रांची(श्रद्धा छेत्री)। Underweight Baby: रांची सदर अस्पताल(Ranchi Sadar Hospital) में इस वर्ष अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक 3273 डिलीवरी(Delivery) कराई गई है। इसमें 3267 नवजातों(Newborns) का जन्म हुआ। सदर अस्पताल(Sadar Hospital) की ओर से दिए गए आंकड़े के मुताबिक इनमें से 948 बच्चों का वजन 2.5 किलो से कम रहा। यानी जन्म के समय औसत रूप से जो वजन रहना चाहिए था, उससे कम रहा। दूसरे शब्दों में कहें तो इनमें 29 प्रतिशत नवजात अंडरवेट(Underweight) रहे। चिकित्सकों(Doctors) का कहना है कि यदि नवजात का वजन(Newborn Weight) 2.5 किलो से 3.5 किलो के बीच होता है तो उसे सामान्य माना जाता है। यदि 3.5 किलो से अधिक का भी नवजात होता है तो उसे नार्मल माना जाता है।

सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन न मिल पाने से भी बच्चे होते हैं अंडरवेट: डा. विनोद कुमार

सिविल सर्जन डा. विनोद कुमार का कहना है कि औसत से कम वजन होने का एक कारण न्यूट्रिशन की कमी हो सकती है। इसमें कई पहलू हैं। एक तो कोविड का टाइम, लोगों को पैसे की भी कमी है। भोजन की कमी बच्चों के अंडरवेट होने का मुख्य कारण है। केवल दवाइयों से कुछ नहीं होता। एक प्रॉपर आहार भी जरूरी होता है। डा. विनोद कहते हैं गर्भवती महिला को लगभग 2000 कैलरीज का खाना चाहिए होता है। सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन न मिल पाने से भी बच्चे अंडरवेट होते हैं।

उच्च रक्तचाप, पानी की कमी के कारण भी बच्चे के वजन पर पड़ता है असर: डा. प्रीति रॉय

स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. प्रीति रॉय का कहना है कि नवजातों के अंडरवेट होने का कारण मैटरनल इन्फेक्शन भी हो सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान हाइपरटेंशन की वजह से बच्चों को ब्लड सही मात्रा में नहीं मिल पाता। इसके कारण बच्चे की ग्रोथ नहीं हो पाती। उच्च रक्तचाप, पानी की कमी के कारण भी बच्चे के वजन पर असर पड़ता है। इसके अलावा क्रोनिक फेटल इन्फेक्शन, यूटेराइन इन्फेक्शन भी बच्चों की ग्रोथ रोक देती है। बता दें कि रांची सदर अस्पताल के एएनसी में रजिस्टर्ड गर्भवती महिलाओं में से 4111 को आयरन फोलिक एसिड टैबलेट और 4004 महिलाओं को फूल कोर्स कैल्सियम टैबलेट दिए गए थे।

नार्मल डिलीवरी की संख्या अधिक :

रांची सदर अस्पताल में नार्मल डिलीवरी की संख्या सिजेरियन के मुकाबले अधिक है। अप्रैल से अक्टूबर के बीच होने वाली कुल 3273 डिलीवरी में 1793 महिलाओं की नॉर्मल डिलिवरी की गई है। जबकि 1480 महिलाओं का सिजेरियन किया गया है। जहां अप्रैल में नॉर्मल डिलिवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या 155 थी, वही अक्टूबर में यह आंकड़ा 467 पर पहुंच गया।

रांची सदर अस्पताल में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. गीता कुमारी ने बताया कि सदर में भी निजी अस्पतालों की तरह सारी सुविधाएं हैं। पर यहां किसी को भी सिजेरियन कराने पर जोर नहीं दिया जाता, अतिआवश्यक होने पर ही सिजेरियन किया जाता है। प्राइवेट में तो हड़बड़ी में जैसा-तैसा कर देते हैं। लेकिन प्राइवेट अस्पताल से भी बेहतर इलाज हमारा अस्पताल करता है।

सिजेरियन की सलाह के लिए आर्थिक रूप से समृद्ध घरों के लोग भी आने लगे हैं:

सदर अस्पताल की मैनेजर जीरन कंडुलना ने बताया कि यहां ऐसी गर्भवती महिलाएं भी आती हैं जो प्राइवेट अस्पताल से अपना इलाज करवा रही हैं। ऐसे में जब उन्हें सिजेरियन की सलाह दी जाती है तो वे सदर अस्पताल आ जाती हैं। आम लोग तो यहां आते हैं ही साथ ही आर्थिक रूप से समृद्ध घरों के लोग भी आने लगे हैं। हाल ही में एक आइएएस अफ्सर की पत्नी ने भी इसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है। शहर की प्रसिद्ध डॉक्टर भी अपनी बहू की डिलीवरी के लिए यहां आई थीं। सीएम हाउस के भी कर्मचारी इस अस्पताल में आते हैं।

एसएनसीयू से लेकर केएमसी तक सभी सुविधाएं बच्चों को दी जाती ही हैं मुफ्त:

जीरन कंडुलना ने बताया कि अस्पताल में नवजात शिशु के लिए एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉन केयर यूनिट्स) की सुविधा भी उप्लब्ध है। यहां नवजात को मुफ्त में रखा जाता है। इस आइसीयू की कीमत बाहर अस्पतालों में 8 हजार के करीब है जबकि यहां सुविधा मुफ्त में दी जाती है। बच्चों को फोटो थेरेपी भी यहां मुफ्त में दी जाती है। जबकि बाहर इस थेरेपी की कीमत एक दिन में 3000 है। वहीं नई मां के लिए केएमसी(कंगारु मदर केयर) की सुविधा भी उप्लब्ध है। इस यूनिट में अस्पताल की सिस्टर नई मांओं को बच्चे को दूध कैसे पिलाना है व कितना और कब-कब पिलाना है इस बारे में सिखाती है।

इन सारी सुविधाओं के कारण भी लोग यहां आने लगे है। प्रेग्नेंट महिला यदि हैपिटाइटिज बी पॉजिटिव पाई जाती है तो उसे 5000 रुपये का इंजेक्शन फ्री में लगाया जाता है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जो फंड आता है उसी से महिलाओं को सुविधाएं फ्री में दी जाती हैं। नवजात को लगने वाले सारे टीके भी यहां मुफ्त में लगाए जाते हैं।

  • 2.5 किलो से नीचे के नजवातों को माना जाता है अंडरवेट
  • 2.5 से 3.5 किलो के बीच के नवजातों को माना जाता है सामान्य वजन का
  • 3.5 किलो से अधिक के बच्चे भी सामान्य वजन की केटेगरी में

Edited By: Sanjay Kumar