जागरण संवाददाता, रांची: सावन पूर्णिमा पर गुरुवार को रक्षाबंधन पर्व एवं स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लासपूर्वक मनायी जाएगी। पूर्णिमा तिथि भगवान शिव की पूजा-अर्चना भी काफी शुभ माना गया है। सावन मास का अंतिम दिन होने के कारण शिवालयों में जलाभिषेक के लिए सुबह से ही भारी भीड़ होगी। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु रक्षा बंधन का पर्व मनाएंगे। प्रेम के पर्व पर बहन अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम का डोर बांधेंगी। माथे पर तिलक कर रक्षा का संकल्प लेंगी। भाई भी अपनी बहनों को वचन देंगे। यथा संभव बहनों को उपहार दिया जाएगा। पर्यावरण प्रेमी पेड़-पौधे को रक्षा सूत्र बांधकर हरियाली बरकार रखने का संकल्प लेंगे। दिनभर घरों में उत्साह का वातारण होगा। घर आने वाले भाईयों के लिए बहने मीठे पकवान बनाएंगी। वहीं कई बहने अपने भाई के घर पहुंचेंगी। पर्व को लेकर छोटे-छोटे बच्चों का उत्साह देखने लायक होगा। नया वस्त्र पहनकर ये बच्चे दिनभर धमाचौकरी मचाएंगे। बाहर रहने वाले भाईयों के लिए बहनों ने पोस्ट से ही राखी भेज दी है।

पहाड़ी मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए सुबह चार बजे खोला जाएगा। सुबह 10 बजे झंडारोहण किया जाएगा। संध्या साढ़े पांच बजे श्रृंगार और सात बजे महाआरती होगी। श्रवण नक्षत्र में बालाजी के दर्शन अत्यंत फलदायी

जागरण संवाददाता, रांची: श्रावणी पूर्णिमा व श्रवण नक्षत्र में भगवान बालाजी वेंकटेश का दर्शन और पूजा-अर्चना विशेष शुभदायक माना गया है। आज गुरूवार का शुभ दिन होने से श्री भगवान के त्रिवेणी नेत्र दर्शन का दिन है। इस दुर्लभ संयोग पर गुरुवार को रातू रोड स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में दिनभर अनुष्ठान होंगे। सर्वप्रथम ब्रह्मामुहूर्त में भगवान बालाजी का महाभिषेक, श्रृंगार, भोग, आरती, स्तुति के बाद श्री वैष्णव जगत के प्रवर्तक मद्रामानुजाचार्य वैदिकानाम स्वरपरंपरानुसार उपाकर्म किया जायेगा। वेद विधान से आराधना, स्तुति के बाद नेत्र दर्शन आरंभ होगा। बालाजी मंदिर के व्यवस्थापक रंजन सिंह ने बताया कि पूर्णिमा तिथि में उपवास रखकर विष्णुरूप बालाजी एवं श्रीनिवास और भूमिदेवी की अर्चना एवं हुण्डी में दान देने से भक्तों को परमपद की प्राप्ति होती है।

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Posted By: Jagran