-15 और 2019-20 के बीच राज्य का शुद्ध उधार 12.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। सार्वजनिक ऋण वर्ष 2014-15 में जीएसडीपी का लगभग 20 प्रतिशत था, वर्ष 2015-16 के बाद से यह 27 प्रतिशत से ऊपर रहा। प्रति व्यक्ति ऋण भी 2014-15 के बाद लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2014-15 में यह लगभग 12 हजार करोड़ था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 22 हजार करोड़ तथा 2019-20 में 25 हजार करोड़ हो गया।

72 लाख लोग गरीबी रेखा के बाहर आए

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में ओपीएचआई और यूएनडीपी द्वारा 2019 में जारी ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवरिटी इंडैक्स के हवाले से बताया गया है कि वर्ष 2005-06 से 2015-16 तक की दस वर्ष की अवधि में झारखंड के लगभग 72 लाख लोग बहुआयामी गरीबी के बाहर आए हैं। इस दौरान राज्य में गरीबी का प्रतिशत 74.7 से घटकर 46.5 प्रतिशत हो गया।

सुधरी शिशुओं की सेहत, मातृ मृत्यु दर में आई कमी

राज्य में माताओं एवं शिशुओं की सेहत में काफी सुधार हुआ है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन बच्चों में कुपोषण की समस्या अभी भी है। चिंताजनक बात यह है कि लड़कों की तुलना में लड़कियों में कुपोषण अधिक है। इसी तरह, शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अधिक कुपोषित हैं। झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, शिशु मृत्यु तथा बाल मृत्यु दर दोनों का कम करने में झारखंड में उल्लेखनीय प्रगति की है। शिशु मृत्यु दर (एक हजार जन्म पद) वर्ष 2011-15 से 2016-20 की अवधि के दौरान 34 से घटकर 31 हो गई है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर भी 49 से घटकर 45 हो गई है।

इसी तरह, संस्थागत प्रसव तथा टीकाकरण दरों में वृद्धि हुई है। पूर्वी सिंहभूम और रामगढ़ को छोड़कर सभी जिलों ने संस्थागत प्रसव में अच्छा प्रदर्शन किया है। सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव के लिए निजी अस्पताल की बजाय सरकारी अस्पताल को प्राथमिकता दी जाती है। रिपोर्ट में सीएनएनएस द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गय है कि राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के 36 फीसद बच्चे बौने, 29 फीसद दुबले तथा 43 फीसद कम वजन के हैं।

गांवों तक बेहतर बिजली आपूर्ति, परिवहन क्षेत्र में सशक्त बुनियादी ढांचा

झारखंड के आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में आधारभूत संरचना के विकास और संचार के क्षेत्र में बेहतरी की ओर इशारे कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बिजली की उपलब्धता से लेकर मांग में बढ़ोतरी हुई है तो परिवहन के क्षेत्र में सशक्त बुनियादी ढांचा विकसित हुआ है, जो आने वाले दिनों में राज्य के विकास की गति को तेज करेगा। वर्ष 2011-12 में राज्य में बिजली की उपलब्धता 9988.2 मेगावाट थी जो 3.22 प्रतिशत की औसत वार्षिक दर से बढकर 2019-20 में 12878.12 मेगावाट हो गई। राज्य में 2515 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता में से 2276.46 मेगावाट यानी 91 प्रतिशत उत्पादन कोयला आधारित तापीय ऊर्जा से, आठ प्रति ऊर्जा जल विद्युत से और 1.88 प्रतिशत बिजली अक्षय ऊर्जा स्त्रोत से उपलब्ध होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के जरिए 383 स्वीकृत गांवों का विद्युतीकरण हो चुका है। 108 स्वीकृत नए सबस्टेशन में से 63 स्थापित किए जा चुके हैं। 89 विद्युत सबस्टेशन का संवर्धन कार्य पूरा हो चुका है तथा शेष 20 का संवर्धन कार्य इस माह तक पूरा किए जाने की संभावना है। ट्रांसफार्मर वितरण, फीडर पृथक्करण, एलटी लाइनों तक 11केवी लाइन में प्रगति लक्ष्य के निकट है। राज्य में सड़क परिवहन नेटवर्क की स्थिति भी बेहतर हो रही है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 3367 किलोमीटर हो गई है। अन्य क्षेत्र की सभी सड़कों को मिलाकर पूर्व के मुकाबले नौ फीसद बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे सड़कों की कुल लंबाई 12736 किलोमीटर है।

हवाई उड़ानों का विस्तार

देवघर और धालभूमगढ़ में नए हवाई अड्डों की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा रांची स्थित बिरसा मुंडा हवाई अड्डे को विकसित कर हवाई परिचालन को सुदृढ़ किया जा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत दुमका और बोकारो हवाई अड्डों को दुमका-पटना, दुमका-रांची, दुमका-कोलकाता, बोकारो-पटना और बोकारो-कोलकाता के बीच उड़ान के लिए विकसित कर रहा है।

झारनेट से जुड़े 1700 कार्यालय

आइटी आधारित क्षेत्र में आधारभूत संचरना के विकास के तहत झारखंड राज्य सूचना एवं संचार नेटवर्क योजना (झारनेट) का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह नेटवर्क राज्य के लगभग 1700 कार्यालयों से जुड़ा है। झारनेट में सभी स्तरों पर लगभग 3000 आइपी फोन और 5300 डेटा उपयोगकर्ता हैं। कुल 19066 कामन सर्विस सेंटर्स शुरू किया गए हैं जिसमे 12101 कार्य कर रहे हैं। परियोजना से अबतक 142 प्रखंड आच्छादित हुए हैं और 2769 ग्राम पंचायतों में ओएफसी बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। राज्य में आप्टिकल फाइबर नेटवर्क की कुल लंबाई 7960.713 किलोमीटर है।

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