हजारीबाग, [विकास कुमार]। अगर आपके बच्चे बिना हेलमेट और लाइसेंस के सड़कों पर बाइक दौड़ा रहे हैं, आपने उन्हें लाड-प्यार में बाइक थमा रखी है, तो सावधान हो जाएं। हजारीबाग पुलिस अब ऐसे बच्चों के अभिभावकों की काउंसलिंग करने का अभियान चलाने जा रही है। मतलब साफ है कि अगर बच्चे बिना लाइसेंस व हेलमेट पकड़े जाएंगे, तो उनके माता-पिता को पुलिस की टीम के समक्ष हाजिरी लगानी पड़ेगी। पुलिस के सवालों का जवाब देना होगा। काउंसलिंग के दौरान उन्हें सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों से भी रूबरू कराया जाएगा।

सोमवार से शुरु होगा अभियान, दो से चार घंटे तक होगी काउंसलिंग

एसपी मनोज रतन चोथे की पहल पर सोमवार से हजारीबाग पुलिस अभियान शुरू करने जा रही है। बच्चों के पकड़े जाने पर सीसीआर कंट्रोल रूम में अभिभावकों को बुलाया जाएगा। दो से चार घंटे तक उनकी काउंसलिंग होगी। पुलिस टीम के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर काम करने वाली टीम भी यहां मौजूद रहेगी। उन्हें हजारीबाग से लेकर राज्यभर में सड़क हादसों में होने वाली मौत के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके बाद बांड लिखवाकर जाने की अनुमति दी जाएगी।

हर तीसरे दिन होती है एक बाइक सवार की मौत

हजारीबाग के जिला परिवहन विभाग की भी मानें, तो हादसों की बड़ी वजह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है। मरने वालों में सबसे बड़ी तादाद बाइक सवारों की होती है। सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों की बात करें, तो हजारीबाग में ही हर तीसरे दिन एक बाइक सवार की मौत सड़क दुर्घटना में होती है। इनमें से अधिकांश कम उम्र के युवक होते हैं। हेलमेट नहीं होना मौत की सबसे बड़ी वजह होती है। थोड़ी से लापरवाही की वजह से कई परिवार तबाह हो जाते हैं।

'अभिभावकों से अपील है कि वे कम उम्र के बच्चों को बाइक नहीं दें। सड़क दुर्घटना का यह बड़ा कारण बनते हैं। वे खुद इसके शिकार हो जाते हैं। थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार के लिए घातक साबित होती है। इसे लेकर हजारीबाग पुलिस एक अभियान भी शुरू करने जा रही है। बिना लाइसेंस व हेलमेट के बाइक दौड़ाने वाले बच्चों के मां-पिता को बुलाकर उनकी काउंसलिंग की जाएगी।' -मनोज रतन चोथे, एसपी हजारीबाग।

Edited By: Sujeet Kumar Suman