रांची जासं। आज यानूि मंगलवार के दिन बिंदराई इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च स्टडी एंड एक्शन(Bindrai Institute for Research Study and Action) के द्वारा रांची के एचआरडीसी सभागार में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) को लेकर एक दिवसीय वर्कशॉप आयोजित किया गया। इसमें शामिल होने के लिए झारखंड के विभिन्न खदान प्रभावित जिलों से लोग उपस्थित हुए। मुख्य अतिथी के रूप में जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, दुमका, गढ़वा, लातेहार के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम को संचालित करने के लिए बिरसा के कोऑर्डिनेटर गोपी नाथ घोष, अधिवक्ता अमित अग्रवाल और अधिवक्ता विश्वजीत कर्मकार उपस्थित रहें।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए गोपीनाथ घोष ने डीएमएफ को जानने और समझने के उपर जोड़ दिया। उसके बाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अधिवक्ता अमित अग्रवाल और अधिवक्ता विश्वजीत कर्मकार ने डीएमएफ को विस्तार से प्रतिभागियों को बताया। उन्होंने बताया कि डीएमएफ को खदान प्रभावित समुदायों एवं क्षेत्रों को खदान से होने वाले मुनाफे का लाभ देने के लिए 2015 में एमएमडीआर एक्ट में संशोधन कर लागू किया गया।

2016 में ही झारखंड जिला खनिज फाउंडेशन ने रूल्स (DMFT Rules) बनाया:

2016 में प्रधानमंत्री के द्वारा खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के साथ इसे जोड़कर डीएमएफ को संचालित करने का रूपरेखा बनाया गया। उसके बाद 2016 में ही झारखंड जिला खनिज फाउंडेशन ने रूल्स (DMFT Rules) बनाया और खदान प्रभावित प्रत्येक जिले को डीएमएफ ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया।

आगे अधिवक्ताओं ने यह भी बताया की डीएमएफ का लाभ लेने वाले प्रभावित क्षेत्रों में कौन शामिल हैं। साथ ही डीएमएफ राशि कहां से और कैसे प्राप्त होंगे। उन्हें प्राथमिकताओं के आधार पर कैसे खर्च होना है, यह भी बताया गया।

वर्कशॉप में कई जिलों का ऑनलाइन पोर्टल भी खोलकर देखा गया। मगर अधिकतर जिलों के पोर्टल पर निर्देश के अनुसार जानकारी मौजूद नहीं थे। कुछ ट्रस्ट के पोर्टल पर तो बिल्कुल भी कोई जानकारी नहीं थी। सिर्फ पता और समितियों के सदस्यों के मामूली जानकारी ही उपलब्ध थे।

डीएमएफ के राशि का नहीं हो रहा है उचित तरीके से उपयोग:

आगे ग्राम सभा को डीएमएफ के अंतर्गत दिए गए शक्तियों के बारे में भी चर्चा हुई। दरअसल, DMF में प्रावधान है कि ग्राम सभा के तैयार किए गए सूची के अनुसार है डीएमएफटी राशि का आवंटन करे। ग्राम सभा के पास अधिकार है कि वह अपने क्षेत्र में योजना तथा परियोजनाओं का सूची प्राथमिकता के आधार पर तैयार करे। डीएमएफटी की बनाई गयी सूची को ट्रस्ट उक्त कारणों के साथ सुधर के लिए ग्राम सभा को वापस भेज सकता है मगर सूची में से कुछ हटा नहीं सकता। ग्राम सभा दोबारा उसे जब संशोधन कर के ट्रस्ट को सौंपता है, तो वह अंतिम सूची होती है। डीएमएफ के पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर चर्चा से सामने आया कि ग्राम सभा को डीएमएफ के क्षेत्र में अपनी ताकत का एहसास नहीं है। इससे यह साफ है कि डीएमएफ के राशि का उचित तरीके से उपयोग नहीं हो रहा है।

डीएमएफ ट्रस्ट राशि का उचित इस्तेमाल करने पर:

विभिन्न जिलों से उपस्थित प्रतिभागियों ने डीएमएफ में अपनी दिलचस्पी दिखाई एवं चीजों को अच्छे से समझने का प्रयास किया। उन्होंने अपने क्षेत्र में हो रहे समस्याओं तथा डीएमएफ राशि का अनुचित खर्चे के बारे में बातें रखीं। अंत में सभी इस बात पर सहमत हुए कि अपने क्षेत्र में डीएमएफ के विषय में ग्राम सभा को सचेत एवं मजबूत करने का कार्य करेंगे, जिससे डीएमएफ ट्रस्ट राशि का उचित इस्तेमाल करने पर बाध्य होगें।

Edited By: Sanjay Kumar