रांची, राज्य ब्यूरो। अपनी कई मांगें नहीं माने जाने से नाराज चल रहे झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) ने आंदोलन के लिए अपनी कमर कस ली है। इस संबंध में राज्य सरकार को सकारात्मक पहल करने का अनुरोध करते हुए उन्हें 15 जनवरी तक का समय दिया है। ऐसा नहीं करने पर 16 जनवरी से आंदोलन की चेतावनी दी है।

आंदोलन के प्रथम चरण में अफसर काला बिल्ला लगाएंगे तथा विधि-व्यवस्था से जुड़े कार्यो का बहिष्कार करेंगे। 20 जनवरी को संघ की आमसभा होगी, जिसमें अफसर बेमियादी हड़ताल तक पर जाने का फैसला ले सकते हैं। शुक्रवार को झासा के कार्यकारी अध्यक्ष राम कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कमेटी, रांची की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

वक्ताओं ने दो टूक कहा कि अगर सरकार एक-दो मांगों पर सहमति व्यक्त करती है तो संघ आंदोलन वापस नहीं लेगा। कहा गया कि मुख्य सचिव के स्तर से आठ महीने पूर्व ही सभी मांगों पर सहमति प्रकट करते हुए एक-दो महीने में निर्णय लेने की बात कही गई थी, जिसपर अबतक कुछ नहीं हो सका है।

बैठक में झासा के महासचिव यतीन्द्र प्रसाद, अरविंद कुमार मिश्रा, प्रताप किचिंगिया, अंजनी कुमार मिश्र समेत खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा आदि जिलों के अफसरों ने शिरकत की।

इन मांगों को लेकर उग्र हैं झासा के पदाधिकारी

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर बेसिक ग्रेड सेवा के अफसरों को वेतनमान देना, अपर सचिव तथा विशेष सचिव के वेतनमान को अपग्रेड करते हुए 8900 से एक लाख करना, प्रशासनिक सेवा के चिह्नित पदों पर अन्य सेवाओं के पदाधिकारियों को पदस्थापित नहीं किया जाना, प्रतिवर्ष जनवरी माह में प्रोन्नति के लिए वरीयता पैनल जारी करना, प्रीमियर सेवा लागू करना, सभी अंचलों में अंचल गार्ड को प्रतिनियुक्त करना, चिकित्सा भत्ता प्रति माह 1000 रुपये की जगह चिकित्सा बीमा लागू करना, राजस्व प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करना, केंद्र की तर्ज पर एलटीसी, 2017 के आइएएस की रिक्ति को भरना आदि शामिल है।

Posted By: Jagran