रांची, जेएनएन। Coronavirus (COVID-19) Vaccine Vaccination India झारखंड में भी कोरोना टीकाकरण के महाअभियान का शानदार आगाज हो चुका है। हालांकि, यहां अभी 48 केंद्रों पर ही टीकाकरण की शुरुआत हुई है, लेकिन उम्मीद है कि केंद्र से अनुमति मिलने के बाद शीघ्र ही कई अन्य केंद्रों पर टीकाकरण की शुरुआत हो जाएगी। राज्य में ऐसे 129 केंद्रों पर टीकाकरण की पूरी तैयारी पहले ही कर ली गई है। झारखंड में इस महाअभियान का आगाज शानदार इसलिए है, क्योंकि टीका लेने के लिए न तो स्वास्थ्य कर्मियों में कोई झिझक दिखी, न ही टीके से किसी को किसी तरह की परेशानी ही हुई।

यहां टीकाकरण के खिलाफ दुष्प्रचार या अफवाह जैसी कोई बात भी सामने नहीं आई। सभी ने एक सुर से टीकाकरण का स्वागत किया है। निश्चित रूप से यह कोरोना मुक्त झारखंड की ओर एक बड़ी पहल है, क्योंकि इतने बड़े अभियान की सफलता सभी के सहयोग से ही संभव है। झारखंड में केंद्र के निर्देश पर पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और अस्पतालों में काम करनेवाले सफाई कर्मियों को टीका लगाने का निर्णय लिया गया है।

अभियान के पहले दिन इन्हें ही टीका लगा। यह निर्णय उचित है, क्योंकि जिन स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी, उनका टीके पर पहला हक बनता है। चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कर्मियों के सबसे पहले टीका लेने से लोगों का इसपर विश्वास और भी मजबूत होगा। अगले चरण में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों तथा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों को कोरोना का टीका लगाया जाएगा।

राज्य को अभी तक 1.62 लाख टीके की डोज मिली है। उम्मीद है कि केंद्र से आगे भी टीके मिलते रहेंगे, ताकि इस खतरनाक वायरस से सभी लोगों को बचाने का उद्देश्य पूरा हो सके। सभी प्रतिरक्षित होंगे, तभी झारखंड या देश कोरोना मुक्त हो पाएगा। यदि टीके की उपलब्धता हो, तो राज्य सरकार अपने खर्च से भी इसे मंगा सकती है। उम्मीद की जा सकती है कि जिस तरह झारखंड ने पूर्व में पल्स पोलियो या अन्य टीकाकरण अभियान में बेहतर किया, उसी तरह कोरोना टीकाकरण अभियान को भी सफल बनाने में अपनी पूरी भूमिका निभाएगा।

सफाईकर्मी मरियम गुडिय़ा को पहला टीका लगा, बोलीं आज मैं बहुत खुश हूं

राज्य में टीकाकरण की शुरुआत शनिवार को रांची के सदर अस्पताल से हुई । 11:22 बजे सदर अस्पताल में यहां के फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट की सफाईकर्मी मरियम गुडिय़ा को पहला टीका लगाया गया। मरियम ने कहा कि यह मेरे जीवन का सबसे अनमोल दिन है। 2013 से रांची के सदर अस्पताल में कार्यरत हूं। सबसे छोटा कर्मचारी होने के बाद भी टीका देने के लिए सबसे पहले मेरा चयन किया गया, यह मेरे लिए गर्व का दिन है। मरियम ने कहा कि उसका एक 10 साल का लड़का है। कोविड के दौरान हर दिन अस्पताल आना होता था। कोविड के समय में जब अस्पताल आती थी तो मुझे अपने बेटे को लेकर भी चिंता लगी रहती थी। इसके बाद भी काम करती थी। आज टीका लगाने से बहुत खुशी हो रही है। टीका लगने के बाद कोई दिक्कत नहीं हुई है। एकदम नार्मल हूं। डेढ़ घंटे के बाद भी किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई है।

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना को नहीं मिली टीका लगवाने की अनुमति

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने घोषणा कर रखी थी कि कोरोना का टीका आने के बाद पहला टीका वह लगवाएंगे, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इसके लिए उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी, क्योंकि सारा शेड्यूल पहले से निर्धारित था। बता दें कि कोरोना टीकाकरण के लिए कोविन पोर्टल पर स्वास्थ्यकर्मियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। किन्हें-कब टीका लगना है, इसका पूरा शेड्यूल निर्धारित कर लिया गया है, जिसमें बदलाव नहीं किया जा सकता है।

बताते चलें कि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग भारत सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि वह भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मी हैं। इसलिए उन्हें भी टीका लगना चाहिए, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने इस आधार पर अनुमति देने से मना कर दिया। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार शायद स्वास्थ्य मंत्री को स्वास्थ्य विभाग का कर्मी नहीं मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री को टीका लग जाता तो शायद सभी को टीका लग जाता। उन्होंने कहा कि कोरोना टीकाकरण को लेकर झारखंड में मुकम्मल तैयारी हो चुकी है। यह महाअभियान सफलतापूर्वक संपन्न होगा।

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