रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड में बच्चों की देखभाल में जुटी मान्यता प्राप्त संस्थाओं की जमीनी हकीकत सामने आने के बाद महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की इकाई जेएससीपीएस ने 16 संस्थाओं का निबंधन रद कर दिया है। इससे इतर 15 संस्थाओं को राहत दी है। अक्टूबर 2018 के आखिरी सप्ताह में जेएससीपीएस ने झारखंड की 31 संस्थाओं से शो-कॉज भेजा था। शो-कॉज के माध्यम से संस्थाओं से तकरीबन सवा सौ बिंदुओं पर जवाब मांगा गया था।

तीन अलग-अलग स्तरों पर हुई जांच के बाद जेएससीपीएस ने 15 बालगृहों में बच्चों के रखरखाव के अनुकूल पाया, शेष 16 संस्थाओं के जवाब, बुनियादी सुविधाओं तथा मनोवैज्ञानिक ढंग से बच्चों के रखरखाव में गड़बड़ी पाते हुए उसका निबंधन रद कर दिया। जिन संस्थानों का निबंधन रद किया गया है, उनमें मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संबद्ध निर्मल हृदय भी है, जिसपर बच्चों के बेचे जाने का भी आरोप लग चुका है।

इसी तरह महर्षि बाल्मीकि विकलांग एवं अनाथ सेवा आश्रम रांची, लोक विकास बिंदु रांची, समाधान रांची, सहयोग विलेज गढ़वा व बोकारो, पीके मिशन आवासीय बाल गृह धनबाद, रजरप्पा विकलांग सेवा समिति रामगढ़, स्टेप्स खूंटी, ईडीआइएसएस रांची, नारायणी चैरिटेबल ट्रस्ट धनबाद, मिशेल ओबामा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी पूर्वी सिंहभूम, स्वामी विवेकानंद नेत्रहीन विद्यालय हजारीबाग, बापू अखिल मानव कल्याण केंद्र चतरा तथा गढ़वा की सर्वागीण ग्रामीण विकास समिति का निबंधन रद किया गया है। इन संस्थाओं को राहत भारतीय किसान संघ रांची, कंठा सिंह अनाथालय पूर्वी सिंहभूम, सहयोग विलेज खूंटी (बालगृह, बालक व बालिका, सिमडेगा), विकास केंद्र हजारीबाग (बालगृह, हजारीबाग), समन्वय संस्थान गिरिडीह (बालगृह, गिरिडीह), इंटीग्रेटेड सोशल डवलपमेंट आर्गेनाइजेशन पलामू (बालगृह एवं विशेष दत्तक ग्रहण संस्था, पलामू), सहयोग विलेज खूंटी, सृजन फाउंडेशन हजारीबाग (विशेष दत्तक ग्रहण संस्था, चतरा), दीया सेवा संस्थान रांची (खुला आश्रय गृह, रांची), सोसाइटी फार रूरल डवलपमेंट चतरा (खुला आश्रयगृह, धनबाद), संग्रह समाज उत्थान समिति, पलामू (खुला आश्रय गृह, पूर्वी सिंहभूम), ज्योतिषका सरायकेला-खरसावां, केशव माधव बाल आश्रम खूंटी को राहत दी गई है।

इन बिंदुओं को बनाया गया था जांच का आधार : संस्थाओं के पास उपलब्ध कमरों की संख्या, केबल नेटवर्क की उपलब्धता, इंडोर गेम की स्थिति, बच्चों के मनोरंजन के लिए सैर सपाटे की स्थिति, संस्थाओं में फ्लैश, वाश बेसिन, जल निकासी, धोबी, वाशिंग मशीन आदि की मौजूदगी। उम्र के हिसाब से बच्चों का समूह बनाकर उनकी देखरेख, बच्चों के कपड़े, कंप्यूटर, इंटरनेट, फोन आदि की उपलब्धता। व्यावसायिक प्रशिक्षण की स्थिति, गुमशुदा बाल ट्रैक वेबसाइट में बच्चों की एंट्री, बाल समिति के गठन की स्थिति, पोषक आहार, खाना बनाने और खिलाने के स्थल आदि।